पेप्सी के आईपीएल की टाइटल स्पॉंसर से हाथ खींचने के बाद बीसीसीआई ने टूर्नामेंट के लिए एक नया टाइटल स्पॉंसर खोज लिया है। बीसीसीआई ने स्मार्टफोन बनाने वाली चीनी कंपनी विवो मोबाइल्स को अगले 2 साल के लिए टाइटल स्पॉंसर करने का अधिकार दे दिया है। मोबाइल बनाने वाली कंपनी विवो को अगले 10 दिनों के अंदर बैंक गारंटी देनी होगी।
चीनी कंपनी अमेरिका की प्रतिष्ठित मल्टी नेशनल कंपनी पेप्सी की जगह लेगी। बीसीसीआई से जुड़े सूत्रों ने बताया कि विवो के साथ शुरुआती करार 2 साल के लिए है। इस कंपनी के साथ 2 साल के उसी शर्त और नियम पर करार किया गया है जो इससे पहले अमेरिकी कोला कंपनी के साथ किया गया था।
पेप्सीको ने 2013 में 396.80 करोड़ रुपए की बोली लगाकर 5 साल के लिए आईपीएल की टाइटल स्पॉंसरशिप हासिल किया था। पेप्सी से पहले रियल इस्टेट की दिग्गज कंपनी डीएलएफ ने शुरुआती 5 साल के लिए टाइटल स्पॉंसरशिप का अधिकार रखा था। डीएलएफ आईपीएल के पहले सत्र 2008 से लेकर 2012 तक टाइटल स्पॉंसर बना रहा। इसके लिए उसने बीसीसीआई को 200 करोड़ रुपए दिए।
IPL में विवादों को देख पिछले साल ही हटना चाहती थी पेप्सी
इससे पहले इस महीने की शुरुआत में पेप्सीको ने आईपीएल के चीफ ऑपरेटिंग ऑफिसर (सीओओ) सुंदर रामन को आईपीएल से हटने के अपने फैसले के बारे में बता दिया था, इसके बाद रामन ने बीसीसीआई के नवनियुक्त बॉस शशांक मनोहर को इस नए घटनाक्रम के बारे में जानकारी दी थी।
हालांकि आईपीएल के चेयरमैन राजीव शुक्ला ने बाद में कहा था कि पेप्सी के हटने से टूर्नामेंट पर कोई फर्क नहीं पड़ेगा। हमने पहले से ही इस संबंध में दूसरे स्पॉंसरों से बातचीत चल रही है।
पेप्सी पिछले सत्र में ही आईपीएल में स्पॉट फिक्सिंग की घटना के बाद से हटना चाहती थी लेकिन बीसीसीआई उसे एक और साल तक रोके रखने में कामयाब हो गई थी। हालांकि कंपनी तब भी आईपीएल के साथ लंबे समय तक जुड़ने के प्रति इच्छुक नहीं थी खासतौर से लोढ़ा समिति के चेन्नई सुपर किंग्स और राजस्थान रॉयल्स के निलंबन के सुझाव देने के बाद से।
पेप्सीको ने जब से आईपीएल का टाइटिल स्पॉंसर हासिल किया तब से टूर्नामेंट में काफी कुछ अच्छा नहीं रहा। 2013 में स्पॉट फिक्सिंग के कारण बीसीसीआई ने राजस्थान रॉयल्स के अंकित चव्हाण, अजीत चंडीला और एस श्रीसंत को प्रतिबंधित कर दिया। सुप्रीम कोर्ट ने मामले की जांच के लिए पूर्व जसि्टस आरएम लोढ़ा समिति का गठन किया।
फिर इसके बाद लोढ़ा समिति ने चेन्नई सुपर किंग्स के टीम प्रिंसिपल गुरुनाथ मयप्पन और राजस्थान के सहमालिक राज कुंद्रा पर सट्टेबाजी में शामिल होने की बात कही। फिर देश की शीर्ष अदालत ने इन पर टूर्नामेंट से आजीवन प्रतिबंधित कर दिया। साथ ही राजस्थान और चेन्नई सुपर किंग्स पर आईपीएल से 2 साल के लिए प्रतिबंधित कर दिया था।
CSK और RR की जगह लेंगी 2 नई टीमें
मुबंई में रविवार को हुई बीसीसीआई की वर्किंग कमिटी की बैठक में कई फैसले लिए गए। पहला फैसला इस पर किया गया कि बोर्ड की सलाना आम बैठक अगले महीने की 9 तारीख को मुंबई के मुख्यालय में होगी। सूत्र बताते हैं कि इस बैठक में सीएसके और राजस्थान रॉयल्स के भविष्य पर फैसला हो सकता है। बोर्ड का एक बड़ा धड़ा इन दोनों को आईपीएल से बाहर करने के पक्ष में है।
इसके अलावा इस बार बैठक में जस्टिस लोढा समिति की आंतरिक रिपोर्ट को पूरी तरह से अमल में लाया जाएगा। घोटालों में फंसी चेन्नई सुपर किंग्स (सीएसके) और राजस्थान रॉयल्स (आरआर) का आईपीएल से 2 साल का निलंबन जारी रहेगा। बोर्ड इन 2 निलंबित टीम की जगह पर 2 नई टीमों के लिए टेंडर जारी करेगी और टीम के लिए बोली भी लगेगी। यह बोली सिर्फ 2 साल (2016 और 2017) के लिए होगी। इन दोनों टीमों की आईपीएल में वापसी 2018 में होगी। इस फैसले के साथ ही बोर्ड ने यह भी संकेत दिए हैं कि वह आईपीएल फार्मेट आठ टीमों का रखने के ही हक में हैं। नई टीमों को शामिल किए जाने की प्रक्रिया जल्द शुरू हो जाएगी।
मनोहर ने अध्यक्ष बनते ही साफ कर दिया था कि राज्य एसोसिएशनों को बोर्ड की ओर से दिए जाने वाले पैसे का हिसाब लिया जाएगा। इसके लिए बोर्ड ने प्राइस वाटरहाउस कूपर नाम की कंपनी को अनुबंधित करने का फैसला लिया है। यह कंपनी ऑडिट के जरिए एसोसिएशनों को दी पाई-पाई का हिसाब रखेगी। यहीं नहीं मनोहर ने श्रीनिवासन साम्राज्य का अंत करते हुए चेन्नई में स्थापित बोर्ड के खजांची ऑफिस को मुंबई शिफ्ट करने का फैसला लिया। साथ ही खर्च का हिसाब रखने वाली चेन्नई की फर्म के स्थान पर मुंबई की फर्म को अनुबंधित करने का निर्णय लिया है।
नए अध्यक्ष शशांक मनोहर की अगुवाई में हुई पहली वर्किंग कमेटी की बैठक में फैसला लिया गया है कि खिलाड़ियों और अंपायरों को बोर्ड की ओर से दी जाने वाली आर्थिक सहायता का सारा ब्योरा बोर्ड की वेबसाइट पर सार्वजनिक किया जाएगा। उन खिलाड़ियों का भी ब्योरा दिया जाएगा जिन पूर्व खिलाड़ियों को वन टाइम योजना के तहत आर्थिक मदद की जा रही है। सेवानिवृत अंपायरों और खिलाड़ियों को दी गई मेडिकल सहायता का ब्योरा भी सार्वजनिक होगा। साथ ही 25 लाख से ऊपर किए गए सभी खर्चों को बोर्ड वेबसाइट पर ब्योरा डालकर सार्वजनिक करेगा।