इंग्लैंड के टेस्ट कप्तान जो रूट ने कहा है कि रोटेशन नीति को छोड़ने का समय आ गया है जिससे कि भारत के खिलाफ और फिर एशेज में सबसे मजबूत संभावित टीम उतारी जा सके और वे विश्व टेस्ट चैंपियनशिप (डब्ल्यूटीसी) खिताबी मुकाबले को टेलीविजन पर देखने के बजाय इसके लिए चुनौती पेश कर सकें।
इंग्लैंड एवं वेल्स क्रिकेट बोर्ड (ईसीबी) की रोटेशन नीति उस समय विश्व क्रिकेट में चर्चा का विषय बन गई थी जब इस साल की शुरुआत में वे अपनी सबसे मजबूत टीम के साथ भारत दौरे पर नहीं गए थे और शृंखला 1-3 से गंवाने के कारण डब्ल्यूटीसी फाइनल की दौड़ से बाहर हो गए थे।
डब्ल्यूटीसी के नए चक्र की शुरुआत भारत और इंग्लैंड के बीच नॉटिंघम में चार अगस्त से शुरू हो रही पांच टेस्ट मैचों की शृंखला के साथ होगी। केविन पीटरसन, इयान बेल और माइकल वॉन सहित इंग्लैंड के कई पूर्व क्रिकेटरों ने भारत के खिलाफ महत्वपूर्ण शृंखला में सर्वश्रेष्ठ टीम नहीं उतराने के लिए ईसीबी को लताड़ा था।
‘ईएसपीएनक्रिकइंफो’ ने रूट के हवाले से कहा, ‘हम ऐसे समय में आ गए हैं जहां आराम और रोटेशन की नीति को पीछे छोड़ना होगा। उम्मीद करते हैं कि अगर सभी फिट हुए तो हम अपनी सर्वश्रेष्ठ उपलब्ध टीम उतारेंगे।’
जॉनी बेयरस्टो और मार्क वुड भारत के खिलाफ पहले दो टेस्ट में नहीं खेले थे लेकिन चौथे टेस्ट में उतरे थे। टीम के पहली पसंद के विकेटकीपर जोस बटलर शृंखला के पहले मुकाबले के बाद स्वदेश लौट गए थे। रूट ने उम्मीद जताई कि इस बार ऐसा नहीं होगा।
उन्होंने कहा, ‘हमें दो शानदार प्रतिद्वंद्वियों के खिलाफ 10 बेहद कड़े टेस्ट खेलने हैं लेकिन यह हमारे पास दमदार क्रिकेट खेलने का शानदार मौका है और अगर सभी फिट और उपलब्ध हुए तो हमारे पास अच्छी टीम होगी।’
रूट ने कहा कि भारत के खिलाफ कड़ी शृंखला एशेज की आदर्श तैयारी होगी और इसलिए जरूरी है कि सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ी उपलब्ध रहें। एक अन्य मुद्दा जिसे लेकर रूट चिंतित हैं वह यह है कि खिलाड़ियों को उनके परिवार के साथ एशेज शृंखला के लिए ऑस्ट्रेलिया जाने की स्वीकृति दी जाए।