सीओए का मानना है कि बीसीसीआई के नए संविधान में एसीयू या उसके रिपोर्ट करने के ढांचे पर कोई विशेष प्रावधान नहीं है। यह तय करने के लिए कि एसीयू के सदस्य स्वतंत्र होकर काम करने में सक्षम है, सीओए का मानना है कि एसीयू के हेड को लोकपाल को रिपोर्ट करना चाहिए।
इसके मुताबिक एसीयू जो जांच करेगा वह बीसीसीआई के बजाय लोकपाल को अपनी रिपोर्ट जमा करे ताकि स्वतंत्र एक्शन लिया जा सके। एसीयू को कार्य में स्वतंत्रता देने से लोकपाल के पास भी बीसीसीआई संविधान के तहत प्रभावशाली जांच कर सकेगा।
श्रीनिवासन जब बीसीसीआई अध्यक्ष थे तब पूर्व शीर्ष पुलिस रवि सावनी उनको रिपोर्ट देते थे। सावनी को मय्यपन, कुंद्रा, श्रीसंथ, अंकित चव्हाण, अजित चंदीला, सिद्धार्थ त्रिवेदी और हरमीत सिंह पर फिक्सिंग के आरोपों की जांच का जिम्मा सौंपा गया था। बोर्ड ने क्रिकेटर्स को सजा दी, लेकिन आईपीएल के मालिक को क्लीन चिट दी। उन्होंने इसका कारण दिया कि मुंबई पुलिस से किसी प्रकार का सबूत नहीं मिला।
सीओए चाहता है कि क्रिकेट में भ्रष्टाचार गतिविधियों का अपराधिकरण हो जैसे बीसीसीआई के खिलाड़ियों पर अधिकार क्षेत्र है, अधिकारियों से मेल खाता है लेकिन भ्रष्ट गतिविधियों में शामिल व्यक्तियों के खिलाफ कार्य करना शक्तिहीन है।