क्रिकेट में फिक्सिंग को लेकर आए दिन हो रहे नए-नए खुलासों से मैं काफी आहत हूं। इस जेंटलमैन गेम को लगता है किसी की नजर लग गई है।
खिलाड़ी तो खिलाड़ी खुद फ्रेंचाइजी मालिकों के नाम भी सामने आने से बड़ा झटका लगा है।
अब समय आ गया है कि क्रिकेट को पाकसाफ किया जाए। सरकार के साथ-साथ बीसीसीआई को भी कड़े कदम उठाने होंगे। अगर जरूरत पड़े को सट्टेबाजी को कानूनी मान्यता देने से भी नहीं चूकना चाहिए।
हां, मैं इतना जरूर कहना चाहूंगा यदि किसी क्रिकेटर पर फिक्सिंग को लेकर कोई कार्रवाई होती है तो बोर्ड को फ्रेंचाइजियों के खिलाफ भी उसी तरह का रुख अपनाना चाहिए।
अगर फ्रेंजाइजी मालिकों के खिलाफ सट्टेबाजी में शामिल होने के पुख्ता सबूत मिलते हैं तो क्रिकेट बोर्ड को उन्हें तुरंत सस्पेंड कर देना चाहिए।
फ्रेंजाइजी मालिक बड़े-बड़े लोग हैं। हो सकता है सट्टेबाजी (शर्त लगाना) इन बड़े लोगों का शौक हो लेकिन इससे क्रिकेट की छवि खराब हो रही है। फिल्मों के बाद क्रिकेट ही लोगों के मनोरंजन का सबसे प्रमुख साधन है।
हजारों रुपये खर्च कर लोग स्टेडियम में मैच देखने जाते हैं। इन लोगों का क्या कसूर है? क्यों नहीं इन्हें फेयर गेम देखने को मिलता। फिक्सिंग के मामले सामने आने से ये लोग खुद को ठगा महसूस करते हैं।
हो सकता है कुछ फ्रेंचाइजियों को उतना पैसा रिटर्न ही न मिल रहा हो जितना कि उन्होंने फ्रेंचाइजी खरीदने और खिलाड़ियों को टीम में लेने पर खर्च कर दिया।
हो सकता है इसकी भरपाई के लिए ये लोग फिक्सिंग और सट्टेबाजी का रास्ता अपना रहे हों।
वैसे यह जांच का विषय है। जांच इस बात की भी होनी चाहिए कि यह पैसा कहां से आ रहा है और कहां जा रहा है और कौन-कौन लोग इससे जुड़े हुए हैं।
किस-किस देश से इसके तार जुड़े हुए हैं। क्या वाकई अंडरवर्ल्ड का पैसा इसमें लगा हुआ है?
वैसे चेन्नई सुपरकिंग्स के मालिक और भारतीय क्रिकेट बोर्ड के अध्यक्ष एन. श्रीनिवासन के दामाद मैयप्पन का नाम फिक्सिंग में सामने आने के बाद क्रिकेट बोर्ड की कमान जगमोहन डालमिया को सौंप दी गई है।
उन्होंने कुछ कदम भी उठाए हैं। राज कुंद्रा मामले की भी दिल्ली में 10 जून को होने वाली क्रिकेट बोर्ड की आपात बैठक में चर्चा होने की बात उन्होंने कही है।
साफ है क्रिकेट में घुस आई गंदगी को हर हाल में दूर करना होगा। इस खेल में घुस आए गलत लोगों को हटाना होगा। हमारे देश में क्रिकेट धर्म की तरह है और कोई भी क्रिकेट प्रेमी नहीं चाहेगा कि उसके धर्म पर किसी तरह की आंच आए।