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धोनी के उदय के साथ क्रिकेट में बढ़ा छोटे शहरों का वर्चस्व  

Sun, 13 Aug 2017 05:38 AM IST
amarujala.com- Written by: नवीन चौहान
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महे
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भारतीय क्रिकेट के 85 साल के पीरियड को कई भागों में बांटा जा सकता है। लेकिन इस दौर के एक भाग को धोनी युग भी कहा जा सकता है। ऐसा इसलिए क्योंकि धोनी के टीम इंडिया में शामिल होने के बाद न केवल टीम इंडिया का चरित्र बदला बल्कि भारतीय क्रिकेट टीम ने सफलता के नए कीर्तिमान भी गढ़े। झारखंड के रांची जैसे छोटे से शहर में उदित होकर धोनी का नाम क्रिकेट की दुनिया के सबसे चमकते सितारों में शुमार हो गया।
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धोनी को कप्तानी दुर्घटनावश ही मिली लेकिन हाथ आए इस मौके को धोनी ने खाली नहीं जाने दिया। धोनी की युवा टीम ने भारत को टी-20 और वनडे  विश्वकप दिला कर ऐसा इतिहास लिख डाला जिसे आने वाले कई दशकों तक विश्व क्रिकेट में याद किया जाएगा। लेकिन भारतीय क्रिकेट में धोनी को उनकी सफलताओं से भारतीय क्रिकेट में छोटे शहरों के वर्चस्व के लिए भी याद किया जाएगा। जो कारनामा महानगरों से उभरकर आए दिग्गज न कर सके वो एक छोटे शहर के बड़े खिलाड़ी ने कर दिखाया। 

एमएस धोनी की सफलता ने भारत के कई छोटे बड़े शहरों में क्रिकेट खेलने वाले युवाओं के लिए राष्ट्रीय टीम के लिए रास्ते खोल दिए। धोनी ने विश्वपटल पर सफल होकर यह बता दिया कि छोटे शहर का खिलाड़ी भी बड़े सपने देख सकते हैं और कड़ी मेहनत के बल पर उन्हें पूरा भी कर सकता है। 
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धोनी के टीम इंडिया में शामिल होने के बाद जैसे कि छोटे शहरों के खिलाड़ियों की टीम इंडिया में बाढ़ सी आ गई। जहीर खान, मुनाफ पटेल, प्रवीण कुमार, उमेश यादव, मोहम्मद शमी, पियूष चावला, वरुण एरोन, भुवनेश्वर कुमार, रविंद्र जडेजा, यूसुफ पठान, कर्ण शर्मा जैसे कई छोटे शहरों के खिलाड़ी धोनी के समय टीम में आए या धोनी की कप्तानी में अपना सबसे बेहतरीन प्रदर्शन किया। 

साल 2011 में विश्वकप खिताब जीतने वाली भारतीय टीम में कप्तान एमएस धोनी, सुरेश रैना, यूसुफ पठान, जहीर खान, मुनाफ पटेल, एस श्रीसंत, पियूष चावला और प्रवीण कुमार सहित कुल 8 खिलाड़ी छोटे शहरों से ताल्लुक रखते थे। 2015 के विश्वकप में सेमीफाइनल तक पहुंचने वाली टीम इंडिया का गेंदबाजी आक्रमण पूरी तरह छोटे शहरों के खिलाड़ियों के हाथों में था। मोहम्मद शमी, भुवनेश्वर कुमार, मोहित शर्मा,  रविंद्र जडेजा जैसे अधिकांश गेंदबाज छोटे शहरों के थे। 

ऐसे में इस तस्वीर से भारत के युवाओं में विश्वास बढ़ा कि उनके आसपास के खिलाड़ी टीम इंडिया में जगह बना सकते हैं। नतीजतन टीम इंडिया के दिग्गजों के संन्यास लेने के बाद भारतीय टीम को बदलाव के दौर में ज्यादा परेशानियों का सामना नहीं करना पड़ा। आज टीम इंडिया विश्व की नंबर एक टीम है और लगातार आईसीसी स्पर्धाओं के सेमीफाइनल और फाइनल में जगह बना रही है।  
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