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इशांत शर्मा: एसी मैकेनिक का पतला-दुबला सा बेटा कैसे बना टीम इंडिया का स्टार?

Mon, 02 Sep 2019 05:17 PM IST
अंशुल तलमले स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला
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इशांत शर्मा - फोटो : सोशल मीडिया
महज 18 साल की उम्र में डेब्यू कर रातों-रात दौलत-शोहरत और प्रसिद्धी पाने वाले इशांत शर्मा की कहानी किसी भी साधारण परिवार के युवक के लिए प्रेरणा हो सकती है। 2 सितंबर 1988 को जन्में इशांत आज अपना 31वां जन्मदिन मना रहे हैं। पतले-दुबले और 6 फुट पांच इंच लंबे दिल्ली के इस खिलाड़ी को टीम इंडिया में पहला मौका 2007 में मिला। 
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ब्रेकफास्ट विद चैंपियंस इशांत शर्मा - फोटो : सोशल मीडिया
आज वह टीम इंडिया के प्रमुख गेंदबाजों में से एक हैं। उनकी जिंदगी और करियर दोनों ही काफी उतार चढाव भरा रहा है। हाल ही में मशहूर शो 'ब्रेकफस्ट विद चैंपियंस' में गौरव कपूर से अपनी जिंदगी और शुरुआती दिनों के कई मजेदार किस्से इशांत ने शेयर किए थे, आइए आपको भी दिखाते और पढ़वाते हैं।
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इशांत शर्मा के पिता - फोटो : एएनआई
इशांत ने बताया कि कैसे वो और विराट कोहली जूनियर क्रिकेट साथ खेलते थे और उन्हें उस दौरान 150 रुपए प्रतिदिन के हिसाब से डीए (डेल्ही अलाउंस) मिलता था। साथ ही इशांत ने इस इंटरव्यू में बताया कि उनके पिता विजय शर्मा एयर कंडीशनर ठीक करने का काम करते थे और सिर पर रखकर 5 मंजिल तक 1.5-2 टन का एसी ले जाते थे। काम सिर्फ गर्मियों के मौसम का ही होता था। यानी इन्हीं चार-पांच माह की कमाई में ही साल भर की कमाई और घर का खर्च निकालना होता था, जो वाकई मुश्किल था।

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इशांत शर्मा के माता-पिता - फोटो : सोशल मीडिया
इशांत ने आगे बताया कि, 'नया-नया टीम में आया था। पैसा मिलना शुरू हुआ तो एक दिन मॉल चला गया। वहां मैंने 42 हजार के स्पीकर्स ले लिए। 30 हजार खुद दे आया और बाकी डिलिवरी के टाइम पापा को देने थे। मगर जब पापा को पता चला कि मैंने 42 हजार के स्पीकर्स ले लिए तो वो मम्मी से बोले- मैं सोच रहा था कि एक स्कूटर ले लूंगा, इसने तो 42 हजार स्पीकर्स में ही खर्च कर दिए।'
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इशांत शर्मा और गौरव कपूर - फोटो : सोशल मीडिया
साथ ही इशांत ये भी कहते हैं कि जब मैं बाहर गया था और पापा को कॉल किया कि आपके लिए क्या लाऊं, तो वो बोले थे- एक रेनकोट ले आना। मैं हंस हंस के पागल हो गया कि रेनकोट कौन मंगवाता है। अपने करियर की शुरुआत के बारे में इशांत ने बताया है कि वो 18 साल के थे और उन्हें क्रिकेट का इतना एक्सपोजर नहीं था। पहली मैच खेलने पहुंचे तो किटबैग खो गया। उस वक्त जहीर खान टीम में थे और उनके जूते पहन कर पहला मैच खेला।
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इशांत शर्मा - फोटो : सोशल मीडिया
ऑस्ट्रेलिया में 2008 में पहली बार मैच ऑफ द सीरीज अवॉर्ड दिया गया तो इशांत दुखी हो गए कि यार मैन ऑफ द मैच नहीं मिला, ये पता नहीं कौन सा अवॉर्ड है, 'मुझे पता ही नहीं था कि मैन ऑफ द सीरीज भी कोई अवॉर्ड होता है, हमने तो मैन ऑफ द मैच ही सुना था।'
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इशांत शर्मा - फोटो : social media
इस बीच इशांत ने आखिर में एक बड़ी जरूरी भी बताई। बकौल इशांत, 'हमारे देश में लाखों लोग क्रिकेट खेलते हैं, उनमें से सिर्फ 15 ही चयनित होते हैं, इसलिए क्रिकेट के साथ पढ़ाई करनी भी जरूरी है क्योंकि जरूरी नहीं कि हर कोई ऊपर तक पहुंचे। मैंने ऐसे कितने ही लोग देखे हैं जिन्होंने अच्छा क्रिकेट खेला, लेकिन बाद में जब कहीं मौका नहीं मिला तो 200 रुपए प्रति घंटे के हिसाब से क्रिकेट की ट्यूशन भी दी है। लक भी होता है, जिनके साथ लक साथ नहीं होता, उनके लिए पढ़ाई बड़ी काम आती है। तमाम रणजी प्लेयर्स बहुत स्ट्रगल करते हैं।'
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