सूत्रों की माने तो टाटा पूरी गंभीरता से इस बार आईपीएल का प्रायोजक बनना चाह रहा था। बोर्ड ने पहले ही यह स्पष्ट कर दिया था कि केवल वही कंपनियां आगे आए, जिनका सालाना टर्नओवर 300 करोड़ रुपये से ज्यादा हो। हालांकि बायजूस और अनअकैडमी जैसे स्टार्टअप भी इन शर्तों को पूरा करते थे, लेकिन टाटा संस पूरी तरह एक भारतीय ब्रांड है इसलिए उसे दौड़ का प्रबल दावेदार माना जा रहा था।
पतंजलि पहले ही हो गया था दौड़ से बाहर
सोशल मीडिया पर योगगुरु बाबा रामदेव की कंपनी पतंजलि को भी बड़ा दावेदार माना जा रहा था। खुद कंपनी के ओर से स्पॉन्सरशिप लेने की इच्छा जताई गई थी, लेकिन बीते दिनों बाबा रामदेव ने यह कहते हुए पूरी बात का खंडन कर दिया था कि पतंजलि तभी स्पॉन्सरशिप के लिए आगे आएगी, जब कोई दूसरी भारतीय कंपनी इस अधिकार को नहीं पाना चाहती। इनके अलावा समय-समय पर अमेजॉन, रिलायंस जियो और कोका-कोला इंडिया जैसी दिग्गज कंपनियों की दावेदारी की बातें भी सामने आती रहती थी।
भारत में कोरोना वायरस महामारी के बढते मामलों के कारण यूएई में टूर्नामेंट कराया जा रहा है। सरकार ने पिछले सप्ताह बीसीसीआई को सैद्धांतिक मंजूरी दे दी थी। अधिकांश टीमें 20 अगस्त के बाद रवाना होंगी, उन्हें रवानगी से पहले 24 घंटे के भीतर दो आरटी पीसीआर टेस्ट कराने होंगे। टूर्नामेंट पूरी तरह से बायो-सिक्योर माहौल में होगा। सारे मैच शारजाह, अबूधाबी और दुबई में ही होंगे। हालांकि अभी शेड्यूल नहीं आया है लेकिन, इस बार टूर्नामेंट 53 दिन तक चलेगा। 10 डबल हेडर (एक दिन में दो मैच) होंगे। पहली बार शाम आठ बजे की बजाय मैच 7:30 बजे से खेले जाएंगे।