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कई बने करोड़पति तो किसी को क्यों नहीं मिला कोई खरीदार, समझिए IPL Auction का पूरा गणित

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आईपीएल नीलामी - फोटो : ट्विटर
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कोलकाता में आईपीएल ऑक्शन के दौरान ज्यादातर खिलाड़ियों की बोली उसी अंदाज में लगी, जिसकी लगभग उम्मीद की जा रही थी। हां, ये सही है कि किसी ने ये नहीं सोचा होगा कि ऑस्ट्रेलिया के पैट कमिंस को आईपीएल 2020 में हर गेंद फेंकने के लिए लगभग 4 लाख रुपये से भी ज्यादा की कमाई होगी। यानि कि जितने कमिंस के ट्विटर पर फॉलोअर भी नहीं है उससे ज्यादा रकम वो आईपीएल में हर गेंद फेंक कर कमाएंगे!

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आलम ये रहा कि विदेशी खिलाड़ियों में लिन, जेसन रॉय, क्रिस वोक्स, एलेक्स कैरी, डेविड मिलर, मिचेल मार्श, जोश हेजलवुड और जिमी नीशाम जैसे 8 खिलाड़ी मिलकर भी कमाई के मामले में कमिंस की बराबरी नहीं कर पाएंगे।

यही आईपीएल की नीलामी का एक नकारात्मक पहलू है। खिलाड़ी की योग्यता और काबिलियत से ज्यादा उनकी कमाई इस बात पर निर्भर करती है कि खास स्थान के लिए किसी एक खिलाड़ी को टीम में शामिल करने के लिए फ्रैंचाइजी में किस तरह की होड़ मची हुई है। कमिंस ऑस्ट्रेलियाई हैं, तेज गेंदबाज हैं। रिकॉर्ड अच्छा है। बल्लेबाजी भी कर सकतें है और अगर जरूरत पड़ी तो कप्तानी की भूमिका भी निभा सकते हैं। यानि कि कुल मिलाकर एक बेजोड़ पैकेज हैं और आईपीएल में तो पैकेज ही बिकता है।

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फिर करोड़पति बने उनादकट

जयदेव उनादकट
अब यूसुफ पठान का ही उदाहरण ले लें। आईपीएल के शुरुआती दिनों में पठान आईपीएल के पोस्टर ब्वॉय हुआ करते थे, लेकिन, पिछले कुछ सालों में उनके खेल में निरंतरता की कमी आई और यही वजह है कि इस बार नीलामी में उन्हें कोई पूछने वाला भी नहीं था। मगर हर खिलाड़ी के साथ नीलामी के दौरान तर्क काम नहीं करता है। अब जयदेव उनादकट को देखिए ना। आईपीएल में उनसे ज्यादा नौ बार किसी भी खिलाड़ी की बोली नहीं लगी है, लेकिन राजस्थान रॉयल्स को उनसे लगता है कि खासा लगाव है। 2018 में 11.5 करोड़ में खरीदा, 2019 में 8.4 करोड़ और अगले साल के लिए 3 करोड़। हर बार बड़ा डिस्काउंट लगाकर इस खिलाड़ी को टीम में शामिल करने की वजह है कि बाएं हाथ के तेज गेंदबाजों की भरमार आईपीएल में नहीं है। विविधता के नाम पर बिक जाते हैं।

चेन्नई की नई रणनीति

चेन्नई सुपरकिंग्स
उनादकट की तरह वरुण चक्रवर्ती भी बेहद लकी रहे हैं। किंग्स 11 पंजाब ने उन्हें पिछले साल 8.4 करोड़ खर्च करके शामिल किया था। वो खेले सिर्फ 1 मैच। उसके बाद से अब तक वरुण ने ना तो कोई फर्स्ट क्लास मैच खेला है और ना ही कोई टी-20 मैच। फिर भी कोलकाता नाइटराइडर्स ने उन पर 4 करोड़ का जुआ खेल दिया। ये निश्चित तौर पर हैरान करने वाला फैसला दिखा। भारतीय खिलाड़ियों में सबसे ज्यादा बोली लेग स्पिनर पीयूष चावला पर लगी।

कई जानकारों को लगता है कि चेन्नई का उन पर 6.75 करोड़ खर्च करना ज्यादा है, लेकिन वो भूल जाते हैं कि धोनी की रणनीति हर किसी से अलग है। चावला को धोनी बेहद करीब से जानते हैं और पिछले साल भी उन्हें टीम में शामिल करना चाहते थे।

