(कोई और ऑस्ट्रेलियाई मीडिया द्वारा मेहमान टीम के खिलाफ बचपने वाली और जानकारी वाली मजाकिया रिपोर्टिंग से थका है? यह अशिष्ट परंपरा बन चुकी है, जिसका हमारे देश पर गलत असर पड़ता है।)
(पिछली बार कोहली ने 4 शतक जमाए और उनकी औसत 86.50 की रही। विजय की औसत 60.25, रहाणे की 57 और राहुल ने अपने दूसरे टेस्ट में 110 रन की पारी खेली। तो मेरे ख्याल में हां, वो ठीक हैं।)
(यह बचपना है। मैं सोचना पसंद करूंगा कि हम इससे बेहतर हो सकते हैं।)
(ऐसा कहने के लिए धन्यवाद रिचर्ड। ऑस्ट्रेलियाई स्पोर्ट्स प्रेस का तरीका अच्छा नहीं है। ऑस्ट्रेलिया के सभी लोग ऐसे बिना दिमाग के नहीं हैं। इसलिए कोई राष्ट्रीय क्रिकेट टीम की परंपरा की चिंता नहीं करता।)
(भारतीय चमगादड़ सिर्फ इस बात से घबराएंगे कि वह निचली रैंक वाली टेस्ट विरोधी टीम के खिलाफ प्रदर्शन नहीं कर सकें।)
वैसे, ऑस्ट्रेलियाई मीडिया के निशाने पर विराट कोहली पहली बार नहीं आए हैं। इससे पहले 2017 में ऑस्ट्रेलिया के भारत दौरे पर भारतीय कप्तान को 'क्रिकेट का डोनाल्ड ट्रंप' कहा गया था। कोहली ने तब स्टीव स्मिथ के बेंगलुरु में डीआरएस पर ब्रेन फेड के मामले को बकवास करार दिया था और कहा था कि उन्होंने ड्रेसिंग रूम से अनचाहा सहयोग पाने की कोशिश की थी।
बहरहाल, टीम इंडिया एक अभ्यास मैच खेलने के बाद एडिलेड पहुंच चुकी है। मेहमान टीम को अभ्यास मैच में जोरदार झटका लगा जब एड़ी में चोट की वजह से ओपनर पृथ्वी शॉ पहले टेस्ट से बाहर हो गए हैं। हालांकि, इसके बावजूद टीम इंडिया मजबूत है और उसके पास सीरीज जीतकर इतिहास रचने का सुनहरा मौका है।