अनुबंध ही नहीं, तो उल्लंघन कैसा?
मुजरबानी की एजेंसी ने बयान जारी कर पीएसएल के फैसले को चुनौती दी है। उनके मुताबिक, इस्लामाबाद यूनाइटेड के साथ सिर्फ बातचीत हुई थी, लेकिन कोई आधिकारिक अनुबंध साइन नहीं हुआ। ऐसे में अनुबंध उल्लंघन का आरोप पूरी तरह बेबुनियाद है। एजेंसी ने इसे बेहद ज्यादा और गलत सजा बताया।
एनओसी और कागजी प्रक्रिया में पीएसएल की बड़ी चूक
एजेंसी ने यह भी स्पष्ट किया कि किसी भी विदेशी लीग में खेलने के लिए एनओसी जरूरी होता है, जो तभी मिलता है जब वैध कॉन्ट्रैक्ट मौजूद हो। चूंकि मुजरबानी को ऐसा कोई साइन किया हुआ कॉन्ट्रैक्ट मिला ही नहीं, इसलिए पूरी प्रक्रिया अधूरी थी। इस लापरवाही ने पीएसएल के प्रशासनिक ढांचे पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।