अफगानिस्तान की महिला क्रिकेट टीम इस साल के आईसीसी महिला विश्व कप का हिस्सा नहीं है, लेकिन तालिबान के नियंत्रण के बाद अपने देश से निर्वासित 16 महिला क्रिकेटर इस प्रतिष्ठित टूर्नामेंट को देखने के लिए भारत पहुंची हैं। ये खिलाड़ी वर्तमान में ऑस्ट्रेलिया में शरणार्थी जीवन जी रही हैं। उन्हें विश्व कप के मैचों को देखने का निमंत्रण दिया गया ताकि उनकी क्रिकेटिंग और व्यक्तिगत विकास यात्रा को आगे बढ़ाया जा सके।
तालिबान के शासन के बाद की चुनौतियां
वर्ष 2021 में तालिबान के सत्ता में आने के बाद अफगानिस्तान की महिलाओं पर खेलों में भाग लेने पर प्रतिबंध लगा दिया गया था। इसी कारण ये खिलाड़ी अपने देश को छोड़कर ऑस्ट्रेलिया गईं। जनवरी 2025 में इन निर्वासित क्रिकेटरों ने ‘क्रिकेट विदआउट बॉर्डर्स एकादश’ के माध्यम से मेलबर्न में अपना पहला मैच खेला, जो 2021 के बाद उनका पहला अंतरराष्ट्रीय स्तर का खेल था।
सुरक्षा और स्वागत
हवाई अड्डे पर इन खिलाड़ियों को कड़ी सुरक्षा के बीच शहर के होटल तक पहुंचाया गया। उनका यह दौरा भारत में महिला क्रिकेट को देखने और सीखने का अवसर प्रदान करेगा। कार्यक्रम में उनकी गतिविधियों और मैच देखने के अनुभव का उद्देश्य यह है कि ये खिलाड़ी भविष्य में अफगानिस्तान और अन्य देशों की नई पीढ़ी को प्रेरित कर सकें।
बीसीसीआई और अंतरराष्ट्रीय समर्थन
अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद (ICC) ने मई 2025 में अफगानिस्तान की महिला क्रिकेटरों के समर्थन में पहल की। इसके तहत भारतीय क्रिकेट बोर्ड (BCCI), इंग्लैंड और वेल्स क्रिकेट बोर्ड (ECB) और क्रिकेट ऑस्ट्रेलिया के सहयोग से एक समर्पित कार्यबल बनाया गया, जो इन खिलाड़ियों की सुरक्षा, प्रशिक्षण और विकास की निगरानी करेगा।
विश्व कप में अवसर
अफगानिस्तान की ये क्रिकेटर केवल मैच देखने तक ही सीमित नहीं रहेंगी। उन्हें उम्मीद है कि विश्व कप के दौरान वे भारत की घरेलू टीमों के खिलाफ खेलकर अपनी क्षमताओं को निखार सकेंगी। यह पहल महिलाओं के खेलों में भागीदारी बढ़ाने और उनके करियर को सुरक्षित रखने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।