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रवि शास्त्री ने टीम इंडिया के दक्षिण अफ्रीकी दौरे को लेकर दिया बड़ा बयान!

Sun, 03 Sep 2017 12:13 PM IST
amarujala.com- Presented by: नवीन चौहान
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विराट कोहली और रवि शास्त्री - फोटो : BCCI
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भारत श्रीलंका के खिलाफ टेस्ट के बाद वनडे सीरीज में भी जीत हासिल की। इसके बाद बीसीसीआई टीवी ने टीम इंडिया के मुख्य कोच रवि शास्त्री से सीरीज के अनुभवों के बारे में बात की। टीम का विश्वास बढ़ा हुआ है और सभी खिलाड़ी अच्छा प्रदर्शन कर टीम की जीत में योगदान कर रहे हैं। प्रस्तुत हैं बातचीत के मुख्य अंश... 
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सर सीरीज जीत पर आपको बधाई। हमने देखा कि आपने श्रीलंका दौरे को आगे की चुनौतियों के लिए ड्राइंग बोर्ड की तरह इस्तेमाल किया। आप इस बारे में क्या सोचते हैं?

मेरे लिए हर दौरा चुनौती है। मैंने टीम के खिलाड़ियों के ये बात शुरू में ही बता दी है। मैं ऐसा व्यक्ति हूं जो हर विरोधी टीम का सम्मान करता हूं। और हम वर्तमान में रहना पसंद करते हैं  ऐसा करते हुए हमने अब तक जैसा प्रदर्शन किया है वैसा आगे भी करना चाहते हैं। हममें पहले निरंतरता और  प्रतिस्पर्धा का अभाव था जिसे हासिल कर किया है। अभी भी सुधार की गुंजाइश है हमें हमेशा उनपर काम करते रहना है। मुझे लगता है कि टीम के सभी खिलाड़ी इन कमियों से वाकिफ हैं और इसपर काम कर रहे हैं। 
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टीम में नहीं है कोई सीनियर-जूनियर

रवि शास्त्री और विराट कोहली - फोटो : twitter
हमने देखा है कि ट्रेनिंग सेशन का टाइम बढ़ गया है और ड्रेसिंग रूम से हंसी के ठहाके ज्यादा सुनाई देने लगे हैं। इससे ड्रेसिंग रूम एक खुशनुमा जगह बन गया है। ऐसा क्या है कि रवि शास्त्री सभी खिलाड़ियों के चहेते कोच बन गए हैं। 

मैं ये नहीं कहूंगा कि मैं सबसे चहेता कोच हूं। मैं खिलाड़ियों के लिए सब कुछ सामान्य रखना चाहता हूं। मैं स्विच ऑन और स्विच ऑफ होने वाला व्यक्ति हूं। जब मामला एथिक्स और वैल्यूज का होता है तब मैं बड़ा आदमी हूं। लेकिन टीम को लेकर जो है वो कि विश्वास बहुत बड़ा फैक्टर है जो अब ड्रेसिंग रूम में है। खिलाड़ियों और ट्रेनिंग स्टाफ के बीच सौहार्द बहुत अच्छा है। जैसा कि विराट ने कहा है कि टीम में कोई सीनियर जूनियर नहीं है। क्योंकि सभी टीम के सदस्य हैं और सबको अपना योगदान देना है। 

हमने अपनी टीम में देखा है कि महेंद्र सिंह धोनी जैसा टीम का सबसे अनुभवी खिलाड़ी एक बेहतरीन टीम मैन है। कोई भी युवा खिलाड़ी उनके पास कभी भी जा सकता है उसी तरह वह उसी अंदाज में कप्तान विराट ये मेरे पास या सपोर्ट स्टाफ को एप्रोच कर सकता है। इस तरह का माहौल टीम में है। यदि आपके बीच इस तरह का लेन-देन या साझेदारी नहीं है तो आपके बीच उस तरह का  विश्वास भी नहीं  होगा। ड्रेसिंग रूम में क्या होता है कैसा माहौल है वहां क्या बातें होती हैं ये बाते हमेशा वहीं रहेंगी। 

हर खिलाड़ी की भूमिका स्पष्ट होना जरूरी

Ravi shastri
इस दौरे की सबसे बड़ी उपलब्धि ये रही कि आप प्रत्येक खिलाड़ी की एक निश्चित भूमिका तय कर रहे हैं साथ ही उनकी जरूरत की अनुसार जगह सुनिश्चित कर रहे हैं। इसपर आपका क्या कहना है?

मैंने हमेशा कहा है कि एक टीम गेम में यदि आपको ये नहीं पता कि आपकी क्या भूमिका है और मैं इसे टीम कहूं। आप क्रिकेट में ही क्यों जीवन के किसी भी पहलू में देख लें। यदि किसी व्यक्ति को उसकी भूमिका मालूम है और आप टीम में अलग-अलग व्यक्ति की अलग-अलग भूमिका देखते हैं और सभी अपनी क्षमता के अनुरूप अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करते हैं तो आप पाएंगे कि टीम को बेहतरीन प्रदर्शन करता पाएंगे। लेकिन यदि व्यक्ति को अपनी भूमिका नहीं मालूम है तो सोच के स्तर पर कुछ भी स्पष्ट नहीं होता है। ऐसे में कई तरह की कन्फ्यूजन रहती है और आप उस व्यक्ति की क्षमता के अनुरूप प्रदर्शन नहीं करा सकते हैं। किसी को कोई रोल दिए जाने का मतलब ये है कि वो अपना काम बेहतर तरीके से कर सके और ये हमारा काम है कि वो सहज महसूस करे और ऐसी मनोदशा में रहे जहां वो जाए और बिना किसी डर के खुद का जाहिर कर सके ये सपोर्ट स्टाफ का काम है। 
 

ये बहुत अच्छी और मझी हुई टीम है

रवि शास्त्री - फोटो : BCCI
एक क्रिकेटर और कोच दोनों रूपों  में देखा है कि आपको मुश्किल परेशानियों का सहज रूप में सामना करने में मजा आता है क्या ऐसा है?

