मेलबर्न वन-डे में जीत के साथ ही भारत ने ऑस्ट्रेलिया में इतिहास रच दिया। वैसे तो 230 रन के जवाब में भारत को यह जीत आखिरी ओवर में नसीब हुई, लेकिन ऑस्ट्रेलिया 29वें ओवर में ही यह मैच हार चुका था। आखिर क्या है पूरा मामला, देखिए अगली स्लाइड...
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दरअसल, तीसरे वन-डे में भारतीय टीम की जीत की कहानी एमएस धोनी के बल्ले से निकली। उन्होंने आखिरी तक नाबाद रहते हुए टीम इंडिया को मैच और सीरीज में जीत दिलाई। वैसे जब शुरू में बल्लेबाजी के लिए एमएस धोनी आए थे तब वह काफी जूझते दिखे। उनके कई कैच छूटे तो कई बार वह रन आउट होने से बचे।
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इसी बीच 29वें ओवर में एक ऐसी घटना घटी जिससे टीम इंडिया की जीत में खलल पड़ सकती थी, इसे सुनहरे अवसर को गंवाते ही ऑस्ट्रेलिया मैच से बाहर हो गया। यह ओवर पीटर सिडल लेकर आए। उनकी एक गेंद सीधे धोनी के पैड पर लगी जोरदार अपील हुई। अंपायर ने उन्हें नॉट आउट करार दिया जिसके बाद ऑस्ट्रेलिया ने रीव्य लिया। फैसला धोनी के पक्ष में आया।
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इस फैसले से ऑस्ट्रेलियाई खिलाड़ी खासे निराश दिखे। अगली गेंद पर धोनी ने फिर से बड़ा शॉट लगाने की कोशिश की और गेंद बल्ले का बाहरी किनारा लेते हुए सीधे विकेटकीपर एलेक्स कैरी के दस्तानों में समा गई, यहीं ऑस्ट्रेलिया से सबसे बड़ी चूक हो गई। कैरी समेत किसी भी कंगारू खिलाड़ी ने कोई अपील नहीं की।
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शायद उन्हें बाहरी किनारे की आवाज ही सुनाई नहीं दी। वैसे मैक्सवेल थोड़े उत्साहित जरूर दिखे थे, लेकिन उनको किसी ने गंभीरता से नहीं लिया और इस तरह से न अपील हुई और न ही अंपायर ने धोनी को आउट दिया।
गौर करने वाली बात है कि धोनी उस वक्त 34 रन बनाकर खेल रहे थे। वैसे अगले ओवर में कोहली तो 46 रन बनाकर आउट हो गए, लेकिन धोनी ने उस जीवनदान का जमकर फायदा उठाया और चौथे विकेट के लिए केदार जाधव के साथ मिलकर सभी परेशानियों को पछाड़ते हुए अपनी टीम को जीत दिलवा दी।
यह जीत इसलिए भी बड़ी है क्योंकि यह टीम इंडिया की ऑस्ट्रेलिया की सरजमीं पर पहली द्विपक्षीय वन-डे सीरीज में जीत है।