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IND vs PAK: 'पाकिस्तानी स्लेज कर रहे थे, मैंने बल्ले से दिया जवाब', तिलक ने सुनाई PAK को चुप कराने की कहानी

Tue, 30 Sep 2025 12:32 PM IST
स्वप्निल शशांक स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, दुबई

सार

बीसीसीआई टीवी पर साथी खिलाड़ी शिवम दुबे से बातचीत में कहा, 'पाकिस्तानी खिलाड़ी काफी कुछ कह रहे थे, लेकिन मैं सिर्फ बल्ले से जवाब देना चाहता था।'
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तिलक वर्मा - फोटो : ANI
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विस्तार
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एशिया कप 2025 के फाइनल मुकाबले में जब भारतीय टीम शुरुआती झटकों से जूझ रही थी, तभी युवा बल्लेबाज तिलक वर्मा क्रीज पर आए। माहौल बेहद तनावपूर्ण था, विकेट तेजी से गिर रहे थे और पाकिस्तान के खिलाड़ी लगातार टिप्पणियों के जरिए दबाव बनाने की कोशिश कर रहे थे, लेकिन तिलक ने संयम दिखाया और मैदान पर बल्ले से जवाब देने का फैसला किया।
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उन्होंने भारत लौटने के बाद मीडिया से बातचीत में कहा, 'पाकिस्तानी खिलाड़ी काफी कुछ कह रहे थे, लेकिन मैं सिर्फ बल्ले से जवाब देना चाहता था। मैच के बाद मैदान पर पाकिस्तानी अब नजर भी नहीं आ रहे हैं।' यही बात उन्होंने टीम इंडिया की जीत के बाद बीसीसीआई टीवी पर साथी खिलाड़ी शिवम दुबे से बातचीत में भी कही थी। तिलक ने कहा कि जिस तरह से मैंने उन्हें बल्ले से जवाब दिया, उसे सबने देखा ही। 

तिलक-दुबे की साझेदारी बनी जीत की कुंजी
भारतीय टीम की जीत में तिलक और दुबे की साझेदारी निर्णायक साबित हुई। दोनों ने मिलकर पांचवें विकेट के लिए 60 रनों की अहम साझेदारी की, जिसने भारत को मैच की ओर मोड़ा। तिलक वर्मा ने शानदार बल्लेबाजी करते हुए 53 गेंदों पर नाबाद 69 रन बनाए और भारत को फाइनल में दो गेंद शेष रहते जीत दिलाई। दूसरी ओर, शिवम दुबे ने भी अपनी भूमिका निभाते हुए 33 रनों की आक्रामक पारी खेली। मजाकिया अंदाज में दुबे ने कहा, 'मुझे लगता है कि मेरे बल्ले ने भी जवाब दिया। उनके पास मुझे कहने के लिए ज्यादा कुछ नहीं बचा।'

दर्शकों के उत्साह से मिली ऊर्जा
तिलक ने बताया कि स्टेडियम में मौजूद भारतीय दर्शकों ने उन्हें अतिरिक्त ऊर्जा दी। उन्होंने कहा, 'जब स्टेडियम में 'वंदे मातरम' के नारे गूंजे तो मेरे रोंगटे खड़े हो गए। उस पल मैं सिर्फ भारत माता की जय कहना चाहता था।' दर्शकों के इस जबरदस्त समर्थन ने तिलक को कठिन परिस्थितियों में भी धैर्य बनाए रखने और टीम को जीत तक ले जाने की प्रेरणा दी।

गेंदबाज के रूप में भी चमके शिवम दुबे
मैच में शिवम दुबे सिर्फ बल्लेबाजी ही नहीं, बल्कि गेंदबाजी में भी चमके। अनुभवी हार्दिक पांड्या की गैरहाजिरी में दुबे ने भारतीय पारी का पहला ओवर फेंका। शुरुआत में उन पर सवाल उठे थे, लेकिन इस टूर्नामेंट में उन्होंने बेहतरीन गेंदबाजी कर आलोचकों को करारा जवाब दिया। दुबे ने कहा, 'मेरी गेंदबाजी के पीछे काफी मेहनत और टीम प्रबंधन का भरोसा है। साथ ही, भारतीय समर्थकों की दुआओं का भी असर है। इतना बड़ा मैच खेलने और योगदान देने का अनुभव बहुत मजेदार रहा।'
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भारत की जीत में नई पीढ़ी का दम
एशिया कप फाइनल ने साबित कर दिया कि भारतीय टीम में नई पीढ़ी के खिलाड़ी बड़े मंच पर भी शानदार प्रदर्शन करने का दम रखते हैं। तिलक वर्मा और शिवम दुबे की जोड़ी ने न सिर्फ टीम को जीत दिलाई, बल्कि यह भी दिखाया कि मानसिक मजबूती और टीम स्पिरिट से हर मुश्किल हालात को पार किया जा सकता है।
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