फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

जगह-जगह बिक रहे हैं बेटियों के कत्ल के 'हथियार'

Fri, 07 Jun 2013 01:44 AM IST
नई दिल्ली/प्रियंवदा सहाय
विज्ञापन
विज्ञापन
आधुनिकता की होड़ में गर्भपात की दवाइयों के बढ़ते चलन से सरकार परेशान है।
विज्ञापन


किसी भी मेडिकल स्टोर में आसानी से मिलने वाली इन दवाइयों के बेतरतीब इस्तेमाल से रोजाना बड़ी संख्या में गर्भवती महिलाओं की जान जोखिम में पड़ रही है।

एक अनुमान के मुताबिक पिछले तीन साल में देश में ऐसी दवाइयों की बिक्री में करीब 300 फीसदी की वृद्धि हुई है।

इस बात से महिला एवं बाल विकास मंत्री कृष्णा तीरथ की चिंता बढ़ गई है। उन्होंने स्वास्थ्य मंत्री गुलाम नबी आजाद को पत्र लिखकर इस मामले में दखल देने की अपील करने का फैसला किया है।

महिला एवं बाल विकास मंत्रालय का कहना है कि शहर से गांव तक गर्भपात की दवाइयों की बिक्री तेजी से बढ़ रही है। महिलाएं इन दवाइयों का सेवन डॉक्टर की सलाह के बगैर कर रही हैं। इसका उनके स्वास्थ्य पर प्रतिकूल असर हो रहा है।
विज्ञापन


मंत्रालय का मानना है कि जानकारी के अभाव में ज्यादातर कम उम्र की लड़कियां और ग्रामीण महिलाएं इसका इस्तेमाल कर अपनी जान को जोखिम में डाल रही हैं। इसलिए ऐसी व्यवस्था होनी चाहिए जिससे डॉक्टर की सलाह पर ही इस तरह की दवाइयों दी जाएं।

सूत्रों के मुताबिक महिला एवं बाल विकास मंत्रालय को एनजीओ चेरिस फाउंडेशन की ओर से मिली एक रिपोर्ट में कहा गया है कि गर्भपात की दवाइयों का सही इस्तेमाल नहीं होने से रोजाना हजारों महिलाएं मौत के मुंह में पहुंच रही हैं।

अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान की स्त्री और प्रसूति रोग विशेषज्ञ डॉ. दीपिका डेका का कहना है कि बेशक गर्भपात की दवाइयों उन महिलाओं के इस्तेमाल के लिए हैं, जो बच्चे को जन्म नहीं देना चाहती हैं, लेकिन इसके सही समय पर सुरक्षित इस्तेमाल की जानकारी होना जरूरी है। बेहतर होगा कि डॉक्टर की सलाह पर ही इसका सेवन किया जाय।

उन्होंने कहा कि कई मामलों में महिलाएं डॉक्टर के पास आने से कतराती हैं। इसलिए यह जरूरी है कि दवा विक्रेता दवाइयों के इस्तेमाल के लिए पूरी जानकारी खरीदार को दें। इसके लिए विक्रेता का प्रशिक्षित होना भी जरूरी है।

दक्षिण दिल्ली स्थित सनराइज अस्पताल की डॉक्टर निकिता त्रेहान का कहना है कि हाल के  दिनों में इन दवाइयों का दुरुपयोग बढ़ा है।

पिछले तीन साल में गर्भपात कराने वाली महिलाओं की तादाद 20 फीसदी तक बढ़ी है। इनमें कम उम्र की लड़कियों की संख्या ज्यादा है। ऐसे में महिलाओं को इन दवाइयों के इस्तेमाल और इससे भविष्य में होने वाली समस्याओं के बारे में ठीक से जानना जरूरी है।
विज्ञापन


त्रेहान का कहना है कि गर्भपात की दवाइयां लाइसेंसिंग के आधार पर बाजारों में मिलनी चाहिए। ताकि गर्भवती महिलाओं के जान को जोखिम में पड़ने से बचाया जा सके।

--300 फीसदी तक बढ़ी बिक्री पिछले तीन साल में।
--20 फीसदी तक इजाफा गर्भपात कराने वाली महिलाओं की तादाद में।
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें