अदालत ने अधिकारी को फटकार लगाते हुए कहा कि अगर मामला आपके क्षेत्र से बाहर का था, तो 'जीरो एफआईआर' दर्ज कर मामला संबंधित थाने को सौंपना चाहिए था, लेकिन आपने ऐसा कुछ नहीं किया। अदालत ने कहा कि अधिकारी ने अपने काम को सही ढंग से नहीं किया और न ही मामले को दर्ज करने की कोशिश की। इस वजह से ताराबाई और उनके बेटे को काफी कठिनाइयों का सामना करना पड़ा।
एसएचओ ने मानी अपनी गलती
अदालत ने कहा, पुलिस अधिकारी ने यह बात स्वीकार कर ली है कि ताराबाई उनके पास अपने बेटे की गुमशुदगी की बात लेकर आईं थी, लेकिन वह उनकी एफआईआर नहीं लिख सके। एसएचओ की लापरवाही के कारण उनको यह सजा दी गई। हालांकि, सरकारी वकील के निवेदन पर अदालत ने कोई कानूनी कार्रवाई नहीं की और एसएचओ ने भी ऐसी गलती दोबारा नहीं करने की बात भी अदालत के सामने लिखित रूप में कही है।