भारत को 2012 में अपने घरेलू मैदान पर इंग्लैंड के खिलाफ सीरीज में मिली 1-2 से हार के पीछे केवल एक ही बल्लेबाज का हाथ था। अंग्रेज कप्तान कुक ने भारत दौरे पर सीरीज में सबसे ज्यादा 4 टेस्ट की 8 पारियों में 3 शतक के साथ 562 रन बनाए। लगभग वही कहानी ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ मौजूदा टेस्ट सीरीज में दोहराई जा रही है।
इस बार कंगारू कप्तान माइकल क्लार्क टीम इंडिया के लिए मुसीबत बनते नजर आ रहे हैं। क्लार्क ने पहले टेस्ट के पहले दिन जब उनकी टीम लड़खड़ा गई थी तब शानदार श्ातक (103) ठोक डाला। क्लॉर्क अभी भी क्रीज पर मौजूद हैं। इसे केवल संयोग ही कहा जाएगा कि टीम इंडिया के लिए घरेलू मैदानों पर मेहमान कप्तान ही भारी पड़ जा रहा है।
हालांकि क्लार्क की कमजोरी ढूंढने से पहले उनके मौजूदा फॉर्म पर नजर डालें तो पता लगता है आखिर क्लार्क क्यों टीम इंडिया के लिए मुसीबत बन रहे हैं? क्लार्क इस समय अपने चरम पर हैं। वैसे भी ऑस्ट्रेलियन टीम के बारे में कहावत है कि जब कोई कप्तान बनता है तो वो अपने सबसे अच्छे दौर में अपने आप पहुंच जाता है।
क्लार्क ने 2012 में 1 तिहरा शतक (329 नाबाद), तीन दोहरा शतक (210, 259 नाबाद, 230) और एक शतक (106) के साथ 1610 रन बनाए हैं। इसमे भारत के खिलाफ क्लार्क का ऑस्ट्रेलिया में एक तिहरा और एक दोहरा शतक है। क्लार्क के फॉर्म को देखते हुए टीम इंडिया के पास एक अनुभवी गेंदबाज की कमी खल रही है। चेन्नई के टर्निंग ट्रैक पर ऑस्ट्रेलिया ने अगर पहली पारी में 400 का आंकड़ा छू लिया तो भारत के लिए इस मैच में वापसी मुश्किल होगी।
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