बीसीसीआई के एक वरिष्ठ अधिकारी ने नाम जाहिर नहीं करने की शर्त पर बताया, ‘बेशक सभी विकल्पों पर विचार किए जाने की जरूरत है। पहला विकल्प भारत है, लेकिन आपको नहीं पता कि स्थिति कैसी रहेगी। बेशक यूएई और श्रीलंका भी हैं लेकिन आईपीएल के विदेश में आयोजन से खर्चा बढ़ेगा। मुझे लगता है कि हाल में अध्यक्ष ने भी यह बात कही थी। मुझे नहीं लगता कि हम अब भी इस स्थिति में हैं कि स्थल तय कर सकें, लेकिन योजना और अस्थाई विंडो तैयार रखने की जरूरत है जिससे कि अगले हफ्ते अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद (आईसीसी) के टी-20 विश्व कप (ऑस्ट्रेलिया में अक्टूबर-नवंबर में) के रद्द होने की आधिकारिक घोषणा करने पर हम आगे बढ़ सकें।’
आईसीसी की बोर्ड बैठक अगले सोमवार को होनी है इसलिए 2021 टी-20 विश्व कप की मेजबानी के लिए सरकार से कर छूट प्रमाण पत्र हासिल करना भी एजेंडा में शीर्ष पर होगा। आईसीसी प्रतियोगिताओं के लिए कर छूट विवाद का मुद्दा रहा है और केंद्र सरकार से जरूरी स्वीकृति हासिल करने के लिए बीसीसीआई को दिसंबर तक का समय दिया गया है। जहां तक भारत के एफटीपी का सवाल है तो इंग्लैंड के खिलाफ सितंबर में होने वाली सीमित ओवरों की श्रृंखला का आयोजन टेस्ट श्रृंखला के बाद फरवरी में किया जा सकता है। बीसीसीआई अगर सीमित ओवरों के मैचों को शामिल करना चाहेगा तो पांच मैचों की टेस्ट श्रृंखला में कटौती की जा सकती है, जिससे कि सीमित ओवरों के छह मैचों (तीन एकदिवसीय और तीन टी-20 अंतरराष्ट्रीय) को शामिल किया जा सके।
श्रीलंका और जिंबाब्वे के स्थगित हुए सीमित ओवरों के दौरे का कार्यक्रम भी दोबारा तय किया जाएगा। बीसीसीआई के लिए हालांकि सबसे बड़ा सिरदर्द देश का घरेलू ढांचा है जिसमें सीनियर पुरुष, अंडर-23 पुरुष, जूनियर लड़के (अंडर-19 और अंडर-16), सीनियर महिला, अंडर-23 महिला, अंडर-19 लड़कियों के वर्ग के टूर्नामेंट शामिल हैं जिसमें सभी प्रारूपों में हजारों मैच होते हैं। अधिकारी ने कहा, ‘बेशक रणजी ट्रॉफी के कार्यक्रम में बदलाव की जरूरत है। हमें चर्चा करने की जरूरत है कि क्या विजय हजारे, दलीप ट्रॉफी, सैयद मुश्ताक अली का आयोजन लगातार किया जा सकता है। हमें किसी एक टूर्नामेंट को रद्द करना पड़ सकता है क्योंकि काफी समय बर्बाद हो गया है। हमें जूनियर घरेलू प्रतियोगिताओं का आयोजन भी करना होगा।’