एक और घरेलू सीरीज में भारत की हार और फिर शुरू हो गई कप्तान बदलने की चर्चा। टीम इंडिया के लगातार हारने का कारण क्या सिर्फ धोनी ही हैं? क्या धोनी को हटा देने से टीम अच्छा खेलने लगेगी? ऐसे कई सवाल हैं जो सिर्फ पूछने में अच्छे लगते हैं पर जब इसका जवाब ढूढने पर हकीकत कुछ और ही दिखाई देती है।
पाकिस्तान के खिलाफ वनडे सीरीज में टीम इंडिया की हार का जिम्मेदार अगर कप्तान को माना जाए तो यह सरासर ज्यादती होगी। भारतीय टीम की बल्लेबाजी पाक के खिलाफ घरेलू सीरीज में पूरी तरह फ्लॉप दिखी। सीरीज हारने के बाद विशेषज्ञ और पुराने खिलाड़ियों ने धोनी पर तलवार तान दी है। जैसे इस हार का इकलौता जिम्मेदार वही हैं।
बात अगर आंकडों की करें तो बल्लेबाजी में कप्तान धोनी अपने साथी खिलाड़ियों से कहीं आगे हैं। वनडे की पिछली पांच पारियां टीम के धुरंधरों की पोल खोलने के लिए पर्याप्त हैं। मौजूदा वनडे में टीम कप्तानी का दावेदार सहवाग, गंभीर और कोहली को माना जा सकता है। लेकिन जब इनका खुद का प्रदर्शन नियमित नहीं है तो यह टीम को कैसे जीत दिला पाएंगे, इस पर संदेह हैं। वहीं कप्तान धोनी दबाव में भी अपनी बल्लेबाजी को संभाले हुए हैं।
कप्तानी के दावेदार
सहवाग की पिछली 5 वनडे पारियां (15,3,34,4,31)---87 रन
गंभीर की पिछली 5 वनडे पारियां (102,0,88,8,11)---209 रन
कोहली की पिछली 5 वनडे पारियां (38,128,23,0,6)---195 रन
मौजूदा कप्तान
धोनी की पिछली 5 वनडे पारियां (31,DNB,58,113*,54*)---256 रन
यह सच है, जीत का क्रेडिट अगर कप्तान को मिलता है तो हार का खामियाजा भी उसे भुगतना पड़ेगा। लेकिन बीसीसीआई के सूत्रों की माने तो धोनी के यही आंकड़े उन्हें वनडे के कप्तान बनाए रखने के लिए पर्याप्त हैं। अब यह बात लगभग सामने आ चुकी है कि टीम गुटबंदी का शिकार है। ऐसे में बोर्ड इस समय कम से कम वनडे का कप्तान बदलेना का जोखिम नहीं लेगा।