मैदान पर सटीक बल्लेबाजी के लिए मशहूर और खेल की गहरी समझ रखने वाले पूर्व क्रिकेटर व राजनेता नवजोत सिंह सिद्धू अमर उजाला संवाद में चर्चा करेंगे। अमर उजाला समूह उत्तर प्रदेश की राजधानी में संवाद उत्तर प्रदेश 2026 का आयोजन करने जा रहा है। दो दिवसीय इस आयोजन में 20 से अधिक सत्रों के दौरान 35 से अधिक अतिथि प्रदेश के विकास, मनोरंजन, अध्यात्म, खेल, राजनीति, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस समेत दर्जनों विषयों पर बात करेंगे। इस महामंथन से जो विचार और समाधान निकलेंगे, उनसे निश्चित रूप से प्रदेश के विकास के लिए एक नया दृष्टिकोण मिलेगा। यह आयोजन राजधानी के द सेंट्रम होटल में 18 व 19 मई को सुबह 9 बजे से होगा। सूबे के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ इसके मुख्य अतिथि होंगे।
अमर उजाला संवाद के मंच पर पूर्व भारतीय क्रिकेटर नवजोत सिंह सिद्धू भी नजर आएंगे। सिद्धू के साथ संवाद के दौरान ठहाके और कई दिलचस्प अनसुने किस्से जानने को मिलेंगे। सिद्धू बेबाक राय के लिए जाने जाते हैं।
आइए जानते हैं नवजोत सिंह सिद्धू का क्रिकेट और राजनीतिक करियर के बारे में...
सिद्धू का क्रिकेट करियर
नवजोत सिंह सिद्धू पंजाब की राजनीति और भारतीय क्रिकेट के सबसे चर्चित चेहरों में से एक हैं। 20 अक्तूबर 1963 को पटियाला में जन्मे सिद्धू की पहचान एक आक्रामक बल्लेबाज की रही। उन्होंने 1983 से 1999 तक भारत के लिए 51 टेस्ट और 136 वनडे मैच खेले। सिद्धू ने भारत के लिए 51 टेस्ट मैचों में 3202 रन बनाए और इस प्रारूप में उनका सर्वोच्च स्कोर 201 रन रहा। टेस्ट में सिद्धू ने नौ शतक और 15 अर्धशतक लगाए हैं। वहीं, 136 वनडे मैचों में सिद्धू ने 4413 रन बनाए जिसमें नाबाद 134 उनका सर्वोच्च स्कोर है। इस प्रारूप में उनके बल्ले से छह शतक और 33 अर्धशतक निकले हैं। प्रथम श्रेणी क्रिकेट की बात करें तो 157 मैचों में उनके नाम 9571 रन हैं। वहीं, लिस्ट ए क्रिकेट में 205 मैचों में सिद्धू ने 7186 रन बनाए हैं।
कमेंटेटर के रूप में की शुरुआत
सिद्धू ने 2001 में भारत के श्रीलंका दौरे से बतौर कमेंटेटर अपना करियर शूरू कर दिया। कमेंटेटर के तौर पर सिद्धू ने अपनी अलग पहचान बनाई और वो अपनी वन लाइनर्स के कारण फेमस हो गए।
राजनीतिक करियर
सिद्धू ने 2004 के लोकसभा चुनावों में भाजपा की तरफ से अमृतसर की सीट पर जीत हासिल की। 2014 के आम लोकसभा चुनावों में उन्हें अमृतसर की सीट तो नहीं मिली, लेकिन उन्होंने भाजपा के लिए प्रचार किया। 28 अप्रैल 2016 को उन्हें राज्यसभा का सदस्य मनोनीत किया गया, लेकिन कुछ समय बाद उन्होंने भाजपा से इस्तीफा दे दिया। सिद्धू कांग्रेस में शामिल हुए। हालांकि, कुछ समय बाद उन्होंने इस पार्टी से भी राहें जुदा कर ली। सिद्धू फिलहाल राजनीति में सक्रिय नहीं हैं।