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EXCLUSIVE: 16 साल पुरानी यादों में खोए तेंदुलकर, बुमराह को बताया दुनिया में सर्वश्रेष्ठ

Mon, 27 May 2019 04:37 AM IST
Mukesh Jha हेमंत रस्तोगी, नई दिल्ली
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सचिन तेंदुलकर, टीम इंडिया - फोटो : अमर उजाला
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सचिन तेंदुलकर के कैरियर पर निगाह डालें तो साफ दिखाई पड़ेगा कि क्रिकेट के रिकार्ड उनके पीछे दौड़ते थे। विश्व कप भी इससे अछूते नहीं रहे हैं। छह विश्व कप के 45 मैचों की 44 पारियों में सचिन के नाम छह शतक 15 अर्धशतक समेत 2278 रन हैं।

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विश्व कप में खेलने के माइंडसेट और टीम इंडिया की संभावनाओं के बारे में सचिन से बेहतर और कौन बता सकता है। अमर उजाला को दिए इंटरव्यू में सचिन ने विराट कोहली की टीम को संतुलित बताते हुए उसके विश्व कप जीतने के अच्छे अवसर करार दिए हैं। विश्व कप में अपने यादगार लम्हों को सांझा करते हुए उन्हें यह भी कहा कि यह विश्व कप सपाट पिचों पर होने वाला है और इंग्लिश कंडीशंस तभी प्रभावी होंगी जब आसमान पर बादल छाए होंगे।

सवाल- विराट कोहली की टीम में आपका खुद का क्या आंकलन है? क्या हम यह कह सकते हैं कि यह टीम विश्व कप जीतने में सक्षम है?
उत्तर- विश्व कप की इस टीम के बारे में बात करूं तो यह काफी संतुलित है। टीम में अनुभवी खिलाडिय़ों से साथ युवा भी हैं। कुछ नए चेहरे हैं। मैं कहूंगा कि यह बेहद संतुलित टीम है और काफी अच्छी टीम है, लेकिन अगर आप कोहली की कप्तानी में विश्व कप जीतने के दावेदार के रूप में टीम इंडिया के बारे में पूछते हैं तो मैं कहूंगा कि हां, टीम इंडिया के अवसर काफी अच्छे हैं। जिस तरह का प्रदर्शन टीम ने हाल ही में किया है, यकीनी तौर पर भारतीय टीम इस टूर्नामेंट की शीर्ष टीम है। मेरा मानना है कि टीम को उसके हालिया प्रदर्शन के आधार पर दावेदार के तौर पर देखा जा रहा है। टीम ने अपने प्रदर्शन से यह विश्वास कमाया है। दरअसल यह टीम की पिछली बेहतरीन उपलब्धियों को दर्शाता है।

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सवाल- टीम इंडिया के पेस अटैक का कैसे आंकते हैं? साथ ही जब आप जसप्रीत बुमराह की गेंदबाजी को देखते हैं तो आपके जहन में क्या आता है?
उत्तर- आपने एक साथ कई सवाल पूछ लिए हैं इसलिए मैं सभी का उत्तर एक-एक करके दूंगा। मेरा मानना है कि यह एक बेहतरीन पेस अटैक है। सभी तीनों तेज गेंदबाज एक दूसरे से अलग हैं। जब हम भुवनेश्वर की बात करते हैं तो वह जबरदस्त हैं वह गेंद को स्विंग कराने में सक्षम हैं। जब मुहम्मद शमी की बात करते हैं तो वह हवा में काफी तेज हैं और उनकी गेंद फिसलकर बेहद तेजी से आती है।
बुमराह का गेंदबाजी एक्शन थोड़ा अजीब है लेकिन वह लगातार निरंतरता से विविधिता, धीमी गेंद व यॉर्कर, के साथ गेंदबाजी कर सकते हैं। साथ ही उनकी गेंद भी पड़कर तेजी से फिसलती  है। बुमराह के बारे में मैं बिना किसी हिचक के साथ कह सकता हूं कि वह इस संस्करण के दुनिया से सबसे श्रेष्ठ गेंदबाज हैं।

सवाल- क्या हम भारतीय टीम के इस पेस अटैक को अब तक के सभी विश्व कप में सबसे श्रेष्ठ आक्रमण कह सकते हैं? 
उत्तर- मैं तुलना करने में विश्वास नहीं रखता। साथ ही 2003 विश्व कप में जो पेस अटैक हमारे पास था, उसमें श्रीनाथ, जहीर खान और आशीष नेहरा थे। ये सभी ऐसे गेंदबाज थे जो दुनिया से किसी भी उम्दा बल्लेबाज के सामने गेंदबाज करने में सक्षम थे। फिर 2011 में हमने जिस गेंदबाजी आक्रमण के साथ विश्व कप जीता था उसे भी नहीं भुलाया जा सकता। मैं समझता हूं कि हर पीढ़ी की उसकी उपलब्धि और देश के लिए दिए गए उसके योगदान का सम्मान होना चाहिए। मेरा मानना है कि हमें किसी के साथ तुलना नहीं करनी चाहिए। तुलना करना किसी की मेहनत और उसके योगदान के श्रेय को वापस लेने जैसा होता है। हमें मौजूदा गेंदबाजों को उनके प्रदर्शऩ के आधार पर ही उन्हें आंकना चाहिए। इस गेंदबाजी ने हाल में बेहतरीन प्रर्दशन किया है। उम्मीद करता हूं कि वे इस विश्व कप में सभी की उम्मीदों पर खरे उतरेंगे। 

