कोलंबो टेस्ट जीतकर सीरीज को बराबरी पर लाने के बाद अब टीम इंडिया की नजर तीसरे टेस्ट में जीत के साथ सीरीज पर कब्जा जमाने पर होगी।
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भारत गाले में खेले गए पहले टेस्ट में जीत के बेहद करीब पहुंच गया था लेकिन पांचवें दिन टीम को अप्रत्याशित रूप से हार का मुंह देखना पड़ गया। अगर भारत गाले टेस्ट जीत जाता तो विराट कोहली की अगुवाई में टीम इंडिया 22 साल बाद श्रीलंका में पहली टेस्ट सीरीज अपने नाम कर लेती, लेकिन ऐसा हो नहीं पाया।
निर्णायक मैच शुरू होने से पहले टीम इंडिया लगातार चोटों से परेशान हैं। चोट के कारण भारत इस दौरे में खासा परेशान रहा है खासकर अपने शीर्ष क्रम के बल्लेबाजों के चोटिल होने से। ओपनर शिखर धवन के बाद मुरली विजय चोट के कारण सीरीज से बाहर हो गए हैं। मुरली पहले टेस्ट में भी चोट के कारण खेल नहीं सके थे।
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ऐसे में कोलंबो के सिंघली स्पोटर्स क्लब में 28 अगस्त से शुरू हो रहे निर्णायक टेस्ट से पहले भारत का शीर्ष क्रम चोटों से त्रस्त है तो उसे अपने उन 5 धारदार खिलाड़ियों के भरोसे रहना होगा जो यहां पर दो दशक के लंबे इंतजार को खत्म कर सके। जानते हैं उन पर टीम के 5 ट्रंप कार्ड खिलाड़ियों के बारे में।
तीसरे मैच में भी नए जोड़ीदार के साथ जलवा दिखाने का मौका
शुरुआत शीर्ष क्रम से करते हैं। युवा बल्लेबाज और ओपनर लोकेश राहुल जिन्होंने पहले टेस्ट की दोनों पारियों में नाकामी के बाद दूसरे टेस्ट की पहली पारी में शतक ठोंका था। लोकेश ही ऐसे बल्लेबाज हैं पिछले दोनों मैचों मे ओपनिंग के लिए अलग-अलग बल्लेबाजों शिखर धवन और मुरली विजय के साथ उतरे थे।
अब तीसरे मैच में वह फिर एक नए जोड़ीदार के साथ ओपनिंग करेंगे क्योंकि धवन और विजय दोनों ही चोट के कारण सीरीज के बाहर हो गए हैं। सीरीज में उनके नाम एक शतक है और वह श्रीलंकाई गेंदबाजों का बखूबी सामना कर चुके हैं।
तीसरे मैच में वह चेतेश्वर पुजारा या नमन ओझा किसी एक के साथ ओपनिंग कर सकते हैं। पुजारा टीम के साथ श्रीलंका में बने हुए हैं लेकिन उन्हें अभी तक खेलने का मौका नहीं मिला जबकि ओझा अभी-अभी श्रीलंका पहुंचे हैं। ऐसे में लोकेश के पास काफी दबाव होगा और टीम में अपनी जगह पक्की करने का यह शानदार मौका है। सीरीज में वह 30.50 की औसत से 122 रन बना चुके हैं।
मध्य क्रम में कप्तान कोहली और रहाणे पर होगा भारी दबाव
टीम के शीर्ष क्रम के 2 बड़े बल्लेबाजों के चोटिल होने से इस बार मध्य क्रम पर काफी दारोमदार होगा, खासकर कप्तान विराट कोहली पर। कोहली चौथे नंबर पर बल्लेबाजी करने आते हैं और पिछले दोनों मैचों की पहली पारी में तीसरे विकेट के लिए 160 से ज्यादा की साझेदारी कर चुके हैं। सीरीज से पहले वह आउट ऑफ फॉर्म थे लेकिन सीरीज में उनका बल्ला चल निकला।
दो मैचों में उनके बल्ले से 194 रन निकल चुके हैं। पहले मैच में उन्होंने 126 रनों की पारी खेलते हुए शतक लगाया था फिर दूसरे मैच में अर्धशतकीय पारी खेली थी। उनके फॉर्म को देखते हुए उनका इस मैच में चलना जरूरी होगा। वह टीम के रन मशीन हैं और उनकी एक बड़ी पारी टीम को अच्छी पोजिशन में पहुंचा सकते हैं।
