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“BCCI के बॉस हैं तानाशाह, खुद को समझते हैं क्रिकेट से बड़ा”

Wed, 05 Oct 2016 01:05 PM IST
टीम डिजिटल/ अमर उजाला, दिल्ली
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बीसीसीआई - फोटो : getty
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सुप्रीम कोर्ट की ओर से नियुक्त लोढ़ा समिति ने भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड में कई बदलाव सुझाए। अपने सुझावों की नजरअंदाजी को देखते हुए समिति ने बीससीसी के टॉप अधिकारियों को तानाशाह करार दिया है।
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रिटायर्ड जस्टिस आरएम लोढ़ा की अध्यक्षता में बनी लोढ़ा समिति और अनुराग ठाकुर की अगुवाई वाली बीसीसीआई के बीच तनातनी बढ़ गई है। बीसीसीआई हर तरीके से लोढ़ा समिति के सुझावों को न मानने के अपने तर्क दे रही है।

हाल ही में लोढ़ा समिति ने बैंकों को बीसीसीआई के खातों से बड़ी रकम अदा करने पर रोक लगा दी थी। इसके जवाब में बीसीसीआई ने कहा था कि यदि ऐसा हुआ तो भारत-न्यूजीलैंड की सीरीज बीच में ही रद्द करनी पड़ जाएगी।
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"अगर ऐसा रवैया रहा, तो फिर क्रिकेट का भगवान ही मालिक है"

अनुराग ठाकुर - फोटो : getty
मंगलवार को एक बयान में जस्टिस राजेंद्र मल लोढ़ा ने बीसीसीआई के टॉप अधिकारियों में तानाशाह बताया। उन्होंने कहा कि वो खेल से बड़े नहीं हैं।

एक नीजी चैनल को दिए इंटरव्यू में जस्टिस लोढ़ा ने कहा, “खेल बीसीसीआई के अधिकारियों से ऊपर है। भारत-न्यूजीलैंड की सीरीज में कोई अवरोध नहीं है। यदि बीसीसीआई समिति की रिपोर्ट को तोड़ना-मरोड़ना चाहता है, तो फिर भगवान ही मालिक है।”

उन्होंने स्पष्ट किया कि समिति ने बैंको को बड़े भुगतदान करने से रोका था, न कि सामान्य और रोजमर्रा के लेन-देन से। सीरीज से जुड़े काम सामान्य भुगदान में आते हैं। उन्होंने कहा कि बैंकों ने उनके ई-मेल को सही तरीके से नहीं समझा।
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"तानाशाह अच्छे होते हैं, मगर सुप्रीम कोर्ट सबसे ऊपर है"

टीम इंडिया - फोटो : PTI
जस्टिस लोढ़ा ने कहा, “तानाशाह अच्छा काम करते हैं, मगर वो लोकतंत्र के लिए सही नहीं हैं। यदि सुप्रीम कोर्ट किसी चीज को मंजूरी दे देता है, तो उससे मानना जरूरी है। अब देखने होगा कि बीसीसीआई गुरुवार को समिति की रिपोर्ट का क्या जवाब देगी।”

सुप्रीम कोर्ट में इस मामले की सुनवाई 6 अक्टूबर को होगी। इससे पहले बोर्ड अध्यक्ष अनुराग ठाकुर ने कहा था, “भारत-न्यूजीलैंड सीरीज के बारे में कुछ नहीं कहा जा सकता। बोर्ड बिना फंड के काम नहीं कर सकता। बोर्ड को खिलाड़ियों और अन्य हितधारकों को भुगतदान करने होते हैं।”

ठाकुर ने आरोप लगाया कि बोर्ड खाते उनसे संपर्क करे बिना ही सीज करने का आदेश दे दिया गया। इससे बीसीसीआई की छवि को काफी नुकसान हुआ है।
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