लहरों से डर कर नौका पार नहीं होती...हिम्मत करने वालों की कभी हार नहीं होती
पाकिस्तानी बल्लेबाज फवाद आलम के लिए यह पंक्तियां बिलकुल सटीक बैठती है, जिन्होंने इसे ऐसा आत्मसात किया कि इतिहास में उन्हें बतौर उदाहरण पेश किया जाएगा। 10 साल 259 दिन के लंबे अंतराल के बाद इस बल्लेबाज की पाकिस्तानी टीम में वापसी हुई। 3910 दिन लंबे इंतजार के बाद इंग्लैंड के खिलाफ साउथैम्पटन में मिले मौके को फवाद भूना नहीं पाए और बिना खाता खोले पवेलियन लौट गए। फिर न्यूजीलैंड के खिलाफ दो मैच की टेस्ट श्रृंखला में उन्हें एक और मौका मिला, जहां फवाद आलम ने कमाल कर दिया।
आईसीसी वर्ल्ड टेस्ट चैंपियनशिप के तहत खेले गए इस मैच में फवाद आलम ने शानदार शतक ठोका। 35 वर्षीय आलम ने 2009 में टेस्ट डेब्यू किया था। इसी साल अपना पहला शतक भी लगाया। अब दूसरे शतक के लिए उन्हें एक दशक से भी लंबा इंतजार करना पड़ा। पांचवें क्रम पर बल्लेबाजी करते हुए फवाद आलम ने 102 रन बनाए हालांकि वह अपनी टीम को हार से नहीं बचा पाए।
माउंट मॉनगनुई के बेय ओवल मैदान पर बुधवार को मेजबान न्यूजीलैंड ने पाकिस्तान को 101 रन से रौंदा। मेहमान टीम का स्कोर एक वक्त 75/4 हो गया था। मगर फवाद आलम ने अंतिम दिन कार्यवाहक कप्तान मोहम्मद रिजवान के साथ मिलकर 165 रन की साझेदारी की। रिजवान के विकेट के साथ यह साझेदारी टूटी फिर फवाद आलम भी 269 गेंदों का सामना कर पवेलियन लौट गए। फवाद जब आउट हुए तो पाकिस्तान को जीत के लिए 131 रन की दरकार थी और उसके चार विकेट शेष थे।
फवाद आलम के दूसरे शतक की कहानी जितनी ऐतिहासिक है उनका ही दिलचस्प उनका इस मैच में विकेट था। दोनों ही पारियों में उन्हें एक ही जोड़ी ने पवेलियन भेजा। पेसर नील वैगनर गेंदबाज थे और दोनों ही बार फवाद आलम का कैच बीजे वाटलिंग ने लपका। पाकिस्तान ने दूसरी पारी में तीन विकेट पर 71 रन से आगे खेलना शुरू किया था, उसे न्यूनतम 136 ओवर में 373 रन का लक्ष्य मिला था। सीरीज का दूसरा और अंतिम मुकाबला क्राइस्टचर्च में 3 जनवरी से खेला जाएगा।