डेनली के आउट होने के बाद क्रीज पर उतरे बेन स्टोक्स ने जीवट खेल का प्रदर्शन करते हुए 50 गेंद का सामना किया और दो रन पर नाबाद हैं। पहली पारी में खाता खोले बगैर आउट होने वाले रूट ने 189 गेंद की नाबाद पारी में नौ चौके लगाए।
मैच में अब भी आस्ट्रेलिया का पलड़ा भारी है लेकिन इंग्लैंड की उम्मीदें रूट पर टिकी होंगी जिसे जीत के लिए 359 रन का मुश्किल लक्ष्य मिला है। ऑस्ट्रेलियाई टीम अगर इस मुकाबले को जीत जाती है तो पांच मैचों की श्रृंखला में उसे 2-0 की बढ़त मिल जाएगी और वे एशेज ट्रॉफी को अपने पास रखेंगे।
हेडिंग्ले के मैदान पर सिर्फ तीन बार किसी टीम का चौथी पारी में 300 से ज्यादा रन का लक्ष्य हासिल करने का रिकॉर्ड है। आस्ट्रेलिया (1948 में तीन विकेट पर 404), इंग्लैंड (2001 में चार विकेट पर 315 रन) और वेस्टइंडीज ने दो साल पहले पांच विकेट पर 322 रन बनाए थे।
इससे पहले मार्नस लाबुशेन (80) शतक बनाने से चूक गए लेकिन उनकी दमदार पारी की मदद से आस्ट्रेलिया ने दूसरी पारी में 246 रन बनाए। लाबुशेन ने पारी में भी 74 रन बनाये थे। श्रृंखला के दूसरे मुकाबले में स्थानापन्न खिलाड़ी के तौर पर दूसरी पारी में मैदान पर उतरने वाले लाबुशेन की यह लगातार तीसरी अर्द्धशतकीय पारी है।
आस्ट्रेलिया ने दिन की शुरुआत छह विकेट पर 171 रन से की जब लाबुशेन 53 रन और जेम्स पैटिनसन दो रन बनाकर खेल रहे थे। लाबुशेन ने दिन की शुरूआत स्टुअर्ट ब्रॉड की गेंद पर शानदार चौके के साथ की। इसके बाद हालांकि उन्हें भाग्य का साथ भी मिला जब विकेटकीपर बेयरस्टो ने उनका मुश्किल कैच छोड़ दिया। उन्हें इससे पहले 14 और 42 रन पर भी जीवनदान मिला था।
लाबुशेन और पैटिनसन की सातवें विकेट के लिए 51 रन की साझेदारी को जोफ्रा आर्चर ने तोड़ा। लाबुशेन जब 70 रन पर बल्लेबाजी कर रहे थे तब आर्चर की गेंद उनके हेलमेट में लगी लेकिन उन्होंने इसके बाद अपरकट से चौका लगाकर दवाब कम किया।
लाबुशेन की 80 रन की पारी का अंत रन आउट से हुआ। नाथन लायन (नौ) आउट होने वाले आखिरी बल्लेबाज रहे जो जोफ्रा आर्चर का शिकार बने। इंग्लैंड के लिए तीन विकेट लेने वाले बेन स्टोक्स सबसे सफल गेंदबाज रहे। आर्चर और ब्राड को दो-दो सफलता मिली।