बता दें कि
प्रदीप सांगवान को 2012 आईपीएल के दौरान प्रतिबंधित पदार्थ का सेवन करने का पॉजिटिव पाया गया था। इसके बाद उन पर 18 महीने का बैन लगाया गया था।
मजेदार बात यह है कि बीसीसीआई पर भारतीय सरकार की डोपिंग विरोधी इकाई का भी दबाव है। दरअसल, राष्ट्रीय डोपिंग विरोधी एजेंसी भारतीय क्रिकेटरों का डोप टेस्ट आयोजित कराना चाहता है, लेकिन बोर्ड ने स्पष्ट कर दिया है कि वह अपनी डोपिंग विरोधी पॉलिसी से नहीं हिलेगी और नाडा को भारतीय क्रिकेटरों पर टेस्ट कराने की इजाजत नहीं देगी।
पिछले साल नवंबर में बीसीसीआई के सीईओ राहुल जौहरी ने
विश्व डोपिंग विरोधी एजेंसी (वाडा) और खेल सचिव राहुल भटनागर को एक पत्र लिखा था, जिसमें उन्होंने तकनीकी बिंदुओं को समझाते हुए साफ किया कि नाडा का क्रिकेटर्स पर टेस्ट करने की जरुरत नहीं है क्योंकि बोर्ड राष्ट्रीय खेल महासंघ नहीं है।
उन्होंने जोर देकर कहा कि बोर्ड का मौजूदा डोपिंग विरोधी सिस्टम सही है। जौहरी ने ध्यान दिलाया कि बीसीसीआई का जवाब सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित प्रशासकों की समिति (सीओए) के निर्देशों के बाद ही तैयार करके दिए गए हैं।