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आज ही के दिन खत्म हुआ था 28 साल का इंतजार: भारत बना था विश्व चैंपियन, सचिन बोले- 15 साल बाद भी ताजा हैं यादें

Thu, 02 Apr 2026 12:02 PM IST
Swapnil Shashank स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, मुंबई

सार

सचिन तेंदुलकर ने 2011 वर्ल्ड कप जीत की 15वीं सालगिरह पर उस ऐतिहासिक रात को याद करते हुए भावुक संदेश साझा किया। धोनी के छक्के, गंभीर की पारी और पूरी टीम के योगदान से मिली यह जीत आज भी भारतीय फैंस के दिलों में जिंदा है। यह सिर्फ एक जीत नहीं, बल्कि करोड़ों भारतीयों के सपने के सच होने का प्रतीक है।
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चैंपियन टीम इंडिया - फोटो : IANS
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विस्तार
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दो अप्रैल, 2011 का दिन भारतीय क्रिकेट इतिहास में हमेशा के लिए यादगार बन चुका है। इसी दिन एमएस धोनी की कप्तानी में टीम इंडिया ने मुंबई के वानखेड़े स्टेडियम में श्रीलंका को छह विकेट से हराकर आईसीसी वनडे विश्व कप पर कब्जा जमाया था। यह जीत इसलिए भी खास थी क्योंकि भारत ने 28 साल बाद विश्व कप खिताब जीता और करोड़ों क्रिकेट प्रशंसकों का सपना पूरा हुआ। महान क्रिकेटर सचिन तेंदुलकर ने भी 2011 वर्ल्ड कप जीत की 15वीं सालगिरह पर उस ऐतिहासिक पल को याद करते हुए भावुक संदेश साझा किया।
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सचिन का भावुक कर देने वाला संदेश
सचिन ने सोशल मीडिया पर एक वीडियो पोस्ट करते हुए उस रात के जज्बातों को शब्दों में पिरोया, जिसने करोड़ों भारतीयों के दिलों में हमेशा के लिए जगह बना ली। सचिन ने अपने संदेश में लिखा, 'पहली गेंद हमेशा दिल की धड़कन बढ़ा देती है… और उस रात, ये कभी रुकी ही नहीं। 15 साल बाद भी वो एहसास हमारे साथ है। हम सभी एक युवा टीम के रूप में बड़े हुए, एक ही सपना लेकर kf भारत के लिए वर्ल्ड कप जिताना है। इस सफर का हिस्सा रहे हर खिलाड़ी और हर फैन का धन्यवाद… आपने इसे खास बना दिया। जय हिंद!'

2011: जब पूरा हुआ सपना
सचिन के लिए यह जीत बेहद खास थी, क्योंकि अपने आखिरी वर्ल्ड कप में उन्होंने ट्रॉफी उठाने का सपना पूरा किया। वह टूर्नामेंट में भारत के सबसे ज्यादा रन बनाने वाले बल्लेबाज भी रहे। फाइनल मुकाबले में श्रीलंका ने टॉस जीतकर पहले बल्लेबाजी का फैसला किया। उनकी शुरुआत भले ही धीमी रही, लेकिन अनुभवी बल्लेबाज महेला जयवर्धने ने शानदार बल्लेबाजी करते हुए 88 गेंदों में नाबाद 103 रन बनाए। उनके अलावा कप्तान कुमार संगाकारा ने 48 रन का योगदान दिया, जिसकी बदौलत श्रीलंका ने निर्धारित 50 ओवरों में छग विकेट के नुकसान पर 274 रन बनाए।

भारत ने इस तरह किया लक्ष्य का पीछा
लक्ष्य का पीछा करने उतरी भारतीय टीम की शुरुआत अच्छी नहीं रही और उसने जल्दी ही अपने दोनों ओपनर खो दिए। ऐसे मुश्किल समय में विराट कोहली और गौतम गंभीर ने पारी को संभाला। कोहली ने 35 रन बनाकर टीम को स्थिरता दी, जबकि गंभीर ने 97 रन की शानदार पारी खेलकर जीत की मजबूत नींव रखी। इसके बाद कप्तान धोनी ने खुद को बल्लेबाजी क्रम में ऊपर भेजते हुए जिम्मेदारी संभाली और मैच को अंत तक लेकर गए। उन्होंने 79 गेंदों में नाबाद 91 रन बनाए और अंत में विजयी छक्का लगाकर भारत को ऐतिहासिक जीत दिलाई। उनका यह छक्का आज भी भारतीय क्रिकेट के सबसे प्रतिष्ठित और यादगार पलों में गिना जाता है।

धोनी बने थे प्लेयर ऑफ द मैच
इस मैच में बेहतरीन प्रदर्शन के लिए धोनी को ‘प्लेयर ऑफ द मैच’ चुना गया। वहीं पूरे टूर्नामेंट में शानदार ऑलराउंड प्रदर्शन करने वाले युवराज सिंह को ‘प्लेयर ऑफ द सीरीज’ का पुरस्कार मिला। युवराज ने टूर्नामेंट में 362 रन बनाने के साथ-साथ 15 विकेट भी लिए थे और भारत की जीत में अहम भूमिका निभाई थी। भारत की यह दूसरी विश्व कप जीत थी। इससे पहले टीम ने 1983 में कपिल देव की कप्तानी में वेस्टइंडीज को हराकर पहली बार विश्व कप जीता था। इसके बाद 2003 में सौरव गांगुली की कप्तानी में टीम फाइनल तक पहुंची, लेकिन रिकी पोंटिंग की अगुवाई वाली ऑस्ट्रेलिया से हार गई।
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भारत चार बार फाइनल में पहुंचा
कुल मिलाकर भारत अब तक चार बार वनडे विश्व कप के फाइनल में पहुंच चुका है, जिसमें उसे दो बार सफलता मिली है। 2 अप्रैल 2011 की यह जीत भारतीय क्रिकेट के इतिहास में गर्व, जुनून और संघर्ष का प्रतीक बनकर हमेशा याद रखी जाएगी। हाल के वर्षों में भी भारत फाइनल तक पहुंचा। 2023 में रोहित शर्मा की कप्तानी में टीम ने शानदार प्रदर्शन किया, लेकिन फाइनल में पैट कमिंस की कप्तानी वाली ऑस्ट्रेलिया ने भारत को हराकर खिताब अपने नाम कर लिया।
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