मैं हमेशा से ऐसा रहा हूं। मेरे लिए जैसा आप देखेंगे वैसा पाएंगे। मैं कभी हकीकत को छिपाता नहीं हूं जो लोग मेरे साथ खेल चुके हैं वो इस बात से अच्छी तरह वाकिफ हैं। मेरी कप्तानी में जो लोग खेले वो ये जानते हैं कि मुझसे और टीम से क्या अपेक्षा की जाए। इस टीम के साथ सबसे अच्छी बात यह है कि मैंने इनके साथ टीम डायरेये बहुत अच्छी और मझी हुई टीम है।क्टर के रूप में उस वक्त 18 महीने गुजारे जब ये सभी उभर रहे थे। जब मैंने इंग्लैंड में इसी सपोर्ट स्टाफ के साथ जिम्मेदारी संभाली थी तब ये एक अलग टीम थी। लेकिन अब पिछले एक दो-ढाई साल में टीम के सदस्यों का बतौर खिलाड़ी कद बढ़ा है। जब ये खिलाड़ी मैदान में खेलने उतरते हैं तो सबको यह दिखाई भी पड़ता है। 
 

इंंग्लैंड, दक्षिण अफ्रीका और ऑस्ट्रेलिया दौरा है अवसर और चुनौती दोनों

रवि शास्त्री - फोटो : BCCI
आगामी सीजन में भारतीय टीम को दक्षिण अफ्रीका, इंग्लैंड और ऑस्ट्रेलिया का  दौरा करना है। आपके लिए ये कितनी बड़ी चुनौती हैं और किस तरह जो अब तक नहीं हो सका है वो हासिल करने का अवसर है। 

मुझे लगता है कि ये एक बड़ा अवसर और चुनौती दोनों है। मैं इसे दोनों का कॉम्बिनेशन इसलिए कह रहा हूं क्योंकि यदि आप आजकल के दुनियाभर के क्रिकेट को देखें तो पाएंगे कि कोई भी टीम विदेशी दौरों पर अच्छा प्रदर्शन नहीं कर पाई है खासकर टेस्ट मैचों में। लेकिन आप देखें कि एक टीम जिसमे पिछले कुछ सालों में इस मामले में तरक्की की है तो वो है टीम इंडिया। हम अभी भी विदेशी दौरों को लेकर प्रलाप करते हैं और शेखी बघारते  हैं। इसलिए मैं मानता हूं कि ये एक चुनौती है क्योंकि किसी टीम ने विदेशी दौरों पर अच्छा प्रदर्शन नहीं किया है। इस टीम के पास अवसर है कि वो विदेशी दौरों पर अच्छा प्रदर्शन करे। यदि इसके लिए आप कड़े मापदंड रखेंगे तो हमारे ऊपर बोझ है। ये हो भी सकता है और नहीं भी लेकिन हमारे लिए वहां अवसर है। 
 
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मेरी और विराट की सोच एक जैसी, लेकिन कप्तान होता है टीम का बॉस

विराट कोहली - फोटो : SELF
आप पहले भी यह कह चुके हैं कि ये विराट की टीम है और सपोर्ट स्टाफ इसका विस्तार है। लेकिन विराट और आपकी सोच एक जैसी है जिसमें बड़ा स्कोर रखने से लेकर सफलतापूर्वक रन चेज करना शामिल है। 

मुझे लगता है इससे मदद मिलती है। यह कम्युनिकेशन को आसान बना देता है क्योकि जब दो लोगों की सोच एक जैसी होती है तो आप एक जगह होते हो। ऐसे में आप दूसरा खिलाड़ी क्या कर रहा है उसे एक जैसे नजरिए से आंकते हो। जब आप इस भारतीय टीम को मैदान देखते हैं तो लगता है कि इन्हें खेलने दो। उनके खेल में ऊर्जा सौहार्द, बटवारे और दूसरे की सफलता में खुशी की भावना झलकती है। जब वो अच्छा प्रदर्शन नहीं करते हैं तो उनके अंदर बड़ी निराशा भी होती है। जो बेहद जरूरी है। ये महान खेल है जो आपको बहुत सारी खुशियां देता है वहीं कई बार आपको आसमान से जमीन पर पटक देता है। ये इस खेल की खूबसूरती है। लेकिन इसके बाद ये मायने रखता है कि आप एक टीम के रूप में  कैस उठकर खड़े होते हैं। ये इस भारतीय टीम को परिभाषित करेगी और ये हमारा प्रयास ये है कि सबके बीच अच्छे संबंध हों। 

कप्तान हमेशा टीम का बॉस होता है। मेरे पास एक बेहतरीन सपोर्ट स्टाफ है। जो मेरे साथ पहले दिन से है जब मैं टीम का डायरेक्टर था और अब जब टीम का हेड कोच हूं। साथ ही सबके बीच विश्वास का एक बंधन है जो खिलाड़ियों और सपोर्ट स्टाफ के बीच काम करने से आया है। हमारा काम उन्हें रिलैक्स रखना और महूसस कराना है कि वो एक बेहतरीन मनोस्थिति में हैं। 

 
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