गंभीर और अगरकर
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अगरकर का करीब तीन साल का कार्यकाल नतीजों के लिहाज से बेहद सफल रहा। उनकी अध्यक्षता वाली चयन समिति के दौरान भारत ने तीन आईसीसी खिताब जीते। हालांकि, इस दौरान कई बड़े और संवेदनशील फैसलों को लेकर विवाद भी हुए। खासकर रोहित शर्मा के वनडे भविष्य, सेंटर ऑफ एक्सीलेंस के प्रमुख वीवीएस लक्ष्मण के साथ मतभेद और इंग्लैंड सीरीज की समीक्षा बैठक से अगरकर की गैरमौजूदगी ने उनके कार्यकाल के आखिरी दौर को मुश्किल बना दिया।
अगरकर की आखिरी चयन बैठक
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अगरकर के कार्यकाल में भारत ने कौन-कौन सी ट्रॉफियां जीतीं?
अगरकर जुलाई 2023 में मुख्य चयनकर्ता बने थे। इसके बाद उनकी चयन समिति के सामने सबसे बड़ी चुनौती भारत को आईसीसी ट्रॉफी दिलाने की थी। यह इंतजार 2024 में खत्म हुआ।
भारत ने रोहित शर्मा की कप्तानी में 2024 टी20 विश्व कप जीता। फाइनल में भारत ने दक्षिण अफ्रीका को हराकर 2007 के बाद दूसरी बार टी20 विश्व कप अपने नाम किया।
भारत ने 2025 चैंपियंस ट्रॉफी में भी खिताब जीता। इस तरह अगरकर की अध्यक्षता वाली चयन समिति के नेतृत्व में भारत ने लगातार दूसरा बड़ा आईसीसी खिताब हासिल किया।
भारत ने 2026 टी20 विश्व कप भी अपने नाम किया। इसके साथ ही भारतीय टीम लगातार दो टी20 विश्व कप जीतने वाली टीम बनी। अगरकर के कार्यकाल में यह तीसरा आईसीसी खिताब था।
अजीत अगरकर
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सिर्फ तीन आईसीसी ट्रॉफियां ही नहीं मिलीं, ये खिताब भी जीते
अगरकर के कार्यकाल की उपलब्धियों का दायरा सिर्फ आईसीसी टूर्नामेंट तक सीमित नहीं रहा। उनकी चयन समिति के दौरान भारत ने 2023 एशिया कप जीता। इसी साल हांगझोउ एशियन गेम्स में भारतीय पुरुष टीम ने टी20 क्रिकेट में स्वर्ण पदक हासिल किया। भारत ने 2025 एशिया कप भी जीता। इसके अलावा 2026 एशियाई खेलों में भी भारतीय पुरुष टीम ने स्वर्ण पदक अपने नाम किया। इस तरह अगरकर के दौर में भारत ने कई बड़े बहु-देशीय टूर्नामेंटों में सफलता हासिल की।
भारत बनाम ऑस्ट्रेलिया (वनडे विश्व कप 2023)
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2023 वनडे विश्व कप का फाइनल भी खेला
अगरकर के कार्यकाल की एक अहम उपलब्धि 2023 वनडे विश्व कप भी रही। भारत ने पूरे टूर्नामेंट में शानदार प्रदर्शन करते हुए फाइनल में जगह बनाई थी। हालांकि खिताबी मुकाबले में ऑस्ट्रेलिया ने भारत को हराया। यानी अगरकर की अध्यक्षता वाली चयन समिति द्वारा चुनी गई टीमों ने तीन साल में चार आईसीसी सफेद गेंद टूर्नामेंट के फाइनल में जगह बनाई और उनमें से तीन में खिताब जीता।
राहुल द्रविड़
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राहुल द्रविड़ के समय भी अगरकर चयन समिति में थे