आखिर लम्हों में कोलकाता ने राइट टू मैच कार्ड दिखाकर चावला को टीम में बरकरार रखने में कामयाबी हासिल कर ली थी। लेकिन, इस बार इमरान ताहिर के विकल्प के तौर पर धोनी ने चावला पर दांव खेला है। वैसे भी चावला का आईपीएल में रिकॉर्ड अच्छा है अगर आप पिछले साल के औसत खेल को नजरअंदाज कर दें तब।

मुंबई की नई चाल

मुंबई इंडियंस का स्क्वॉड - फोटो : मुंबई इंडियंस
मुंबई इंडियंस के पास नीलामी के दौरान सबसे कम पैसे थे, इसके बावजूद उन्हें 8 करोड़ कोल्टर नाइल पर खर्च कर दिए। लासिथ मलिंगा, ट्रेंट बोल्ट, मिचेल मैक्लागन और पोलार्ड के रहते हुए कितने मौके मिलेंगे नाइल को प्लेइंग इलेवन में? अजीब इत्तेफाक की बात करें तो आईपीएल में सिर्फ 12 रन देकर 6 विकेट लेने वाले (सर्वश्रेष्ठ गेंदबाजी आंकड़े एक मैच के) वेस्टइंडीज के अल्जारी जोसफ को भी कोई टीम नहीं मिली तो वही हाल ऑस्ट्रेलिया के लेग स्पिनर एडम जाम्पा का रहा। उनके नाम भी एक स्पिनर के तौर पर (सर्वश्रेष्ठ गेंदबाजी आंकड़े एक मैच के) 19 रन देकर 6 विकेट लेने का रिकॉर्ड है। लेकिन, कुछ खिलाड़ी ऐसे हैं जो पुरानी साख के दम पर हर बार एक नई टीम और वो भी खासी कीमत में ढूंढने में कामयाब हो ही जाते हैं। कुछ ऐसा ही हाल आखिरी कुछ सालों में युवराज सिंह का था। युवराज की ही राह पर चल रहे हैं ऑस्ट्रेलिया के ओपनर आरोन फिंच। पिछले 1 दशक में फिंच के लिए रॉयल चैलेंजर्स बैंगलोर 8वीं टीम होगी।

हनुमा और पुजारा नहीं बिके

हनुमा विहारी - फोटो : सोशल मीडिया
वैसे, आईपीएल के शुरुआत से ही दिल्ली की टीम नीलामी के दौरान अपने अजीबोगरीब फैसले से चौंकाती ही रही है। ये वही टीम है जिसने विराट कोहली की बजाय प्रदीप सांगवान पर दांव खेला था। दिल्ली के पास पहले से ही शिखर धवन, पृथ्वी शॉ और अजिंक्य रहाणे जैसे ओपनर हैं और ऐसे में जेसन रॉय के पीछे जाना थोड़ा हैरान करने वाला ही फैसला रहा है। खास तौर पर ये देखते हुए कि वो ऋषभ पंत से भी पारी की शुरुआत करा सकते हैं।

चेतेश्वर पुजारा और हनुमा विहारी का भी चयन ना होना हैरान करने वाला तो नहीं, लेकिन मायूस करने वाला जरूर है। 2014 से पुजारा आईपीएल से दूर हैं तो विहारी को पिछले साल बहुत मौके नहीं मिले थे।
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कोच से 10 साल उम्रदराज KKR का एक खिलाड़ी

प्रवीण तांबे और ब्रैंडन मक्कुलम - फोटो : ट्विटर
मगर, सिक्के का दूसरा पहले ये है कि प्रवीण तांबे को 48 साल की उम्र में भी आईपीएल में खेलने का मौका मिला है, एक ऐसी टीम से जिसके कोच की उम्र (ब्रैंडन मैक्कलम) उनसे 10 साल कम है। मेरे लिहाज से वेस्टइंडीज के ऑलराउंडर फेबियन एलन का सिर्फ 50 लाख पर सनराइजर्स के लिए चुना जाना सबसे फायदेमंद सौदा है जबकि शेल्डर कॉट्रेल और शिमरोन हेटमेयर को मौजूदा वन-डे सीरीज खेलने का जबरदस्त फायदा हुआ है।

डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यह लेखक के निजी विचार हैं। आलेख में शामिल सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है। अपने विचार हमें blog@auw.co.in पर भेज सकते हैं। लेख के साथ संक्षिप्त परिचय और फोटो भी संलग्न करें।
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