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एंडरसन को दोषमुक्त करने वाले जज ने दी अपनी 'सफाई'

Mon, 04 Aug 2014 05:13 PM IST
अमर उजाला, दिल्ली
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इंग्लैंड के तेज गेंदबाज जेम्स एंडरसन ने भारतीय ऑलराउंडर जडेजा के साथ हुए विवाद की सुनवाई के दौरान स्वीकार किया कि उन्होंने भारतीय खिलाड़ी के साथ गाली गलौज की और उन्हें दांत तोड़ने की धमकी दी थी।
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आईसीसी के न्यायिक आयुक्त गोर्डन लुईस के इंग्लिश और भारतीय खिलाड़ी को निर्दोष ठहराए जाने के बाद यह बात सामने आई है। यह तथ्य एंडरसन ने सुनवाई के दौरान स्वीकार भी किया था।

एक रिपोर्ट के अनुसार एंडरसन ने झगडे़ के दौरान जडेजा को दांत तोड़ने की धमकी भी दी थी। इस घटना के बाद भारतीय टीम ने एंडरसन के खिलाफ आईसीसी के लेवल तीन के तहत मामला दर्ज करवाया था।
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इस बीच न्यायिक आयुक्त गोर्डन लुईस ने भी कहा कि इंग्लिश गेंदबाज के खिलाफ पर्याप्त ठोस सबूत न होने कारण उन्हें निर्दोष करार दिया गया।

एंडरसन-जडेजा विवाद में खुलासा

रिपोर्ट के अनुसार एंडरसन ने सुनवाई के दौरान स्वीकार किया कि उन्होंने जडेजा को लगातार गालियां दी और उन्हें धक्का भी दिया। इस तरह उन्होंने खेल भावना का भी उल्लंघन किया।

यह बात बीसीसीआई के वकील ने भी मैच रेफरी डेविड बून के जडेजा पर लगाए गए 50 प्रतिशत मैच फीस के जुर्माने के खिलाफ अपील दायर करते हुए अपनी जिरह में कही थी लेवल तीन के नियम के उल्लंघन के मामले की निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार आईसीसी के वकील ने एंडरसन के मामले को पेश किया।

इस दौरान बीसीसीआई के वकील को एंडरसन से जिरह करने का मौका नहीं मिला लेकिन जडेजा के मामले की सुनवाई के दौरान उन्हें अपनी बात रखने का मौका दिया गया।

सुनवाई के दौरान उपस्थित प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार वहां तेज और आक्रामक जिरह हुई। बीसीसीआई के वकील ने जडेजा के खिलाफ एंडरसन की ओर से इस्तेमाल की गई अभद्र भाषा की बात रखी जिससे इंग्लिश खिलाड़ी चकित रह गया।
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न्यायिक आयुक्त ने दी 'सफाई'

तेज गेंदबाज जेम्स एंडरसन मामले की जांच के लिए आईसीसी द्वारा नियुक्त न्यायिक आयुक्त जोर्डन लेविस को इंग्लैंड के इस गेंदबाज को दोषमुक्त करार दिए जाने के फैसले पर हो रही आलोचना के बाद अपनी सफाई देनी पड़ी है।

जोर्डन ने कहा कि पर्याप्त सबूत नहीं होने के कारण इंग्लैंड के तेज गेंदबाज पर दोष साबित नहीं हो सका।

गोर्डन ने कहा कि जो भी गवाह थे वह अपनी टीम के लिए पक्षपात करते देखे गए। मामले में एकमात्र निष्पक्ष गवाह ट्रेंट ब्रिज स्टेडियम था जो बहुत कुछ देख ही नहीं सका। साथ ही मामले की ना तो कोई ऑडियो थी जिससे किसी तरह की गाली-गलौज को सुना जा सकता था और ना ही मैदान और ड्रेसिंग रूम के करीब हुई धक्का मुक्की का कोई वीडियो था जिससे किसी निष्कर्ष तक पहुंचा जा सके।
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