क्रिकेट में फेक फील्डिंग (नकली फील्डिंग) बहुत ही कम देखने को मिलती है, लेकिन जब ऐसा देखने को मिलता है तो बल्लेबाज के मन में आउट होने से लेकर कई तरह के सवाल उठते हैं। टीम इंडिया और श्रीलंका के बीच शनिवार को कोलकाता टेस्ट में भी एक ऐसा ही दृश्य देखने को मिला जब 53वें ओवर की चौथी गेंद पर भुवनेश्वर कुमार ने कवर्स की दिशा में शॉट खेला।
भुवनेश्वर कुमार के साथ उस समय मोहम्मद शमी क्रीज पर मौजूद थे। भुवी ने शॉट खेला और दूसरा रन लेने का कॉल किया। गेंद के पीछे दौड़ रहे श्रीलंकाई कप्तान दिनेश चंडीमल ने स्लाइड लगाई और थ्रो करने का इशारा किया जबकि वो गेंद के बिलकुल करीब नहीं थे तथा दूसरे फील्डर ने गेंद पकड़कर थ्रो किया।
अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट परिषद (आईसीसी) ने 1 अक्टूबर से नए नियम लागू किए हैं और इसके मुताबिक यह फेक फील्डिंग है। हालांकि, मैदानी अंपायर नाइजेल लांग और जोएल विलसन ने टीम इंडिया को पेनल्टी के 5 रन नहीं दिए जबकि टीम इंडिया के कप्तान विराट कोहली ने इसका इशारा भी किया। भारतीय कप्तान पेनल्टी के रन नहीं मिलने से काफी निराश भी नजर आए।
आईसीसी ने हाल ही में नए नियम लागू किए हैं, जिसके अंतर्गत फील्डर अगर नकली फील्डिंग करता है तो उसकी टीम पर पेनल्टी लगेगी और बल्लेबाजी कर रही टीम को 5 रन मिलेंगे। हाल ही में ऑस्ट्रेलिया में संपन्न जेएलटी कप में फेक फील्डिंग का वाकया सामने आया था। क्वींसलैंड बुल्स के मार्नुस लाबुसचाग्ने ने फेक फील्डिंग की, जिसकी वजह से विरोधी टीम को पेनल्टी के रूप में 5 रन मिले।
बहरहाल, कोलकाता टेस्ट के तीसरे दिन टीम इंडिया की पहली पारी लंच से पहले 172 रन पर ऑलआउट हुई। मोहम्मद शमी (24) और उमेश यादव (6*) ने अंतिम विकेट के लिए 26 रन की साझेदारी करके टीम को सम्मानजनक स्कोर तक पहुंचाया। श्रीलंका की तरफ से सुरंगा लकमल ने चार विकेट झटके।