राहुल त्रिपाठी (पुरानी तस्वीर); अभिषेक शर्मा अपने पिता राज कुमार शर्मा के साथ
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अभिषेक शर्मा मौजूदा समय में सबसे ज्यादा चर्चा में हैं। एशिया कप में उनकी ताबड़तोड़ पारियों ने भारत को खिताब जीतने में मदद की। उन्होंने पाकिस्तानी गेंदबाजों की धज्जियां उड़ा कर रख दीं। शुभमन गिल ने बतौर ओपनर उनका बखूबी साथ दिया। फिलहाल अभिषेक पंजाब में अपने घर पर हैं और बहन की शादी में हाथ बंटा रहे हैं। हाल ही में वह एक पॉडकास्ट शो में शामिल हुए।
अभिषेक शर्मा अपने परिवार के साथ
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अभिषेक ने सुनाई मजेदार कहानी
गौरव कपूर के साथ इस इंटरव्यू में उन्होंने कई मजेदार कहानियां सुनाईं। इस दौरान उन्होंने अपने पिता के त्याग को लेकर भी बातें कहीं। अभिषेक ने कहा कि उनकी कामयाबी में उनके पिता का बहुत योगदान है। इतना ही नहीं उन्होंने यह भी बताया कि उनके पिता बहुत सख्त कोच थे और गलतियां बर्दाश्त नहीं करते थे। इसको लेकर उन्होंने एक मजेदार किस्सा सुनाया। आइए जानते हैं...
अभिषेक शर्मा
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'डैड के साथ कार में बैठने में डर लगता था'
अभिषेक ने बताया कि जब तक कोई युवा क्रिकेटर अंडर-19 क्रिकेट न खेल ले, तब तक उसे कोई न कोई प्रेरित करता रहे, ताकि वह हिम्मत न हारे। अभिषेक ने बताया कि उन्हें उनके पिता ने खेलने को लेकर काफी प्रेरित किया। अभिषेक ने कहा, 'आपको अंडर-19 तक कोई पुश करने वाला होना चाहिए। मेरे लिए वो मेरे डैड रहे। वो अलग तरह के कोच थे। वो हमेशा सख्ती से पेश आते थे, इतना कि मैं डर जाता था कभी कभी। मैं अगर डिस्ट्रिक्ट मैच या फिर कोई टूर्नामेंट का मैच हो, उसमें लिफ्ट मार के 30-40 या 50-60 पर आउट होता था तो मैं उनके सामने नहीं जाता था। वो अगर कार ड्राइव कर रहे हैं तो मैं उनके साथ आगे नहीं बैठ सकता था। ऐसी जगह बैठता था जहां उनके हाथ न पहुंचें।'
राहुल त्रिपाठी
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'पापा ने एक बार राहुल त्रिपाठी को पकड़ लिया...'
अभिषेक ने बताया, 'वो बोलते थे ये क्या करके आउट हो जाता है। मुझे होता था कि पड़ जाएगी (थप्पड़)। कभी कभी पड़ भी जाती थी। पापा बाकी खिलाड़ियों को भी कभी-कभी कोचिंग देते थे। पापा एक बार राहुल त्रिपाठी को सुना बैठे। उन्होंने राहुल त्रिपाठी को पकड़ लिया। त्रिपाठी से कहा तू बार-बार पीछे की तरफ क्या शॉट मारता (स्कूप शॉट) रहता है। तेरे पास इतनी अच्छे शॉट्स हैं आगे खेलने के लिए। और आप सोचिए पापा और त्रिपाठी के बीच वह पहली मुलाकात थी। अभी उनको थोड़ा लैंग्वेज बैरियर है। इसलिए वो गोरों को नहीं समझाते। वो तो मुझे डर लगता है कि वो तो आपको पता गोरे तो अपना इंजॉय करते हैं। मैच के बाद अपना बैठ जाते हैं तो उनको कोई क्रिकेट की बात करनी भी नहीं होती। तो बस मैंने कहा चलो ठीक है ये उनकी तकनीक है। इंडियन को बोलो, इंडियन सबको समझाया मैंने।'