2007 वर्ल्ड टी-20 का फाइनल। आमने-सामने चिर प्रतिद्वंद्वी भारत और पाकिस्तान। आखिरी ओवर में पाकिस्तान को जीत के लिए 13 रन की दरकार थी। ऐसी विषम परिस्थितियों में युवा कप्तान धोनी ने गेंद एक ऐसे मीडियम पेसर को थमाई, जिन्होंने न तो इतने बड़े मंच पर कभी गेंदबाजी की थी और न ही ऐसे दबाव को झेला था। शुरुआती दो गेंदों में सात रन देने के बाद अब आखिरी चार बॉल्स पर छह रन बनाने आसान थे, स्ट्राइक पर खुद पाकिस्तानी कप्तान मिसबाह-उल-हक थे।