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केएल राहुल ने मानी गलती, बोले- डीआरएस नहीं लिया होता तो टीम इंडिया जीत जाती मैच

Wed, 26 Sep 2018 02:02 PM IST
स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला
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सलामी बल्लेबाज केएल राहुल के लिए यह ‘निराशाजनक’ है कि 2016 में पदार्पण करने के बाद से लेकर अब तक वह केवल 13 वनडे ही खेल पाए हैं लेकिन उन्होंने स्वीकार किया टीम में एक एक स्थान के लिए कड़ी प्रतिस्पर्धा है और ऐसे में वह खीझकर चुपचाप बैठे नहीं रह सकते हैं।

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राहुल ने एशिया कप में अफगानिस्तान के खिलाफ टाई रहे मैच के बाद संवाददाताओं से कहा, ‘मैं जानता हूं कि मुझे अपने खेल पर काम करना है। जैसी भी स्थिति हो मुझे उसका सर्वश्रेष्ठ उपयोग करना है। कई बार यह निराशाजनक होता है लेकिन जिस तरह की प्रतिस्पर्धा है उसमें किसी का भी स्थान पक्का नहीं है।’

उन्होंने कहा, ‘इसलिए आपको अपनी बारी का इंतजार करना होता है। आपको धैर्य बनाये रखकर कड़ी मेहनत करनी होती है। जब मैं खेल नहीं रहा होता हूं तो मैं चुपचाप बैठकर खीझ सकता हूं कि मैं क्यों नहीं खेल रहा हूं, लेकिन मैं उस समय का उपयोग अपनी फिटनेस और खेल सुधारने में करता हूं।’
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राहुल का वनडे करियर भले ही 13 मैच का हो लेकिन वह बल्लेबाजी क्रम में चार भिन्न स्थानों पर बल्लेबाजी कर चुके हैं। इनमें से सात बार वह पारी का आगाज करने के लिए उतरे। राहुल ने कहा कि शीर्ष क्रम में बल्लेबाजी करने में वह सहज महसूस करते हैं। 

उन्होंने कहा, ‘बल्लेबाजी क्रम में विभिन्न स्थानों पर खेलना चुनौतीपूर्ण है। मैं जूनियर क्रिकेट से ही शीर्ष क्रम में खेलता रहा हूं और यह मेरे लिए सबसे सहज स्थान है।’

राहुल ने कहा, ‘लेकिन टीम वाले खेल में आपको को लचीला होना पड़ता है तथा टीम को आपको जो भी जिम्मेदारी सौंपे उसे स्वीकार करके अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करना होता है। दुर्भाग्य से मध्यक्रम में मुझे जो मौके मिले वह मेरे लिये अनुकूल नहीं रहे।’

अफगानिस्तान के खिलाफ मुकाबले में राहुल ने सलामी बल्लेबाजी करते हुए 60 रन की पारी खेली। बावजूद इसके वह राशिद खान की एक गेंद में गैरजिम्मेदाराना ढंग से आउट हो गए। रिवर्स स्विप की कोशिश कर रहे राहुल को अंपायर ने जब पगबाधा आउट दिया तो उन्होंने डीआरएस ले लिया। जबकि साफ नजर आ रहा था कि वे विकेट के सामने पकड़े गए हैं।

इस बारे में राहुल ने बात करते हुए कहा कि, 'मुझे डीआरएस नहीं लेना चाहिए था। ये बेहद कठिन हो जाता है जब वनडे में आपके पास एक ही रीव्यू हो और लेकिन जब आप फील्ड में होते हो तो आपको पता नहीं लगता कि क्या वाकई आप आउट थे। खेल के आगे बढ़ने के साथ-साथ विकेट धीमा और स्पिन होना शुरू हो चुका था, बावजूद इसके पहले डीके अच्छा खेले बाद में जडेजा और चाहर ने अच्छी लड़ाई लड़ी।

बताते चलें कि राहुल का रीव्यू असफल होने के बाद टीम इंडिया की डीआरएस पावर खत्म हो चुकी थी। बाद में एमएस धोनी और कार्तिक को अंपायर का गलत निर्णय भारीू पड़ गया, क्योंकि भारतीय क्रिकेट टीम के पास फिर कोई रीव्यू ही नहीं बचा था।

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