भारतीय टीम के ऑफ स्पिनर रविचंद्रन अश्विन का क्रिकेट सफर शानदार रहा है। एक आम गेंदबाज से भारत के लिए हर फॉर्मेट में कमाल करने से लेकर टेस्ट टीम में वापसी तक उन्होंने कई उपलब्धियां हासिल की है। मौजूदा समय में वह दुनिया के नंबर एक टेस्ट गेंदबाज हैं और देश के सबसे सफल ऑफ स्पिनर हैं। हालंकि, अश्विन का एक दशक लंबा करियर कई उतार-चढ़ाव से भरा रहा है। ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ विश्व टेस्ट चैंपियनशिप फाइनल में उन्हें प्लेइंग 11 में ना चुनें जाने पर काफी चर्चा हुई। अश्विन की जिंदगी में ऐसा कई बार हुआ है, जब उन्हें और उनके परिवार को मानसिक तनाव से गुजरना पड़ा और उन्हें एक "ओवरथिंकर" का टैग दे दिया गया।
जब भी विदेश में टेस्ट खेलने की बात आती है, तब अश्विन पहला नाम नहीं हैं जो चयनकर्ताओं के मन में आता है। विश्व टेस्ट चैंपयनशिप में भी रवींद्र जड़ेजा को इकलौते स्पिनर के तौर पर मौका दिया गया। ऐसा माना जाता है कि अश्विन कुछ मामलों में जरुरत से ज्यादा सोच लेते हैं, जो कई बार उनके खिलाफ काम कर जाता है।
इंटरव्यू के दौरान अश्विन ने बताया कि किस तरह यह "ओवरथिंकर" का टैग बनाया गया जो उनके प्रदर्शन को और उन्हें निजी रुप से प्रभावित करता है। अश्विन ने कहा " बहुत से लोग मुझे एक ओवरथिंकर के रुप में देखते हैं, ऐसा खिलाड़ी जिसे 15-20 मैच खेलने को मिलते हैं उसे जरूरत से ज्यादा नहीं सोचना चाहिए। एक खिलाड़ी जिसे पता है कि उसे केवल दो मैच खेलने को मिलेंगे उसे मानसिक रुप से परेशान होना चाहिए, क्योंकि यह मेरा काम है, मेरा सफर है और इसलिए यह मुझे अच्छा भी लगता है। अगर मुझे कोई कहेगा कि मुझे 15 मैच खेलने हैं, आप खिलाड़ियों का नेतृत्व करेंगे, तो मैं ओवरथिंक नहीं करुगा, मैं क्यों करुंगा। एक खिलाड़ी को ओवरथिंकर कहना गलत होगा, क्योंकि यह उसकी अपनी यात्रा है और किसी भी अन्य खिलाड़ी को इस पर टिप्पणी करने का अधिकार नहीं है।"
किस तरह ओवरथिंकर का टैग अश्विन के खिलाफ काम करता है
अश्विन ने बताया ऐसा कई बार हुआ है जब टीम की कप्तानी करने की भूमिका उनके सामने आई है और उनके खिलाफ बहुत कुछ कहा गया। अश्विन ने कहा "यह मेरे खिलाफ काम करने के लिए ही बनाया गया है, सही कहा ना, और जैसा मैंने कहा कि यहां ऐसे बयान दिए गए हैं कि जब नेतृत्व का मौका मेरे सामने में आया तो लोगों ने हमेशा सवाल उठाए हैं, ऐसे लोग भी हैं जो कहते हैं कि भारत के विदेश दौरे पर मेरा नाम शीट पर पहला नाम नहीं है। चाहे नाम पहला हो या ना हो, यह मेरे हाथ में नहीं है, यह मैंने कमाया है, मेरा विश्वास है कि ऐसा हमेशा रहेगा। मुझे कोई शिकायत नहीं है, मेरे पास इतना समय नहीं है कि मैं बैठकर उनको जवाब दूं या पछताऊं। मुझे किसी के लिए कोई खेद नहीं हैं।"
अश्विन ने बताया कि जब भी ऐसा कुछ होता है तो उनसे ज्यादा उनका परिवार, खासकर उनके पिता मानसिक रुप से प्रभावित होते हैं। अश्विन ने कहा "जैसे ही फाइनल खत्म हुआ, मैंने एक ट्वीट किया और मुझे यह एहसास हुआ की मुझे सफाई चाहिए। जैसे ही मुझे इस मामले पर सफाई मिल जाएगी मैं इसे भूल जाउंगा। अब मैं जिंदगी को बहतर तरीके से समझता हूं। जितना मैं इसे देखता हूं, मेरा परिवार उससे ज्यादा इसे झेलता है। मेरे पिता को दिल की बिमारी है। किसी भी दिन, किसी भी मैच में कुछ भी होता है, तो वह मुझे फोन करते हैं। वह परेशान होते हैं, मेरे लिए काफी आसान है कि मैं बाहर जाकर खेलूं क्योंकि यह मेरे नियंत्रण में है लेकिन, मेरे पिता के लिए नहीं और वह उसका दुगना झेलते हैं। अगर मैं इस नजरिए से देखूं तो बाकी सब मेरे लिए मायने नहीं रखते।"