अगरकर का कार्यकाल शुरू होने के समय राहुल द्रविड़ भारतीय टीम के मुख्य कोच थे। अगरकर को जुलाई 2023 में मुख्य चयनकर्ता बनाया गया। उस समय द्रविड़ टीम के मुख्य कोच थे और रोहित शर्मा कप्तान थे। 2023 वनडे विश्व कप की तैयारियों के दौरान अगरकर, द्रविड़ और रोहित के बीच टीम चयन और विश्व कप की रणनीति को लेकर चर्चा हुई थी। दोनों की जोड़ी ने 2024 टी20 विश्व कप में भी साथ काम किया। भारत की उस ऐतिहासिक जीत के बाद द्रविड़ ने अगरकर और उनकी चयन समिति के काम की सार्वजनिक तौर पर तारीफ की थी।
हालांकि, यह भी साफ होना चाहिए कि अगरकर द्रविड़ के पूरे कोचिंग कार्यकाल में चयनकर्ता नहीं थे। द्रविड़ नवंबर 2021 से जून 2024 तक मुख्य कोच रहे, जबकि अगरकर जुलाई 2023 में चयन समिति के अध्यक्ष बने। इसलिए दोनों ने करीब एक साल तक साथ काम किया।
रोहित शर्मा
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रोहित शर्मा के भविष्य को लेकर बढ़ा विवाद
अगरकर के कार्यकाल के अंतिम दौर में सबसे बड़ा विवाद रोहित शर्मा के वनडे भविष्य को लेकर सामने आया। रिपोर्ट के मुताबिक, इंग्लैंड के खिलाफ वनडे सीरीज से पहले चयन समिति, टीम प्रबंधन और बीसीसीआई के शीर्ष पदाधिकारियों के बीच यह फैसला हुआ था कि लॉर्ड्स में खेले जाने वाले वनडे के बाद रोहित के वनडे भविष्य को लेकर आगे बढ़ा जाए। यह संदेश रोहित तक पहुंचाने की जिम्मेदारी प्रज्ञान ओझा को दी गई थी।
रोहित 2027 वनडे विश्व कप खेलना चाहते थे और कथित तौर पर इस फैसले से खुश नहीं थे। इसके बाद उन्होंने एक प्रभावशाली बीसीसीआई पदाधिकारी से अपनी नाराजगी जाहिर की। मामला तब और पेचीदा हो गया, जब लॉर्ड्स वनडे के बाद बीसीसीआई ने रोहित के संन्यास की अटकलों को खारिज करते हुए सार्वजनिक बयान जारी किया। रिपोर्ट के मुताबिक, अगरकर को इस बयान की पहले से जानकारी नहीं थी और वह इससे नाराज थे।
रोहित-यशस्वी
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रोहित बनाम यशस्वी की भविष्य की योजना भी बनी मुद्दा
अगरकर का मानना था कि यदि भारत को 2027 वनडे विश्व कप के लिए यशस्वी जायसवाल को तैयार करना है तो उन्हें पर्याप्त वनडे मैच खेलने का मौका देना होगा। दूसरी तरफ, रोहित के पक्ष में यह तर्क था कि वह अभी भी वनडे क्रिकेट में प्रभावी प्रदर्शन कर रहे थे। यही अंतर धीरे-धीरे चयन समिति और बीसीसीआई के बीच मतभेद का कारण बन गया। रिपोर्टों के अनुसार, बीसीसीआई रोहित के भविष्य पर फैसला जल्दबाजी में नहीं लेना चाहता था, जबकि अगरकर चयन के नजरिए से भविष्य की तैयारी को प्राथमिकता दे रहे थे।
वीवीएस लक्ष्मण
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वीवीएस लक्ष्मण से भी बढ़े मतभेद
अगरकर और भारतीय टीम के पूर्व साथी वीवीएस लक्ष्मण के बीच भी कई नीतिगत मुद्दों पर मतभेद बढ़ने की बात सामने आई। लक्ष्मण इस समय बीसीसीआई के सेंटर ऑफ एक्सीलेंस के प्रमुख हैं। दोनों के बीच चोटिल खिलाड़ियों के प्रबंधन, उनकी वापसी की समयसीमा और इंडिया-ए के कार्यक्रम को लेकर मतभेद बताए गए।