सवाल-इंग्लिश कंडिशंस की बात करें तो कुलदीप यादव व युजवेंदर चहल कितने कारगर साबित होंगे?
उत्तर- इंग्लिश कंडीशंस तभी होती हैं जब आसमान पर बादल छाए रहते हैं। इंग्लैंड ने पाकिस्तान के खिलाफ जो चार मैच हाल ही में खेलें हैं, उनमें 350 या उससे ज्यादा रन बने हैं। यह श्रृंखला बताती है कि वहां पिचें काफी सपाट हैं। साथ ही फील्ड सेटिंग की बंदिशें भी होंगी और मुकाबले दो नई गेंदों के साथ खेले जाएंगे। कई अन्य पहलू भी हैं जैसे कि गेंद रिवर्स स्विंग नहीं होगी क्योंकि एक गेंद का इस्तेमाल सिर्फ 25 ओवर ही होना है। जाहिर है कि गेंद की चमक बरकरार रहेगी। मेरा मानना है कि यह सारे पहलू इस विश्व कप से जुड़ गए हैं। यही कारण है कि मुझे लगता है कि ऐसी परिस्तिथियों में विशुद्ध स्पिनरों के लिए बीच के ओवर काफी अहम रहने वाले हैं। हमारे पास कुलदीप व चाहल जैसे स्पिनर हैं। यह भी नहीं भूलना चाहिए कि आपके पास रविंदर जडेजा भी हैं जो अहम मौके पर ना केवल विकेट ले सकते हैं बल्कि बीच में किफायती गेंदबाजी भी कर सकते हैं।

सवाल-पाकिस्तान के खिलाफ इस बार भी टीम को खेलना है। आप ने भी विश्व कप में पाकिस्तान के खिलाफ पांच मैच खेले हैं। इन मुकाबलों के अनुभव सांझा कीजिए?
उत्तर- मैं गर्व के साथ कह सकता हूं कि पाकिस्तान के साथ विश्व कप के जिन पांच मुकाबलों में मैं खेला सभी भारत ने जीते। सिडनी में 1992 विश्व कप के पहले मुकाबले से लेकर सभी पांचों मैच जिस तरह से दोनों टीमों ने दूसरे के खिलाफ खेले, दूसरी टीमों के बीच होने वाले मुकाबलों की तुलना से बिलकुल अलग थे। पाकिस्तान से मैच के दौरान मैं साथियों से मजाक में कहा करता था कि अगले दिन अगर आपका गला खराब हो गया हो तो आपको अंदाजा हो जाता है कि पिछले दिन आपने जोश बढ़ाने के लिए कितनी मेहनत की। 1992 सिडनी में मेरे लिए यह पहला अनुभव था। 1996 में बंगलुरू में भी जीते। वह मैच भी जबरदस्त था। 1999 ओल्ड ट्रेफर्ड और 2003 विश्व कप का मुकाबला भी रोमांच से भरपूर था। 
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सवाल- पाकिस्तान के खिलाफ विश्व कप में आप अपना सबसे यादगार लम्हा कौन सा मैच मानते हैं?
उत्तर-मैं कहूंगा कि 2011 के फाइनल के बाद मेरे विश्व कप के सफर में पाकिस्तान के खिलाफ 2003 का सेंचुरियन में खेला गया मुकाबला सबसे रोमांचकारी था। 2003 का वह मैच मेरे खेल जीवन का सबसे बेहतरीन मैच था। 2011 विश्व कप में मोहाली में खेला गया सेमीफाइनल भी वह बड़े मौके वाला मैच था क्योंकि दोनों देशों के प्रधानमंत्री साथ में बैठकर विश्व कप सेमीफाइनल देख रहे थे। 2003 के विश्व कप में हम सेंचुरियन में पाकिस्तान के खिलाफ खेले थे। यह मैच मेरे लिए सबसे यादगार अनुभव है। उस मुकाबले को लेकर जो माहौल बना था, वह गजब का था। जब हम मैच खेलने के लिए होटल से ग्राउंड के लिए रवाना हुए तो प्रशंसक सड़क के दोनों ओर खड़े थे। एक ओर प्रशंसक तिरंगा लिए खड़े थे जबकि दूसरी ओर प्रशंसक के हाथ में पाकिस्तान का राष्ट्रीय झंडा  था। उस माहौल ने पूरे मैच को हमेशा के लिए मेरी यादगार बना दिया। यकीनी तौर पर यह मैच मेरे लिए सबसे खास अनुभव है। साथ ही जिस तरह से वह मैच हम खेले, वह भी उदहारणीय है। हमने यह मुकाबला  जबरदस्त संदेश के साथ बेहतरीन अंदाज में जीता था।
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