डुप्लेसिस ने जोर देकर कहा कि वह तीनों प्रारूपों में चयन के लिए उपलब्ध हैं। बकौल फाफ, 'दक्षिण अफ्रीकी क्रिकेट एक नए युग में प्रवेश कर रहा है। नया नेतृत्व, नए चेहरे, नई चुनौतियां और नई रणनीतियां। मैं बीते कुछ समय से मैं खेल से दूर था। आराम के दौरान मैंने अनुभव किया कि इतने साल तक बतौर कप्तान टीम की सेवा करना वाकई एक अद्भुत अहसास था। खेल के तीनों प्रारूपों में देश का प्रतिनिधित्व करना एक विशेष सम्मान की बात है। आपको इस सफर में कभी-कभी अकेली सड़क भी मिल सकती है, लेकिन मैं किसी भी अनुभव से निराश नहीं हूं, क्योंकि इसने मुझे वह आदमी बना दिया है जिस पर मुझे आज गर्व है। जब मैंने नेतृत्व संभाला, तो मैंने नेतृत्व करने, प्रदर्शन करने और सबसे महत्वपूर्ण रूप से सेवा करने की प्रतिबद्धता के साथ काम शुरू किया। यह फैसला मेरे लिए बेहद कठिन था, लेकिन मैं क्विंटन, मार्क बाउचर और अपने सभी साथियों से वादा करता हूं कि हम एक नई और युवा टीम खड़ी करेंगे। 2019 विश्व कप में निराशाजनक प्रदर्शन के बाद भी मैंने बतौर कप्तान सेवाएं देने का निर्णय लिया जबकि टीम के कुछ प्रमुख वरिष्ठ खिलाड़ी रिटायरमेंट के बाद कोचिंग स्टाफ से जुड़े, हमने तब तक साथ काम किया। कप्तानी में मेरा आखिरी सीजन करियर का सबसे चुनौतीपूर्ण क्षण भी रहा।'
एबी डीविलियर्स और फाफ डुप्लेसिस
चोट के कारण लंबे समय से टीम से बाहर रहने के बाद डीविलियर्स की जगह 2016 में पहली बार फाफ डु प्लेसिस को साउथ अफ्रीकी टेस्ट टीम की कप्तानी सौंपी गई थी। हालांकि वन-डे टीम की कमान उन्हें बाद में मिली। इंग्लैंड के दक्षिण अफ्रीका दौरे से डुप्लेसिस पूरी तरह दूर थे। हाल ही में संपन्न हुई इस सीरीज के पहले पड़ाव में दो टेस्ट खेले गए। 1-1 की बराबरी पर खत्म हुई इस श्रृंखला में फाफ नहीं खेले, इसके बाद तीन मैच की वन-डे सीरीज में क्विंटन डीकॉक को कप्तानी सौंपी गई थी और टी-20 श्रृंखला से भी दाएं हाथ का यह बल्लेबाज बाहर था।