इंडिया-ए के मैचों का कार्यक्रम घरेलू टूर्नामेंटों और सीनियर टीम की सीरीज से टकराने लगा था। सितंबर-अक्टूबर में पुडुचेरी में होने वाले इंडिया-ए टेस्ट और ईरानी कप के कार्यक्रम में टकराव हुआ। वहीं न्यूजीलैंड-ए के खिलाफ प्रस्तावित मैचों का कार्यक्रम भी भारत की सफेद गेंद वाली सीरीज से टकरा रहा था।
श्रेयस अय्यर
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एशयिन गेम्स की टीम को लेकर भी मतभेद
अगरकर को इस बात पर भी आपत्ति थी कि एशियन गेम्स जैसे आयोजन के लिए भारत को अपनी पहली पसंद के खिलाड़ियों को उतारने की जरूरत क्यों है। 2023 हांगझोउ एशियन गेम्स में भारत ने दूसरी श्रेणी की टीम भेजी थी क्योंकि मुख्य टीम वनडे विश्व कप की तैयारी में व्यस्त थी। लेकिन बाद में भारत की टीम में प्रमुख खिलाड़ियों की गैरमौजूदगी को लेकर सवाल उठे। यह मामला चयन समिति और सेंटर ऑफ एक्सीलेंस के बीच प्राथमिकताओं के अंतर का एक उदाहरण बना।
चोटिल खिलाड़ियों की वापसी और मेडिकल अपडेट भी विवाद का कारण
केंद्रीय अनुबंध वाले चोटिल खिलाड़ियों की वापसी को लेकर स्पष्ट समयसीमा नहीं होने से भी चयन समिति और सेंटर ऑफ एक्सीलेंस के बीच सवाल उठे। मीडिया में प्रमुख खिलाड़ियों की चोटों से जुड़ी विस्तृत जानकारी सामने आने के बाद दोनों पक्षों के बीच भरोसे को लेकर भी सवाल खड़े हुए। रिपोर्ट के मुताबिक, लक्ष्मण इस बात से नाराज थे कि सेंटर ऑफ एक्सीलेंस को उन मामलों के लिए भी आलोचना झेलनी पड़ रही थी जो पूरी तरह उसके नियंत्रण में नहीं थे।
गंभीर और अगरकर
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इंग्लैंड सीरीज की समीक्षा बैठक बनी आखिरी कड़ी
अगरकर के कार्यकाल के अंत में सबसे बड़ा घटनाक्रम इंग्लैंड दौरे के बाद हुई समीक्षा बैठक थी। इंग्लैंड के खिलाफ भारत के निराशाजनक प्रदर्शन के बाद मुंबई में बीसीसीआई ने अहम समीक्षा बैठक बुलाई। बैठक में कप्तान शुभमन गिल, टी20 कप्तान श्रेयस अय्यर, मुख्य कोच गौतम गंभीर और वीवीएस लक्ष्मण समेत कई प्रमुख अधिकारी मौजूद थे। लेकिन अगरकर बैठक में न तो व्यक्तिगत रूप से पहुंचे और न ही ऑनलाइन जुड़े। उन्होंने व्यक्तिगत व्यस्तताओं का हवाला दिया था।
बीसीसीआई सचिव देवजीत सैकिया ने अगरकर का बचाव करते हुए कहा कि बैठक कम समय के नोटिस पर बुलाई गई थी। लेकिन बोर्ड के एक वर्ग का मानना था कि इतनी महत्वपूर्ण बैठक में चयन समिति के अध्यक्ष की मौजूदगी जरूरी थी। रिपोर्टों के मुताबिक, यही घटनाक्रम अगरकर और बीसीसीआई के रिश्तों में अंतिम बड़ी दरार साबित हुआ।
गंभीर-अगरकर
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फिर अगरकर का कार्यकाल क्यों नहीं बढ़ा?
यहां एक महत्वपूर्ण बात यह है कि रिपोर्टों के अनुसार अगरकर को सीधे तौर पर बीसीसीआई ने बर्खास्त नहीं किया। उन्होंने खुद अपने कार्यकाल का विस्तार नहीं मांगने की जानकारी बोर्ड को दी थी। चार अक्तूबर को उनका कार्यकाल समाप्त हुआ और इसके बाद बीसीसीआई ने नए चयनकर्ता के लिए आवेदन मंगाने शुरू कर दिए।