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Election Results: इयान बॉथम से दिलीप घोष तक, अब भी अपनी क्षमता से विरोधियों को हैरान कर रहे हैं कीर्ति आजाद

Tue, 04 Jun 2024 09:19 PM IST
स्वप्निल शशांक स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

बंगाल की राजनीति को समझने वाले लोग यह तर्क दे सकते हैं कि भाजपा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष घोष को एक अपरिचित क्षेत्र से चुनाव लड़ने के लिए मजबूर होना पड़ा, लेकिन फिर यह आजाद के लिए भी बहुत परिचित क्षेत्र नहीं था।
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टीएमसी प्रत्याशी और पूर्व भारतीय क्रिकेटर कीर्ति आजाद - फोटो : ani
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विस्तार
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कीर्ति आजाद को बर्धमान दुर्गापुर सीट से टिकट मिला। दक्षिण बंगाल में स्थित बर्धमान-दुर्गापुर लोकसभा सीट पर मुकाबला दिलचस्प रहा। इस चुनाव में भाजपा ने यहां से प्रदेश अध्यक्ष रहे दिलीप घोष को उतारा था, जो पिछली बार मेदिनीपुर से सांसद थे। वहीं, भाकपा ने सुकृति घोषाल को अपना चेहरा बनाया था। 
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बर्धमान-दुर्गापुर लोकसभा सीट पर पिछला मुकाबला कांटे का रहा था और हार-जीत महज 2439 वोटों से तय हुई थी। पिछली बार यहां से भाजपा के एसएस अहलूवालिया जीते थे। हालांकि, इस बार कीर्ति आजाद को 720667 वोट मिले और वह जीत गए। उन्होंने दूसरे स्थान पर रहे दिलीप घोष पर 137981 वोट से जीत दर्ज की। दिलीप को 582686 वोट मिले।

इयान बाथम को कीर्ति आजाद ने छकाया था
दिलीप घोष अगर अपनी हार से स्तब्ध हों तो उन्हें चार दशक पुराना इयान बॉथम का वीडियो देखना चाहिए जो अपना विकेट गंवाने के बाद उनसे भी अधिक हैरान थे। ओवल में आजाद ने नीची रहती गेंद पर बॉथम को बोल्ड किया था और उस समय दुनिया के नंबर एक ऑलराउंडर के चेहरे पर हताशा साफ देखी जा सकती थी। मंगलवार को जब बिहार के इस 65 साल के व्यक्ति ने बंगाल के एक शहर में घोष को हराया तो उसे तृणमूल कांग्रेस की सबसे बड़ी जीत में से एक कहा जा सकता है। इस सीट पर गैर-बंगालियों की अच्छी खासी आबादी है।

आजाद के लिए बहुत परिचित क्षेत्र नहीं था
बंगाल की राजनीति को समझने वाले लोग यह तर्क दे सकते हैं कि भाजपा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष घोष को एक अपरिचित क्षेत्र से चुनाव लड़ने के लिए मजबूर होना पड़ा, लेकिन फिर यह आजाद के लिए भी बहुत परिचित क्षेत्र नहीं था। वह दिल्ली एवं जिला क्रिकेट संघ (डीडीसीए) के प्रशासन में कथित भ्रष्टाचार पर दिवंगत अरुण जेटली के साथ खुले विवाद के कारण कांग्रेस में चले गए थे। बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री स्वर्गीय भागवत झा आजाद के इस क्रिकेटर पुत्र ने दिल्ली के प्रसिद्ध स्कूल में शिक्षा प्राप्त की।

ऐसा रहा था आजाद का बचपन
प्रतिष्ठित सेंट स्टीफंस कॉलेज में वह खेल कोटे के छात्र थे। हिंदू कॉलेज और स्टीफंस के बीच फाइनल के दौरान उनके कॉलेज के मैदान पर छात्र अपने इंग्लिश विलो ग्रे निकोल्स के साथ गगनचुंबी छक्के लगाने वाले इस बल्लेबाज को देखने के लिए उमड़ पड़ते थे। लाइसेंस राज के उन दिनों में यह बल्ला किसी के पास होना बड़ी बात थी।

घरेलू क्रिकेट में आजाद का रहा था दबदबा
आजाद के कुछ आलोचक हमेशा निजी तौर पर आरोप लगाते थे कि उन्होंने भारत के लिए जो भी क्रिकेट खेला वह कपिल के साथ उनकी निकटता के कारण था। इसमें कोई संदेह नहीं है कि आजाद अपने समय के दिल्ली के सबसे ताकतवर कप्तानों में से एक थे जो कभी भी मुंबई की टीम के खिलाफ लड़ने से पीछे नहीं हटते थे। इसके अलावा वह घरेलू क्रिकेट में एक मजबूत खिलाड़ी थे और ऑफ स्पिन गेंदबाजों के खिलाफ दबदबा बनाते थे। कई लोगों का मानना है कि वह घरेलू क्रिकेट में पहले भारतीय बल्लेबाजों में से एक थे जो 80 के दशक के शुरुआती और मध्य वर्षों में ऑफ स्पिनरों द्वारा फेंकी जाने वाली ‘दूसरा’ गेंद को समझ सकते थे जबकि काफी गेंदबाजों को भी नहीं पता था कि यह क्या है।
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तृणमूल कांग्रेस में शामिल हुए कीर्ति
कीर्ति आजाद ने 2014 के आम चुनाव में भाजपा से चुनाव लड़ा था और बिहार के दरभंगा सीट से सांसद चुने गए थे। 23 दिसंबर 2015 को उन्हें पार्टी ने निलंबित किया था। फरवरी 2019 में कीर्ति आजाद कांग्रेस पार्टी में शामिल हो गए थे। वह कांग्रेस ने 2019 के आम चुनाव में धनबाद लोक सभा सीट से चुनाव लड़े थे, लेकिन उन्हें भाजपा के पशुपति नाथ सिंह ने 4.8 लाख के वोटों के अंतर से हराया था। नवंबर, 2021 में कीर्ति आजाद तृणमूल कांग्रेस में शामिल हो गए थे और कहा था कि राजनीति से संन्यास तक वह इसी पार्टी के लिए काम करते रहेंगे।
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