पूरा साल 2020 ही अजीब रहा। दुनिया उन चीजों का सामना कर रही है जो अकल्पनीय थे। दुनिया ने वह दुखदायी तस्वीर देखी, जब 2019 विश्व कप के सेमीफाइनल में रनआउट होकर निराश-हताश धोनी पवेलियन की ओर लौट रहे थे। माही के करीबियों का कहना था कि वह विश्व कप की ट्रॉफी उठाकर अपने क्रिकेट करियर का अंत करेेंगे।
बात नहीं बनी तो इस साल होने वाले वर्ल्ड टी-20 का इंतजार किया जाने लगा, लेकिन कोरोना महामारी की वजह से टूर्नामेंट ही टल गया। समय के साथ प्रशंसकों की बेताबी भी बढ़ने लगी। आईपीएल का एलान हुआ तो सांस में सांस आई और उम्मीद बंधी कि उनका पसंदीदा कप्तान कम से कम उस टूर्नामेंट का फाइनल जीतकर उन्हें साल की पहली खुशी देगा, जहां उसका सिक्का चलता है।
मगर अचानक 15 अगस्त की शाम खुद को 'पल दो पल का शायर' बताकर क्रिकेट के इस अजातशत्रु ने बल्ला टांग दिया। अभी IPL का 13वां सीजन शुरुआत आने वाला था। हर कोई यही सोच रहा था कि पीली जर्सी में ट्रॉफी उठाकर धोनी नीली जर्सी की कसर पूरी करने वाले हैं। मगर न धोनी की चाल चली और न उनका बल्ला।
इतिहास गवाह है इस जादूगर ने जिसे भी छुआ हीरा बना दिया, लेकिन यूएई में इस बाजीगर का हर दांव उलटा ही साबित हुआ। टिकट कलेक्टर से भारतीय क्रिकेट टीम की कप्तानी तक का सफर तय करने वाले महेंद्र सिंह धोनी अपने फैसलों के लिए जाने जाते हैं, वो फैसलें जो चौंकाते हैं, ऐसे में अगर अगले सीजन माही खिलाड़ी नहीं बल्कि पर्दे के पीछे रणनीति बनाते नजर आए तो हैरानी नहीं होनी चाहिए।
चेन्नई ने रविवार को रॉयल चैलेंजर्स बैंगलोर (आरसीबी) के खिलाफ आठ विकेट से जीत दर्ज की थी, लेकिन बाद में दूसरे मैच में रॉयल्स ने मुंबई को हराकर धोनी की टीम की प्लेऑफ में पहुंचने की धुंधली उम्मीद भी समाप्त कर दी। आरसीबी पर जीत से चेन्नई के 12 मैचों में आठ अंक हो गए हैं, लेकिन अपने आखिरी दो मैच जीतने पर भी वह अधिकतम 12 अंक ही हासिल कर सकता है और यह प्लेऑफ में पहुंचने के लिए पर्याप्त नहीं होंगे।
अंकतालिका में मुंबई, दिल्ली कैपिटल्स और आरसीबी के समान 14 अंक हैं जबकि कोलकाता नाइटराइडर्स के 12 अंक हैं और उसे तीन मैच खेलने हैं। किंग्स इलेवन पंजाब और राजस्थान के 10-10 अंक हैं और उनके क्रमश: तीन और दो मैच बचे हैं। धोनी ने रविवार को आरसीबी पर जीत के बाद कहा था, ‘अगर गणितीय समीकरणों को एक तरफ रख दिया जाए तो हमारी प्लेऑफ में पहुंचने की कोई संभावना नहीं है।’