दुनिया की सबसे अमीर क्रिकेट बोर्ड बीसीसीआई के रुतबे से हर कोई वाकिफ है। दबंग बीसीसीआई की अकड़ को सभी जानते हैं और उसे कोई चुनौती दे बर्दाश्त नहीं होता।
बांबे हाई कोर्ट ने पिछले दिनों बीसीसीआई द्वारा स्पॉट फिक्सिंग मामले में गठित जांच कमेटी को अवैध और असंवैधानिक करार दिया था। हाई कोर्ट ने जिस याचिका पर अपना फैसला सुनाया उसके याचिकाकर्ता को याचिका वापस लेने के लिए बीसीसीआई ने धमकी दी थी।
याचिकाकर्ता आदित्य वर्मा ने खुलासा कि बांबे हाई कोर्ट में मामले की सुनवाई के दौरान मामले वापस लेने के लिए बीसीसीआई के एक वरिष्ठ अधिकारी ने उन्हें धमकाया। उनसे कहा गया इस हरकत से उनकी एसोसिएशन को क्या मान्यता मिल जाएगी? बैठकर मामले को सुलझाया जा सकता है।
उन्होंने आगे कहा, 'यह भी कहा गया कि वह क्रिकेट खेल रहे अपने बच्चे का भविष्य क्यों खराब करना चाहते हैं।' खुद राज्य स्तरीय क्रिकेटर रहे वर्मा का बेटा इस वक्त बंगाल अंडर-19 टीम से खेल रहा है। हालांकि वर्मा ने इस अधिकारी का नाम नहीं बताया।
पूर्व केंद्रीय मंत्री सहाय समर्थन में उतरे
जनहित याचिका डालकर बीसीसीआई अध्यक्ष एन श्रीनिवासन की योजना पर पानी फेरने वाले क्रिकेट एसोसिएशन ऑफ बिहार (बीसीए) के सचिव आदित्य वर्मा के समर्थन में पूर्व केंद्रीय मंत्री सुबोधकांत सहाय भी उतर आए हैं।
क्रिकेट एसोसिएशन ऑफ झारखंड (जेसीए) के अध्यक्ष सहाय ने गुरुवार को साफ कर दिया कि अगर श्रीनिवासन शुक्रवार को होने वाली बोर्ड वर्किंग कमेटी की बैठक की अगुवाई करते हैं तो यह बांबे हाई कोर्ट के निर्णय का अपमान होगा। वह उन्हें ऐसा करने पर अदालत में घसीट लेंगे।
श्रीनिवासन के खिलाफ अदालत में आपराधिक याचिका डाली जाएगी। यही नहीं सहाय ने अजय शिर्के और संजय जगदाले के जाने के बाद चुप बैठे बोर्ड सदस्यों को श्रीनिवासन के खिलाफ एकजुट होकर उनके खिलाफ मोर्चा खोलने को कहा है।
श्रीनिवासन के अगले कदम का इंतजार
सहाय के साथ मौजूद याचिकाकर्ता आदित्य वर्मा ने कहा कि वह इंतजार में हैं कि कल श्रीनिवासन क्या कदम उठाते हैं? वर्मा ने खुलासा किया कि हाई कोर्ट के निर्णय को चुनौती देने से बचाने को उनकी ओर से सुप्रीम कोर्ट में कैविएट दाखिल कर दी गई है।
वर्मा ने कहा कि अभी हाई कोर्ट की ओर से जांच कमेटी को अवैध ठहराया गया है। अब वह सुप्रीम कोर्ट में उसकी अगुवाई में स्पॉट फिक्सिंग मामले की जांच कराने के लिए भी याचिका डालने जा रहे हैं।