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धोनी को लेकर आशीष नेहरा का बड़ा बयान, कहा- दिमाग पढ़ने के मामले में मास्टर हैं माही

Tue, 18 Aug 2020 05:47 AM IST
संजीव कुमार झा स्पोर्ट्स डेस्क , अमर उजाला
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Ashish Nehra and MS Dhoni - फोटो : PTI
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हाल ही में अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट को अलविदा कहने वाले पूर्व कप्तान महेंद्र सिंह धोनी की अगुवाई में 2011 में विश्व कप जीतने वाले भारतीय तेज गेंदबाज आशीष नेहरा का मानना है कि माही का सबसे बड़ा कौशल दूसरे के दिमाग को पढ़ने की शानदार क्षमता है जिसके कारण वह सबसे अच्छे व्यक्ति और प्रबंधकों में से एक बने और बदलाव के दौर में टीम को बहुत अच्छी तरह से संभाला था। 

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नेहरा ने कहा, आपको क्या लगता है, वह कभी भी आहत, अपमानित या क्रोधित नहीं हुए? लेकिन वह इसे छुपाना जानते थे। यह उनका दूसरा स्वभाव है। उनके मन में सभी वरिष्ठ खिलाड़ियों के लिए बेहद सम्मान था। उन्होंने सबको सम्मान दिया और इसलिए उन्हें सम्मान मिला। सभी संसाधनों से उपयोग लेना उनकी ताकत थी और सुरेश रैना, रविंद्र जडेजा जैसे खिलाड़ी बनाना उनके सबसे बड़े योगदानों में से एक रहा है।  
 
पहले ही मैच में प्रभावित  
नेहरा ने कहा, मैंने पहली बार 2004 में धोनी को पाकिस्तान जाने से पहले दलीप ट्रॉफी के फाइनल में पहली बार एमएस को गेंदबाजी की थी। उस समय मैं लगातार 140 किलोमीटर प्रतिघंटे की रफ्तार से गेंदबाजी कर रहा था और उनका एक शॉट गलत तरीके से लगने के बाद भी गेंद सीमा रेखा के पार छह रनों के लिए चली गई। उनकी ताकत ने मुझे चकित कर दिया था।
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विकेटकीपिंग में किया सुधार 
 बकौल आशीष, ‘अगर आप मुझे उनकी विकेटकीपिंग के बारे में पूछते हैं, तो वह निश्चित रूप से सैयद किरमानी, नयन मोंगिया या किरण मोरे के करीब नहीं थे। लेकिन समय के साथ, वह बेहतर होते गये और जब उन्होंने अपना कॅरिअर समाप्त किया, तो वह अपने दिमाग और फुर्ती के कारण सबसे तेज हाथों वाले कीपर बन गए थे।

गाॅसिप पसंद नहीं 
नेहरा बताते हैं कि जब धोनी 2004-05 सत्र में भारतीय ड्रेसिंग रूम में पहुंचे तो वह खुद तक सीमित रहने वाले व्यक्ति थे और गलती होने पर माफी मांग लेते थे। हम में से पांच (सचिन तेंदुलकर, हरभजन सिंह, युवराज सिंह, जैक (जहीर खान) और खुद मैं दौरे के दौरान ज्यादातर समय एक साथ रात का खाना खाते थे। मुझे याद नहीं है कि धोनी कभी हमारे साथ आए हो। वह खुद तक सीमित रहते थे। लेकिन आप कभी भी माही के कमरे में प्रवेश कर सकते हैं, लेकिन हां, वह कोई बाहरी गॉसिप या पीठ पीछे किसी की बुराई नहीं सुनना चाहते थे।

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