गावस्कर यहीं नहीं रुके, उन्होंने टीम इंडिया के मैनेजमेंट पर भी भेदभाव का आरोप लगाया। इसके लिए उन्होंने रविचंद्रन अश्विन का उदाहरण दिया। उन्होंने कहा कि सिर्फ एक टेस्ट में अच्छा प्रदर्शन नहीं करने के चलते अश्विन को अगले मैच से बाहर कर दिया जाता है, जबकि स्थापित बल्लेबाजों के साथ ऐसा नहीं होता।
गावस्कर से पहले इतिहासकार और प्रशासकों की समिति के पूर्व सदस्य रामयंद्र गुहा ने भारतीय क्रिकेट में भाई भतीजावाद का आरोप लगाया था। उन्होंने पिछले महीने अंग्रेजी समाचार पत्र मिड डे को दिए एक इंटरव्यू में कहा था कि भारतीय क्रिकेट को बीसीसीआई के पूर्व अध्यक्ष अन श्रीनिवासन और गृह मंत्री अमिस शाह चला रहे हैं।
साथ ही उन्होंने यह भी कहा था कि राज्य क्रिकेट संघ को या तो किसी की बेटी या फिर बेटा चला रहा है। इसके अलावा उन्होंने और कई बातें कही थीं। तो ये हुई फिलहाल की बात। अब एक नजर डालते हैं पहले की घटनाओं पर जब टीम इंडिया में लगे पक्षपात व भेदभाव के आरोप...
जब धोनी पर लगा था भेदभाव करने आरोप
टीम इंडिया के पूर्व क्रिकेटर युवराज सिंह के पिता योगराज सिंह ने पूर्व भारतीय कप्तान महेंद्र सिंह धोनी पर अपने बेटे (युवराज) के साथ भेदभाव करने का आरोप लगाया था। उन्होंने यह भी कहा था कि कप्तान युवराज को बनना था, लेकिन धोनी बन गए।
गौतम गंभीर ने भी धोनी पर लगाया था पक्षपात का आरोप
टीम इंडिया के पूर्व सलामी बल्लेबाज गौतम गंभीर ने भी महेंद्र सिंह धोनी पर पक्षपात लगाया था। उन्होंने दो साल पहले एक निजी चैनल को दिए इंटरव्यू में सचिन, सहवाग और खुद को टीम से बाहर करने के निर्णय को पक्षपात पूर्ण बताया था।
जब हरभजन ने कहा था, खेल तो अच्छा रहा हूं पर चयनकर्ता ध्यान नहीं देते
टीम इंडिया के अनुभवि गेंदबाज हरभजन सिंह ने भी भारतीय टीम के चयनकर्ताओं पर पक्षपात करने का आरोप लगाया था। उन्होंने एक बार कहा था आईपीएल में अच्छा खेल रहा हूं लेकिन चयनकर्ता ध्यान नहीं देते हैं।
भारतीय क्रिकेट में भाई भतीजावाद चरम पर है- रामचंद्र गुहा
प्रशासकों की समिति (सीओए) के पूर्व सदस्य एवं इतिहासकार रामचंद्र गुहा ने भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड पर गंभीर आरोप लगाते हुए नवंबर 2020 में इस्तीफा दे दिया था। उन्होंने कहा कि भारतीय क्रिकेट में भाई भतीजावाद चरम पर है और यह चिंता का प्रमुख कारण है। उन्होंने यह भी कहा था कि टीम में सुपरस्टार कल्चर खत्म होना चाहिए। उन्होंने कहा कि भारतीय टीम के कप्तान को कुछ ज्यादा ही ताकत मिली हुई है।