"भारत के सबसे सफल कप्तान बन चुके महेंद्र सिंह धोनी को भारतीय क्रिकेट के दो दिग्गजों सचिन तेंदुलकर और राहुल द्रविड़ का शुक्रगुजार होना चाहिए, जिन्होंने 2008 में टेस्ट कप्तानी के लिए धोनी का नाम सुझाया था।"
पूर्व दिग्गज बल्लेबाज और चयनकर्ता प्रमुख दिलीप वेंगसरकर ने बुधवार को सचिन पर लिखी किताब ‘सचिन क्रिकेटर ऑफ द सेंचुरी’ का विमोचन करते हुए यह खुलासा किया।
साथ ही उन्होंने यह भी कहा, "मैंने कभी कल्पना भी नहीं की थी कि सचिन भारत के लिए 40 वर्ष की उम्र तक खेलते रहेंगे। वह अब भी खेलना जारी रख सकते हैं लेकिन एक बार जब वह संन्यास लेंगे तो क्रिकेट को उनकी कमी महसूस होगी।"
वेंगसरकर ने कहा, "सचिन और द्रविड़ ने ही यह सुझाव दिया था कि अनिल कुंबले के संन्यास के बाद धोनी को टेस्ट कप्तानी सौंपी जानी चाहिए।"
धोनी नवंबर 2008 में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ सीरीज में भारत के पूर्णकालिक कप्तान बने थे। सितंबर 2007 में धोनी दक्षिण अफ्रीका में ट्वंटी-20 वर्ल्ड कप में भारत के कप्तान बने थे और उन्होंने भारत को यह खिताब दिलाया था।
अगले वर्ष आस्ट्रेलिया के खिलाफ घरेलू सीरीज में अनिल कुंबले के दिल्ली टेस्ट में संन्यास लेने की घोषणा के बाद धोनी को टेस्ट कप्तान बनाया गया था।
कार्यक्रम में वेंगसकर के अलावा 1983 की वर्ल्ड कप विजेता टीम के सदस्य बलविंदर सिंह संधू और कोच लालचंद राजपूत ने भी सचिन के उल्लेखनीय योगदान को याद किया। संधू ने कहा, ‘सचिन भी बेहतर कप्तान हो सकते थे यदि उन्हें अच्छा सपोर्ट स्टाफ मिलता।’