भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) ने राजस्थान के पूर्व डीजीपी अजीत सिंह को एंटी करप्शन यूनिट (एसीयू) का प्रमुख नियुक्त किया, लेकिन इसके तुरंत बाद उनकी नियुक्ति पर सवाल उठ गए। दरअसल, इसके पीछे वजह यह मानी जा रही है कि विनोद राय की अध्यक्षता वाली प्रशासकों की समिति (सीओए) ने एसीयू के नये प्रमुख अजीत सिंह की नियुक्ति कार्यवाहक सचिव अमिताभ चौधरी की सहमति के बिना ही मंजूर कर दी।
बीसीसीआई के जेनरल मैनेजर (एडमिनिस्ट्रेशन) प्रोफेसर रत्नाकर शेट्टी के कार्यकाल को विस्तार देने के चौधरी के प्रस्ताव को भी दो सदस्यीय समिति ने खारिज कर दिया। ऐसा कहा जा रहा है कि सीओए ने कार्यवाहक सचिव अमिताभ चौधरी के सिंह के नियुक्ति पत्र पर हस्ताक्षर करने का इंतजार किया, लेकिन उन्होंने हस्ताक्षर से मना कर दिया। चौधरी ने खुद इस बात की पुष्टि की है कि अजीत सिंह की नियुक्ति उनकी मंजूरी के बिना हुई है। इस दौरान चौधरी ने कहा, 'मैंने मीडिया विज्ञप्ति देखी है। मैं सीओए को जवाब देने जा रहा हूं।'
बता दें कि अजीत सिंह राजस्थान कैडर के 1982 बैच के आईपीएस अधिकारी है जो पिछले साल 30 नवंबर को राजस्थान के शीर्ष पुलिस अधिकारी के पद से सेवानिवृत हुए थे। वह दिल्ली पुलिस के पूर्व महानिदेशक नीरज कुमार की जगह लेंगे। नीरज कुमार 31 मई 2018 तक को एसीयू के सलाहकार के रूप में अपनी सेवाएं देते रहेंगे।
बीसीसीआई की विज्ञप्ति के मुताबिक, 'भारतीय पुलिस सेवा में लगभग 36 साल की सेवाएं देने वाले सिंह को भ्रष्टाचार विरोधी अभियान, खोजी कार्य और पुलिस व्यवस्था के मामले में काफी अनुभव है।' वह इंडियन प्रीमियर लीग (आईपीएल) शुरू होने से पहले मुंबई स्थित बीसीसीआई मुख्यालय में अपना कार्यभार ग्रहण करेंगे। विज्ञप्ति के मुताबिक नीरज कुमार को 31 मई 2018 तक एंटी करप्शन यूनिट के सलाहकार के रूप में बनाए रखा गया है।