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उधार की शैंपेन से टीम इंडिया ने मनाया 1983 विश्व कप जीत का जश्न, रात में खाना तक नहीं हुआ था नसीब

Mon, 25 Jun 2018 05:57 PM IST
अंशुल तलमले, स्पोर्ट्स डेस्क, नई दिल्ली
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25 जून 1983 यह वह दिन था, जिसने भारतीय क्रिकेट की दशा-दिशा बदल दी। आज ही के दिन ठीक 35 साल पहले भारतीय क्रिकेट ने अपना पहला विश्व कप जीत इतिहास रच दिया था। किसी ने सपने में भी नहीं सोचा था कि कपिल देव की अगुवाई वाली यह टीम लगातार 2 विश्व कप जीत चुकी खूंखार वेस्टइंडीज को हरा पाएगी। इंग्लैंड में हुए इस विश्व कप ने भारतीय क्रिकेट की दशा-दिशा बदल दी।
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आज उस ऐतिहासिक घटना को पूरे 35 साल बीत चुके हैं। इंग्लैंड में हुए उस विश्व कप में फाइनल तक का सफर तय कर टीम इंडिया ने पहले ही विश्व क्रिकेट को चौंका दिया था। खिताबी मुकाबला मजबूत वेस्टइंडीज से था। जानलेवा तेज गेंदबाजों और जबरदस्त बल्लेबाजों से भरी उस टीम की कप्तानी महान बल्लेबाज क्लाइव लॉयड कर रहे थे।
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वेस्टइंडीज 1975 और 1979 का विश्व कप जीतते हुए विजयी रथ पर सवार थी। फैंस से लेकर दुनिया भर के तमाम एक्सपर्ट्स भी कैरेबियाई टीम के आगे भारतीय दल को हल्का आंक रहे थे। पहले बल्लेबाजी करते हुए 'क्रिकेट का मक्का' कहलाए जाने वाले लॉर्ड्स में इस फाइनल मुकाबले को लेकर सारी तैयारियां की जा चुकी थी। वेस्टइंडीज ने टॉस जीतकर टीम इंडिया को पहले बल्लेबाजी के लिए बुलाया।

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एंडी रॉबर्ट्स, जोएल गार्नर, मैल्कम मार्शल, माइकल होल्डिंग जैसे खूंखार तेज गेंदबाजों के सामने पूरी भारतीय टीम महज 183 रन पर सिमट गई। मैदान पर मौजूद भारतीय फैंस वापस लौटने लगे थे। खुद कपिल देव की पत्नी तक अपने होटल लौट गई। मगर आज भारतीय क्रिकेट टीम इतिहास रचने के इरादे से मैदान पर उतरी थी।
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न जाने ड्रेसिंग रूम में कप्तान कपिल देव ने अपने खिलाड़ियों के कान में ऐसा कौन सा मंत्र फूंका कि गेंदबाजों ने कमाल दिखाते हुए वेस्टइंडीज को 140 रन पर ही समेट दिया। क्लाइव लॉयड, विवियन रिचर्ड्स, डेसमंड हेन्स जैसे दिग्गज बल्लेबाजों से लैस वेस्टइंडीज की टीम के 7 खिलाड़ी दहाई के आंकड़े तक नहीं पहुंच सके थे।
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उस ऐतिहासिक जीत के बाद टीम इंडिया ने अपने ड्रेसिंग रूम में जमकर जश्न मनाया था, चलिए आपसे भी उससे जुड़ी कुछ मजेदार यादों को शेयर करते हैं। इंडिया टूडे से बात करते हुए उस विश्व विजेता टीम के सदस्य और तेज गेंदबाज रहे मदन लाल ने बताया कि कैसे उन्होंने उधार की शैंपेन से उस रात जश्न मनाया था।
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बकौल मदन लाल, 'कपिल वर्ल्ड कप फाइनल जीतने के बाद वेस्टइंडीज के ड्रेसिंग रूम में सभी खिलाड़ियों से हाथ मिलाने पहुंचे। उस कमरे में सन्नाटा पसरा हुआ था। उन्हें वहां शैम्पेन की बोतलें दिखाई दे रही थीं। भारत को 183 में समेटने के बाद वेस्टइंडीज ने अपनी जीत सुनिश्चित मानते हुए ढेर सारी शैम्पेन मंगवा ली थी। जो उनकी हार के बाद किसी काम की नहीं थी।

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कपिल देव ने लॉयड से पूछा, 'क्या मैं शैम्पेन की कुछ बोतलें ले जा सकता हूं? हमने एक भी नहीं मंगवाई है'। क्लाइव ने कपिल को बस इशारा भर किया और जाकर एक कोने में बैठ गए। कपिल और मोहिंदर अमरनाथ ने बोतलें उठाईं और टीम इंडिया ने पूरी रात जश्न मनाया।

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जश्न में डूबे भारतीय खिलाड़ियों को हालांकि उस रात खाना नसीब नहीं हुआ था। दरअसल, किचन रात 9 बजे बंद हो जाते थे। जश्न मनाने के बाद जब भारतीय टीम होटल पहुंची, तो खाना खत्म हो चुका था, फिर टीम को भूखे ही सोना पड़ा।
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उस रात के बाद भारतीय क्रिकेट का सूरज उदयमान हुआ। भारतीय टीम को न सिर्फ स्पॉनसर्स मिलने शुरू हुए बल्कि विश्व क्रिकेट ने भी टीम इंडिया के दमखम को पहचाना। हॉकी के इस देश के युवा क्रिकेट की ओर आकर्षित होने लगे और आज टीम इंडिया विश्व क्रिकेट की महाशक्ति बन चुका है।
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