रवींद्र जडेजा को गाली देने और धक्का मारने के आरोपी इंग्लैंड के तेज गेंदबाज जेम्स एंडरसन को दोषमुक्त किए जाने के फैसले के खिलाफ बीसीसीआई ने अपील करने का निर्णय लिया है।
भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) ने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद (आईसीसी) के सीईओ डेव रिचर्डसन से एंडरसन पर दिए गए गॉर्डन लुईस के फैसले के खिलाफ अपील करने के लिए कहा है।
तथ्यों के अभाव में भारतीय आलराउंडर रवींद्र जडेजा और एंडरसन को न्यायिक आयुक्त लुईस ने निर्दोष ठहराया था लेकिन इस फैसले के खिलाफ अपील करने या नहीं करने का फैसला पूरी तरह से रिचर्डसन पर निर्भर था।
ICC के CEO के पास 6 दिन का समय
आईसीसी सीईओ के पास इस मामले में आए फैसले के खिलाफ अपील करने के लिए 5 से 6 दिन का समय है।
जेम्स एंडरसन पर रवींद्र जडेजा के साथ ट्रेंटब्रिज टेस्ट के दौरान गाली गलौज करने और धक्का मुक्की करने के लिए लेवल 3 का मामला दर्ज किया गया था लेकिन गॉर्डन ने जडेजा और एंडरसन दोनों को मामले में तथ्य नहीं होने के बाद दोषमुक्त कर दिया था।
न्यायिक आयुक्त के निर्णय को चुनौती संबंधित खिलाड़ी या आईसीसी के मुख्य कार्यकारी दे सकते हैं। इस मामले में लिखित फैसला आने के 7 दिनों के भीतर आईसीसी के कानूनी मामलों के प्रमुख को अपील करनी होती है।
नए सिरे से हो सकती है विवाद की सुनवाई
आईसीसी का अनुशासनात्मक आयोग इस मामले की सुनवाई शुरुआत से करेगा और उसके पास फिर पहले से तय फैसले या सजा को घटाने-बढ़ाने या उसमें सुधार करने का पूरा अधिकार होगा।
अपील का नोटिस मिलने के बाद कानूनी मामलों के प्रमुख को 48 घंटों के भीतर जांच दल का गठन करना होगा क्योंकि यह मामला भारत और इंग्लैंड के बीच का है तो आठ पूर्ण सदस्यीय देशों में अन्य 3 सदस्य देशों को पैनल में शामिल किया जाना होगा।
इस जांच दल का गठन होने के 30 दिनों के भीतर सुनवाई होगी और प्रक्रिया पूरी होने के बाद इस पर अंतिम फैसला आएगा। आईसीसी के अध्यक्ष एन श्रीनिवासन ने मामले से खुद को अलग रखने का संकेत दिया था।
इसके बाद दक्षिण अफ्रीकी विकेटकीपर रिचर्डसन को इस मामले पर नजर रखने का काम सौंपा गया है। इस मामले में कोई भी ऑडियो या वीडियो साक्ष्य उपलब्ध नहीं है।
जडेजा ने ट्रेंटब्रिज ग्राउंड और ड्रेसिंग रूम के बीच कोरिडोर में एंडरसन द्वारा धक्का दिए जाने का आरोप लगाया था लेकिन ड्रेसिंग रूम के बाहर लगे सीसीटीवी कैमरे उस समय काम नहीं कर रहे थे।
गॉर्डन ने अपने फैसले में कहा था कि इस मामले में एक ही तटस्थ प्रत्यक्षदर्शी था जिसने उस दौरान कुछ अधिक नहीं देखा। इसके बाद दोनों खिलाड़ियों को साक्ष्य के अभाव में छोड़ दिया गया था।