कप्तान कोहली के अलावा मध्य क्रम के ही एक और बल्लेबाज अजिंक्य रहाणे भी टीम के बड़े ट्रंप कार्ड साबित हो सकते हैं। पहले टेस्ट में वह नाकाम रहे। दूसरे टेस्ट में उन्हें तीसरे नंबर पर बल्लेबाजी को भेजा गया तो पहली पारी में वह फेल हो गए लेकिन दूसरी पारी में शतक ही ठोंक दिया। रहाणे टीम के संकटमोचक बल्लेबाज हैं और वह टीम के बड़े खेवनहार बन सकते हैं। रहाणे ने सीरीज में 166 रन बनाए हैं।
7 साल के लंबे संघर्ष को फिर भुनाया तो टीम को होगा फायदा
लेग स्पिनर अमित मिश्रा विराट कोहली की कप्तानी में फिर से टीम का हिस्सा बन गए हैं। सीरीज के दोनों मैचों में उन्होंने बढ़िया गेंदबाजी की है।
अमित मिश्रा ने 2008 को मोहाली में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ अपने टेस्ट करियर की शुरुआत की थी लेकिन उन्हें ज्यादा मौके नहीं मिले और यही कारण है कि इन 7 सालों में वह सिर्फ 15 टेस्ट मैच ही खेल सके।
अमित ने श्रीलंका के खिलाफ टेस्ट सीरीज के लिए फिर से मिले मौकों को भुनाया और 2 मैचों में कुल 12 विकेट निकाल लिए। दूसरे मैच के दूसरे दिन उन्होंने अपने करियर में 50वां टेस्ट विकेट हासिल कर विकेटों की पहली फिफ्टी भी लगा दी। कोलंबो टेस्ट की पहली पारी में उन्होंने 4 विकेट निकाले जो उनके करियर का दूसरा सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन भी है।
वह मैदान पर आर अश्विन का बढ़िया साथ दे रहे हैं और मेजबान टीम पर दबाव बनाने में कामयाब भी रहे हैं। ऐसे में इस फिरकी गेंदबाज का चलना टीम इंडिया के लिए बड़ी सौगात से कम नहीं होगी।
सीरीज के लगातार तीसरे मैच में लगाया पंजा तो टीम का काम होगा आसान
फिरकी गेंदबाज रविचंद्रन अश्विन के लिए विदेशी सरजमीं पर गेंदबाजी करना कभी आसान नहीं रहा लेकिन श्रीलंकाई दौरे पर उन्होंने जिस प्रकार गेंदबाजी की है इससे साबित हो गया है कि वह विदेशों में भी विकेट झटकने में माहिर हैं। श्रीलंकाई दौरे पर ऑफ स्पिनर अश्विन भारतीय टेस्ट टीम के कप्तान विराट कोहली के ट्रंप कार्ड भी साबित हो रहे हैं।
मेजबान टीम के साथ जारी 3 टेस्ट मैचों की सीरीज के पहले 2 टेस्ट में बतौर गेंदबाज अश्विन का प्रदर्शन सराहनीय रहा है। कोलंबो टेस्ट में भारत की श्रीलंका के खिलाफ रनों के लिहाज से सबसे बड़ी जीत दर्ज करने में अश्विन की भूमिका महत्वपूर्ण रही।
उन्होंने कोलंबो टेस्ट की दूसरी पारी में 42 रन खर्च कर 5 विकेट झटके। इस दौरान उन्होंने बेहद खास रिकॉर्ड भी अपने नाम किया। अश्विन श्रीलंका के खिलाफ उसी की सरजमीं पर किसी एक टेस्ट सीरीज में सबसे अधिक विकेट चटकाने वाले पहले भारतीय बन गए हैं। अश्विन मौजूदा सीरीज में अब तक 3.19 की इकोनोमी रेट से कुल 17 विकेट झटक चुके हैं। इससे पहले, यह रिकॉर्ड भारत के अनुभवी ऑफ स्पिन गेंदबाज हरभजन सिंह के नाम था। टर्बनेटर के नाम से मशहूर हरभजन ने जुलाई, 2008 में टेस्ट सीरीज में 16 विकेट झटके थे।
साथ ही 12 बार पांच या उससे ज्यादा विकेट लिए हैं एक पारी में अश्विन ने। किसी भारतीय गेंदबाज का पहले 27 टेस्ट मैचों में यह एक रिकॉर्ड प्रदर्शन भी है।
अश्विन महेंद्र सिंह धोनी की तरह कोहली की टीम के भी ट्रंप कार्ड बन गए हैं और भारत को इस पड़ोसी देश में 22 साल बाद टेस्ट सीरीज जीतनी है तो उनका चलना जरूरी होगा। वह सीरीज के दोनों मैच में 5 या उससे ज्यादा विकेट लेने का कारनामा कर चुके हैं।