सुप्रीम कोर्ट ने डेक्कन चार्जर्स को इंडियन प्रीमियर लीग (आईपीएल) से बाहर करने के भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड के फैसले पर रोक लगाने से शुक्रवार को इनकार कर दिया। बांबे हाईकोर्ट ने लीग में डेक्कन चार्जर्स की सदस्यता रद्द करने पर मध्यस्थ की ओर से यथास्थिति बरकरार रखने का आदेश अस्वीकार कर दिया था।
चीफ जस्टिस अल्तमस कबीर, जस्टिस सुरेन्द्र सिंह निज्जर और जस्टीस चेल्मेश्वर की पीठ ने डेक्कन क्रानिकल्स होल्डिंग्स लिमिटेड (डीसीएचएल) को सौ करोड़ रुपये की बैंक गारंटी देने के लिए 25 अक्तूबर तक का समय दिए जाने की मांग को ठुकरा दिया। चार्जर्स ने अनुरोध किया था कि उसे 25 अक्तूबर तक की मोहलत दी जाए। डेक्कन और बीसीसीआई के बीच हुआ करार 12 अक्तूबर से रद्द मानने की बोर्ड की दलील भी मंजूर कर ली।
पीठ ने कहा कि मौजूदा स्थिति यह है कि डेक्कन चार्जर्स और बीसीसीआई के बीच करार रद्द हो गया है। ऐसे में शीर्षस्थ अदालत विशेष अनुमति याचिका पर विचार नहीं कर सकता। हालांकि पीठ ने कहा कि इस आदेश से डेक्कन और बोर्ड के बीच चल रही मध्यस्थता की कार्यवाही प्रभावित नहीं होगी।
खिलाड़ियों को मिलेगा बकायाः बोर्ड
बीसीसीआई ने शुक्रवार को साफ कर दिया कि डेक्कन चार्जर्स के खिलाड़ियों के बकाये का भुगतान कर दिया जाएगा। सुप्रीम कोर्ट द्वारा अपील खारिज होने के बाद डेक्कन अब आईपीएल से बाहर हो गया। लिहाजा खिलाड़ी अपने भुगतान को लेकर चिंतित थे। बोर्ड सचिव संजय जगदाले ने कहा कि पिछले सीजन आईपीएल 2012 में डेक्कन की ओर से शिरकत करने वाले सभी खिलाड़ियों के बकाये का भुगतान कर दिया जाएगा। सुप्रीम कोर्ट ने डेक्कन की अपील खारिज कर दी है।