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Fake IPL: सट्टा लगाने के लिए गुजरात में खेला जा रहा था फर्जी आईपीएल, सटोरियों के कहने पर चौके-छक्के लगाते थे खिलाड़ी

Mon, 11 Jul 2022 01:55 PM IST
शक्तिराज सिंह स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

गुजरात के वडनगर में फर्जी आईपीएल का खुलासा हुआ है। इस लीग में खिलाड़ी सटोरियों के कहने पर चौके छक्के लगाते थे और मैच का प्रसारण भी एक एप पर होता था। इसी मैच पर सट्टा लगाया जाता था। 
 
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फर्जी आईपीएल पर सट्टा लगाने वाला गिरोह - फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
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गुजरात के वडनगर से पुलिस ने एक गिरोह को पकड़ा है, जो आईपीएल की तर्ज पर मैच कराती थी और इस पर सट्टा लगाया जाता था। ये सारा काम रूस में बैठा गिरोह का मुखिया करता था। पुलिस को अभी भी इसकी तलाश है। इस लीग में खिलाड़ी से लेकर अंपायर और मैदान तक सब कुछ फर्जी था, लेकिन सट्टा असली पैसे का लगाया जा रहा था। इस लीग के मैच भी एक एप पर प्रसारित होते थे और इसी आधार पर लोग सट्टा लगाते थे। पुलिस ने सटोरियों के पास से बड़ी संख्या में सामान जब्त किया है, जिसमें कैमरे, फोन, क्रिकेट किट और कई तरह की मशीनें शामिल हैं। 
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मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार गुजरात के वडनगर में कुछ लोगों ने एक फॉर्म हाउस खरीदा था। मालीपुर गांव के इस फॉर्म हाउस में क्रिकेट का मैदान बनाया गया और इसे आईपीएल के स्टेडियम का रूप दे दिया गया। फ्लड लाइट्स से लेकर कैमरा, कमेंट्री बॉक्स तक हर चीज की व्यवस्था की गई। अंपायर और कमेंटेटर भी बुलाए गए। गांव के खिलाड़ियों को इकट्ठा किया गया, उन्हें हर मैच के लिए 400 रुपये मिलते थे। इसके बदले में उन्हें मैच खेलना होता था और सटोरियों के कहने पर चौके-छक्के लगाने पड़ते थे। कई बार आउट भी होना पड़ता था। 
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एप पर प्रसारित होता था मैच
इन मैच का प्रसारण एक एप पर होता था। एक खिलाड़ी हर्षा भोगले की आवाज में कमेंट्री करता था। सट्टा लगाने वाले लोग एप पर मैच देखते थे और उस पर सट्टा लगाते थे। लोग जिस तरह से सट्टा लगाते थे, उसी हिसाब से सटोरिये मैच का नतीजा और हर गेंद में चौके-छक्के लगाने की बात भी तय करते थे। खिलाड़ियों को निर्देश दिया जाता था और होता वही था, जो सटोरिये चाहते थे। 

यह खबर सुनने के हर्षा भोगले ने भी ट्वीट किया है कि वो सुनना चाहेंगे कि यह कमेंट्री किस आदमी की है और वो कैसे उनकी आवाज में कमेंट्री करता था।

स्कूलों में भगवद् गीता शामिल करने पर सरकार को नोटिस
गुजरात हाईकोर्ट ने स्कूलों में भगवद्गीता को प्रार्थना और अन्य गतिविधियों में शामिल करने के सरकार के फैसले के खिलाफ सोमवार को नोटिस जारी किया है। अदालत ने हालांकि याचिकाकर्ता की ओर से सरकार के निर्णय पर रोक लगाने की मांग को खारिज करते हुए सरकार से 18 अगस्त तक इस पर जवाब मांगा है। चीफ जस्टिस अरविंद कुमार और जस्टिस आशुतोष शास्त्री की खंडपीठ जमियत-उलमा-ए-हिंद की ओर से शिक्षा विभाग के फैसले को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई कर रही थी। 
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