बीसीसीआई सचिव अनुराग ठाकुर ने स्पष्ट किया कि दिल्ली एवं जिला क्रिकेट एसोसिएशन (डीडीसीए) के अंतर्गत फिरोजशाह कोटला मैदान में वर्ल्ड कप के मैच होंगे या नहीं इस पर फैसला 8 फरवरी को लिया जाएगा।
भारत और श्रीलंका के बीच 12 फरवरी को होने वाला टी-20 मैच भी कोटला मैदान में ही होना है। ऐसे में बीसीसीआई पर मैच के स्थान की जगह रांची किए जाने का भी दबाव है।
इतना ही नहीं वर्ल्ड कप टी-20 टूर्नामेंट (8 मार्च से 3 अप्रैल) के चार मैच दिल्ली में ही होने हैं। इसमें 30 मार्च को होने वाला सेमीफाइनल मैच भी है। ठाकुर ने कहा कि इस संबंध में बीसीसीआई की आईसीसी अधिकारियों के साथ बातचीत हो चुकी है, फैसला जल्द से जल्द लिया जाएगा।
उन्होंने कहा कि डीडीसीए के पास 8 फरवरी तक आखिरी मौका है। अगर वह तय तारीख तक कोर्ट के ऑर्डर की एनओसी (नॉ ऑबजेक्शन सर्टिफिकेट) ले लेता है तो मैचों का आयोजन पूर्व निर्धारित रुप से किया जाएगा।
सुप्रीम कोर्ट के रुख के बाद बीसीसीआई हुआ मजबूर
सुप्रीम कोर्ट के कड़े तेवरों के बाद बीसीसीआई को आखिर यह स्वीकार करना पड़ गया है कि उसके पास लोढ़ा कमेटी की सिफारशें लागू करने के अलावा कोई रास्ता नहीं बचा है।
खास बात यह है कि बोर्ड ने पहली बार सार्वजनिक रूप से इस सब के लिए पूर्व अध्यक्ष एन श्रीनिवासन को कहीं न कहीं जिम्मेदार ठहराया है। बोर्ड सचिव अनुराग ठाकुर ने शुक्रवार को टी-20 वर्ल्ड कप के लिए भारतीय टीम की चयन की घोषणा के दौरान साफ किया कि बोर्ड लोढ़ा कमेटी की सिफारशें लागू करने से बचने का रास्ता नहीं तलाश रहा है। साथ ही बोर्ड के सामने खड़़ी हुई वर्तमान परिस्थितियों के लिए काफी हद तक एन श्रीनिवासन जिम्मेदार हैं।
ठाकुर ने कहा जो गलतियां श्रीनिवासन के समय की गईं उनका खामियाजा बोर्ड को अब भुगतना पड़ रहा है। इससे न सिर्फ बीसीसीआई की छवि धूमिल हुई, बल्कि विश्वसनीयता को भी धक्का लगा है। श्रीनिवासन के कार्यकाल के दौरान लिए गए कुछ गलत निर्णयों के चलते बोर्ड की छवि खराब हुई। सभी जानते हैं कि किसने बोर्ड की छवि को नुकसान पहुंचाया है और कौन उसे वापस बहाल करने में लगा है। हालांकि पिछले नौ माह के दौरान बोर्ड की छवि को वापस बहाल करने के लिए काफी कदम उठाए गए हैं।
बोर्ड में है नाराजगी पर कुछ करने के विकल्प नहीं
मजबूरी बन गईं लोढ़ा कमेटी की सिफारशें लागू करने के चलते बोर्ड में जबरदस्त नाराजगी है, लेकिन उसके पास इससे बचने के विकल्प नहीं हैं। ठाकुर ने यहां तक कहा कि एक समय था जब 1983 की विश्व विजेता टीम को देने के लिए बोर्ड के पास कुछ नहीं था, लेकिन इन 30 सालों बीसीसीआई दुनिया का सशक्त बोर्ड बना है। यह सब अच्छे कामों से ही हुआ है।
बोर्ड ने संकेत दिए हैं कि सुप्रीम कोर्ट के कड़े तेवरों के बावजूद उसकी ओर से सिफारशों पर आने वाली आपत्तियों पर कानूनी लड़ाई को जारी रखा जाएगा। बोर्ड ने यह भी साफ किया है कि पूरी तरह से सिफारशें लागू नहीं की जाएंगी। तीन मार्च को होने वाली सुनवाई में इन्हें सुप्रीम कोर्ट के समक्ष रखा जाएगा। बावजूद इसके अदालत सभी सिफारशें लागू करने का आदेश देती है तब इसे कानूनी चुनौती दी जाएगी।
फरवरी के तीसरे सप्ताह में बुलाएंगे बैठक
अनुराग ठाकुर ने कहा है कि माह के तीसरे सप्ताह में बोर्ड विशेष आम सभा की बैठक बुलाएगा। इसमें कमेटी की सिफारशों और राज्य एसोसिएशनों की ओर से जताई गई आपत्तियों को रखा जाएगा। जिन पर आपत्ति है उन्हें तीन मार्च को सुप्रीम कोर्ट के समक्ष रखा जाएगा।