महेंद्र सिंह धोनी के बाद टीम इंडिया का अगला कप्तान कौन होगा इस पर सभी की नजर बनी हुई है। हालांकि आज की तारीख में देखा जाए तो विराट कोहली पहली पसंद नजर आते हैं। कोहली इस समय भारत की टेस्ट टीम के कप्तान भी हैं।
लेकिन कोहली पिछले कुछ समय से मैदान के बाहर जिस तरह अपने बयान के कारण लगातार चर्चा में रहे इससे बीसीसीआई परेशान हो गया। भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड की इच्छा यही रही है कि टीम इंडिया की कमान एक ऐसा क्रिकेटर संभाले जो किसी भी तरह से विवाद से दूर रहे और टीम का नेतृत्व भी ठीक ढंग से कर सके।
टीम इंडिया के कप्तान फिलहाल विवादों से दूर रहते रहे हैं लेकिन कोहली की आक्रामकता को देखकर ऐसा लग रहा था कि टीम को अगला कप्तान विनम्र स्वभाव के बजाए उग्र स्वभाव वाला मिल सकता है। कोहली ने अपने व्यवहार से यह साबित भी किया है कि वह धोनी की तरह 'कैप्टन कूल' नहीं रहने वाले हैं।
कोहली के उग्र स्वभाव को देखते हुए बीसीसीआई ने अपने स्तर से अन्य खिलाड़ियों पर दांव चलने लगी। उसका दांव इसलिए भी था कि इसके चलते वह कोहली पर रोक लगाए साथ ही किसी 'कूल कैप्टन' को ही टीम की कमान सौंपी जाए जिससे टीम और बोर्ड को कप्तान के कारण शर्मसार न होना पड़े।
शायद यही कारण है कि बीसीसीआई ने जिम्बाब्वे दौरे के लिए 7 बड़े खिलाड़ियों के छुट्टी पर जाने के कारण अजिंक्य रहाणे को अचानक कप्तान बनाकर सभी को चौंका दिया। रहाणे बोर्ड की योजना पर खरे भी उतरे लेकिन वह दौरे के अंतिम मैच में एक कारण से मौका भूनाने से चूक गए।
जानिए, कोहली से कैसे पीछे रह गए रहाणे
अगर सब कुछ सही रहा तो महेंद्र सिंह धोनी के बाद टीम इंडिया के पूर्णकालिक कप्तान विराट कोहली ही बनेंगे। लेकिन कोहली के अनावश्यक उड़ान को देखते हुए बीसीसीआई ने अजिंक्य रहाणे को कप्तान के रूप में मैदान में उतार दिया।
कुछ दिन पहले तक धोनी के बाद कोहली ही अगले कप्तान के रूप में एकमात्र दावेदार नजर आते थे लेकिन आज की तारीख में इस रेस में तीन बड़े नाम शामिल हो गए हैं। कोहली के अलावा रोहित शर्मा और अजिंक्य रहाणे। कोहली को छोड़ बाकी दोनों मराठी क्रिकेटर हैं और मुख्य चयनकर्ता संदीप पाटिल भी मराठी ही हैं।
वनडे में दो दोहरा शतक लगाने वाले रोहित शर्मा ने आईपीएल में मुंबई इंडियंस ने जो सफलता हासिल की है उससे वह भी कप्तानी की रेस में आगे आ गए हैं। तीन साल में वह दो बार मुंबई को आईपीएल चैंपियन बनवा चुके हैं। क्रिकेट के तीनों प्रारूपों में भी वह अब खेलने लगे हैं, लेकिन टरीम इंडिया की अगुवाई का मौका नहीं मिला है अब तक।
खैर, बात उसकी जो रहाणे ने बीसीसीआई की योजना पर पानी डाल दिया। रहाणे की अगुवाई ने टीम इंडिया ने जिम्बाब्वे का दौरा किया और लगातार तीन मैच जीतकर वनडे सीरीज में क्लीन स्वीप कर डाला। इसके बाद सभी को यह उम्मीद थी कि वह दो मैचों की टी-20 सीरीज में भी मेजबान टीम का सूपड़ा साफ करेंगे लेकिन अंतिम मैच हारकर यह सपना अधूरा ही रह गया।
अगर रहाणे की टीम यह मैच जीत जाती तो जिम्बाब्वे दौरे के सभी पांचों मैच जीतने के पिछले रिकॉर्ड को
बनाए रख सकती थी। दिलचस्प यह है 2013 में हुए पिछले जिम्बाब्वे दौरे में टीम की कमान विराट कोहली के हाथों में थी और उस समय भी टीम काफी युवा थी। कोहली की टीम ने तब गजब का खेल दिखाया और सभी पांचों मैच जीतकर क्लीन स्वीप कर लिया।
इस तरह से कोहली की टीम जिम्बाब्वे से सारे मैच जीतकर वापस लौटी, वहीं रहाणे की टीम 5 में से 4 में ही जीत हासिल कर सकी। अंतिम मैच जो टी-20 का था उसमें 10 रन से हार गई। भारत पहली बार जिम्बाब्वे से टी-20 में हारा। कोहली ने 2013 में जो 5 मैचों की जो सीरीज क्लीन स्वीप की थी वह वनडे इतिहास में विदेशी धरती पर भारत की सबसे बड़ी क्लीन स्वीप था।
बीसीसीआई की नई योजना पर रहाणे सही चल रहे थे और शुरुआती 4 मैच जीतकर काफी आगे बढ़ गए थे लेकिन अंतिम मैच में हार ने उन्हें कोहली को पीछे छोड़ने को कौन कहे उनके रिकॉर्ड की बराबरी भी नहीं कर सके।
ऐसे में कोहली ही कप्तानी की रेस में सबसे आगे नजर आते हैं, बस उन्हें अपनी जुबान और स्वभाव में बदलाव लाना होगा।