उन्होंने कहा, 'मौजूदा तथ्यात्मक हालात को देखते हुए यह निष्कर्ष निकालना सुरक्षित होगा कि प्रतिवादी (रूपा), आईसीएल की पूर्णकालिक निदेशक और प्रमोटर के रूप में, उनका आईसी शेयरहोल्डर्स ट्रस्ट एवं सीएसकेसीएल के निदेशकों से करीबी रिश्ता है, जिनका बीसीसीआई के साथ फ्रेंचाइजी करार है। यह नियम 1 (1) के अंतर्गत हितों के टकराव का प्रारूप है।'
बता दें कि यह जैन के अंतिम आदेशों में से एक हो सकता है क्योंकि उनका अनुबंध सात जून को खत्म हो रहा है और बीसीसीआई को फैसला करना है कि वे अनुबंध बढ़ाते हैं या नहीं। यह देखना रोचक होगा कि बीसीसीआई का रुख क्या रहेगा और वे रूपा को टीएनसीए अध्यक्ष पद से हटने के लिए कहते हैं या नहीं। बोर्ड राज्य संघ को इस फैसले के खिलाफ नए नैतिक अधिकारी के समक्ष या अदालत में अपील की स्वीकृति भी दे सकता है।