टीम इंडिया के लिए अहमदाबाद टेस्ट पूरी तरह मनमाफिक हो रहा है। वीरेंद्र सहवाग की धुआंधार वापसी, शतकीय ओपनिंग साझेदारी के बाद दूसरे दिन चेतेश्वर पुजारा का दोहरा शतक, युवराज का बेहतरीन अर्धशतक और दिन के अंत तक इंग्लैंड टीम के तीन बेशकीमती विकेट। कुल मिलाकर यह भारत की जीत की स्क्रिप्ट की शुरुआती दो दिन की कड़ियां हैं, जिसका समापन भारतीय टीम की शानदार जीत के साथ होना तय है।
शुक्रवार को भारत ने आठ विकेट पर 521 रन बनाकर पारी घोषित की, जिसके जवाब में इंग्लिश टीम महज 41 रन पर तीन विकेट गंवाकर संघर्ष कर रही थी। मेहमान टीम अभी 480 रन पीछे है और तीसरे दिन उसका पहला मकसद फालोऑन टालना होगा। अश्विन ने निक कॉम्पटन (09) और जोनाथन ट्रॉट (0) को पवेलियन भेजा जबकि प्रज्ञान ओझा ने नाइटवाचमैन जेम्स एंडरसन को आउट कर इंग्लैंड पर शिकंजा कस दिया।
स्टंप्स के समय कप्तान एलिस्टर कुक 22 और केविन पीटरसन (06) रन बनाकर क्रीज पर थे। अपने होम ग्राउंड पर चेतेश्वर पुजारा 98 रन से आगे खेलने उतरे और कई सवालों का जवाब देते हुए 206 रन पर शान से नाबाद पेवेलियन लौटे। राहुल द्रविड़ के स्थान नंबर तीन पर खेलने उतरे पुजारा ने दिखाया कि वह अपने आदर्श की जगह लेने के लिए पूरी तरह तैयार हैं।
कैरियर का पहला दोहरा शतक ठोकने वाले पुजारा ने साढे़ आठ घंटे की मैराथन पारी में 389 गेंदों का सामना किया और शानदार 21 चौके जड़े। चार विकेट पर 323 रन से आगे खेलने उतरी भारतीय टीम को विशाल स्कोर तक पहुंचाने में युवराज सिंह (74) का भी अहम योगदान रहा।
युवी ने पुजारा का अच्छा साथ निभाया और पांचवें विकेट के लिए 130 रन जोड़े। युवराज ने 151 गेंदों में छह चौके और दो छक्के उड़ाए। रविचंद्रन अश्विन ने (23) भी पुजारा के साथ सातवें विकेट के लिए 66 रन साझेदारी निभाई। स्वान ने 51 ओवरों में 144 रन देकर कुल पांच विकेट अपने नाम किए।
तीसरे दिन इंग्लैंड के लिए फालोऑन टालना कतई आसान नहीं होगा। पिच के कई हिस्सों पर असमान उछाल है और गेंद नीची आ रही है। स्वान ने चार विकेट ऐसी ही गेंदों पर हासिल किए। इसी को देखते हुए अश्विन से पहला ओवर कराया गया।
‘अभी द्रविड़ से पुजारा की तुलना ना करें’
पूर्व भारतीय कप्तान कपिल देव चेतेश्वर पुजारा को खूब सराहा लेकिन साथ ही कहा कि पुजारा की अभी राहुल द्रविड से तुलना ठीक नहीं होगी। उन्होंने कहा पुजारा को जगह खुद बनाने दो। उन्होंने दोहरा शतक बना दिया है तो इसका मतलब यह नहीं कि उन्हें अगला द्रविड़ कहा जाने लगे। द्रविड 15 वर्ष खेलने के बाद जाकर राहुल द्रविड बने थे।
मुझे आउट होना पसंद नहीं है। मैं घरेलू क्रिकेट में ऐसा करता रहा था। मेरे विकेट की हमेशा कीमत रहती है और गेंदबाजों को मेरा विकेट लेने के लिए मेहनत करनी पड़ती है। दोहरा शतक पूरा करने के बाद भी मैं अपना विकेट देना नहीं चाहता था। यही कारण है कि मैं बड़ा स्कोर बना पाता हूं। मुझे इंग्लिश गेंदबाजों का सामना करने में कोई परेशानी नहीं हुई। शुरू में मेरी चिंता ऑफ स्पिनर ग्रीम स्वान को लेकर थी लेकिन उनके कुछ ओवर खेलने के बाद मुझे लगा कि मैं उन्हें आसानी से खेल सकता हूं। - चेतेश्वर पुजारा